Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों के बाद केंद्र सरकार को घेरा। खेड़ा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय को सरकार को यह बताना पड़ रहा है कि उसे वही करना चाहिए जो उसकी जिम्मेदारी है। खेड़ा ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि सरकार जवाबदेही से बच रही है और सरकार निगरानी करने की बात कहकर स्थिति को मजाक बना रही है। लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है और कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। खेड़ा ने सवाल उठाया कि क्या शिक्षा मंत्री जवाबदेह हैं। अब जब कहा जा रहा है कि प्रश्नपत्र वायुसेना ले जाएगी तो अगर फिर लीक हुआ तो क्या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जिम्मेदार होंगे। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नीट‑यूजी पेपर लीक मामले पर कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं। कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से पूछा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) बड़े पैमाने पर परीक्षा कराता है, लेकिन वहां कभी पेपर लीक नहीं हुआ। एनटीए को उनसे सीखने की जरूरत है। देशभर में 3 मई को एनईईटी‑यूजी परीक्षा हुई थी। सात मई की शाम पेपर लीक की खबर सामने आई थी। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी।
सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली पर जयराम रमेश ने उठाए सवाल : कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा में लागू की गई ऑन स्क्रीन अंकन (ओएसएम) प्रणाली को लेकर कहा कि इस प्रणाली को जल्दबाजी में लागू किया गया और इससे छात्रों व अभिभावकों में असमंजस पैदा हुआ है। रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि इसी साल 12वीं की परीक्षा देने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत की जांच और एक अन्य जांच में कई खामियां सामने आई हैं। सीबीएसई ने केवल 74 दिन पहले ओएसएम लागू करने का निर्णय क्यों लिया, जबकि इसके परीक्षण में 36 तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी चिंताएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया में बदलाव कर ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को छूट क्यों दी गई और क्या यह विशेष रूप से एक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। निविदा शर्तों में कंपनी का न्यूनतम टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तय किया गया ताकि वही कंपनी पात्र हो सके।कांग्रेस नेता ने कहा कि निविदा मानकों में कई बार बदलाव किए गए। जैसे- कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन स्तर को लेवल‑5 से घटाकर लेवल‑3 करना, बड़े छात्र समूहों का अनुभव रखने वाले ठेकेदारों की बजाय छोटे अनुबंध वाले ठेकेदारों को प्राथमिकता देना और अपने डेटा सेंटर रखने वाले ठेकेदारों की बजाय केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुमोदित डेटा सेंटर वाले ठेकेदारों को वरीयता देना। रमेश ने कहा कि इन सभी बदलावों से स्पष्ट है कि सीबीएसई की योजना और क्रियान्वयन में कई कमियां रही हैं। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए ताकि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं का समाधान हो सके।
