Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: नेपाल में आई त्रासदी के बाद भारत राहत और बचाव कार्यों में लगातार सहयोग कर रहा है। अभी भी 275 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें से 49 चीन से लापता हैं। भारत ने नेपाल की सरकार और जनता के प्रति एकजुटता जताते हुए पुनर्निर्माण और पुनर्वास प्रयासों में भी सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में बताया नेपाल में अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया है। वहीं, चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। तिब्बत में फिलहाल कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है।
भारत ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 54 विशेषज्ञ और कर्मी नेपाल भेजे हैं। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय चिकित्सा दल शामिल हैं। भारतीय बचाव और फोरेंसिक दल नेपाल में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में अबतक करीब 95 टन राहत सामग्