Eksandeshlive Desk
काठमांडू: नेपाल के बागलुंग जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद आए भूस्खलन में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति लापता है। बारिश के कारण पिछले दो दिनों में जिले में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। रविवार को ही नौ लोगों की मौत हुई, जबकि एक व्यक्ति लापता है। शनिवार को एक व्यक्ति की मौत हुई थी। जिला पुलिस कार्यालय बागलुंग के प्रमुख फणिन्द्र प्रसाईँ के अनुसार, रविवार को तमानखोला गांव में चार लोगों की मौत और एक व्यक्ति लापता है। वहीं, निसीखोला गांव में पांच लोगों की मौत हुई है। तमानखोला में एक घर भूस्खलन की चपेट में आने से बुद्धिराज घर्ती (80) और भीमदेवी घर्ती (66) की मौत हो गई। इसी इलाके में भूस्खलन से आठ घर बह गए। इसके अलावा भूस्खलन से घर दबने के कारण हस्तवीर श्रीपाली (50) और उडिसरा श्रीपाली (65) की मौत हो गई। हस्तवीर की पत्नी भूस्खलन के बाद से लापता हैं। इसी तरह, निसीखोला के हदधारा में भूस्खलन से घर दबने के कारण एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान श्याम कुमारी विक (36) और उनके बेटे मनोज (13), मुकेश (8) और निशान विक (3) के रूप में हुई है। वहीं, निसीखोला के रंगिल में भूस्खलन से गोठ (पशुशाला) में दबने के कारण सूर्यबहादुर घर्ती (50) की मौत हुई। इससे एक दिन पहले शनिवार को ताराखोला धस्मर में भूस्खलन से घर दबने के कारण 59 वर्षीय मनबहादुर रोका की मौत हुई थी। बागलुंग के प्रमुख जिला अधिकारी कृष्णप्रसाद आचार्य के अनुसार, पूर्व सूचना मिलने के कारण इससे होने वाली अतिरिक्त मानवीय क्षति को रोका जा सका। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर सहित सुरक्षा अधिकारियों की टीम पहुंची है।
भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में कई जलविद्युत परियोजनाओं का उत्पादन बंद: नेपाल में लगातार हो रही बारिश, तेज हवाओं और बाढ़-भूस्खलन के कारण पश्चिमी हिस्से में ऊर्जा संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके चलते बिजली उत्पादन से लेकर प्रसारण और वितरण तक की व्यवस्था प्रभावित हुई है। गंडकी, लुंबिनी और कर्णाली प्रदेश के विभिन्न इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के प्रवक्ता राजन ढकाल ने बताया कि, कालीगंडकी कॉरिडोर की 220 केवी प्रसारण लाइन के तहत म्याग्दी के दाना से पर्वत के कुश्मा तक के खंड में टावर नंबर 21 और 22 क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसी तरह कालीगंडकी कॉरिडोर के कुश्मा–नया बुटवल खंड की प्रसारण लाइन में भी फॉल्ट आया है। इसके कारण इस कॉरिडोर की प्रसारण लाइन से जुड़े करीब 200 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बाढ़ के कारण कई प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में बिजली उत्पादन बंद हो गया है। इनमें 140 मेगावाट की कालीगंडकी, 25 मेगावाट की अपर मादी, 44 मेगावाट की सुपर मादी, 20 मेगावाट की नामार्जुन मादी, 40 मेगावाट की सेती नदी, 25 मेगावाट की अपर दोर्दी, 50 मेगावाट की अपर मर्स्याङ्दी, 70 मेगावाट की मध्य मर्स्याङ्दी और 69 मेगावाट की मर्स्याङ्दी जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं। मोदी समेत अन्य परियोजनाओं का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, राहुघाट जलविद्युत परियोजना के टेलरेस में भी क्षति पहुंची है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, प्रसारण और वितरण लाइनों को नुकसान पहुंचने के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में संभावित नुकसान को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर उत्पादन बंद किया गया है। स्थिति सामान्य होते ही परियोजनाओं को फिर से संचालन में लाया जाएगा। बाढ़ और भूस्खलन के कारण 220 केवी, 132 केवी, 33 केवी और 11 केवी की प्रसारण एवं वितरण संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।प्राधिकरण के अनुसार, नुकसान का प्रारंभिक विवरण जुटाने, बिजली आपूर्ति बाधित क्षेत्रों की पहचान करने, वैकल्पिक माध्यम से बिजली आपूर्ति शुरू करने और क्षतिग्रस्त संरचनाओं की तत्काल मरम्मत के लिए तकनीकी एवं मरम्मत टीमों को विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है।
भारी बारिश से नेपाल के चार जिले सड़क संपर्क से कटे, कई प्रमुख राजमार्ग पूरी तरह बंद: नेपाल के बागलुंग, म्याग्दी, मुस्तांग और मनांग जिले केंद्रीय सड़क नेटवर्क से कट गए हैं। गत बुधवार से लगातार हो रही भारी बारिश ने इन जिलों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। बागलुंग, म्याग्दी और मुस्तांग और मनांग को प्रदेश राजधानी पोखरा से जोड़ने वाला सिद्धार्थ राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। सड़क विभाग के अनुसार, सिद्धार्थ राजमार्ग के कुश्मा–मालढुंगा खंड में सहस्रधारा के पास करीब 100 मीटर सड़क कालीगंडकी नदी की बाढ़ में बह गई है। इसके कारण तीनों जिले केंद्रीय सड़क नेटवर्क से अलग हो गए हैं। बाढ़ के कारण पर्वत और बागलुंग को जोड़ने वाला मालढुंगा पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। खास तौर पर पुल के पर्वत की ओर का सड़क हिस्सा बह गया है। इसके साथ ही बागलुंग और पर्वत के बीच सड़क संपर्क भी टूट गया है। इसी तरह, भूस्खलन के कारण बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क खंड पूरी तरह बंद है। इससे मुस्तांग का अन्य जिलों से सड़क संपर्क भी टूट गया है। पुलिस के अनुसार, म्याग्दी के बेनी से दरबांग को जाने वाली सड़क भी अवरुद्ध है। बागलुंग में मध्यपहाड़ी राजमार्ग के विभिन्न हिस्से भी बाढ़ में बह गए हैं। सड़क डिविजन के प्रमुख हरिप्रसाद सुवेदी ने बताया कि गोडाबाँधे से गलकोट तक कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। उन्होंने बताया कि गलकोट से बुर्तिबांग तक रविवार शाम से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया है। वहीं, बुर्तिबांग से निसीखोला तक करीब पांच से सात स्थानों पर सड़क बहने की जानकारी मिली है। हालांकि, टीम अभी मौके तक नहीं पहुंच सकी है। सड़क विभाग के अनुसार, कालीगंडकी कॉरिडोर के मालढुंगा–बेनी–जोमसोम–कोरला खंड में 46 स्थानों पर सड़क अवरुद्ध है। ज्यादातर स्थानों पर मलबे के साथ भूस्खलन हुआ है, जबकि कुछ जगह सड़क कट गई है। इसी तरह, कालीगंडकी कॉरिडोर के गैडाकोट–मालढुंगा खंड में आठ स्थानों पर अवरोध है। पूर्वी नवलपरासी के घुमाउरी घाट और बागलुंग के जैमिनी में भी कालीगंडकी कॉरिडोर अवरुद्ध है। सड़क विभाग के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर हुए अवरोधों को हटाने और सड़क संपर्क बहाल करने का काम जारी है।
हुम्ला में भारी हिमपात, न्यालु और नारा झील की सड़कें बंद: नेपाल के हुम्ला जिले के उत्तरी नाम्खा गांवपालिका क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के साथ भारी हिमपात हुआ है। हिमपात के कारण नाम्खा गांव स्थित न्यालु झील और नारा झील मार्ग बंद हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि पल्जोर तामाङ के अनुसार नाम्खा के लिमी क्षेत्र के तिल, जाँङ और हल्जी गांवों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि इस बार करीब 3 फीट तक बर्फ जम गई है, जो सामान्य सर्दियों के दौरान होने वाली बर्फबारी से भी अधिक है। गांव के खेतों में लगी सब्जियों और अन्य फसलों को भी बर्फ ने पूरी तरह ढक दिया है। भारी हिमपात के कारण जंगल में मौजूद याक को भी गांव तक लाना संभव नहीं हो पा रहा है। भूस्खलन के खतरे को देखते हुए स्थानीय लोग सामुदायिक भवन में सुरक्षित रह रहे हैं। न्यालु लेक मार्ग बंद होने से लिमी-लाप्चा क्षेत्र से मानसरोवर और कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए आने-जाने वाले घरेलू और विदेशी पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
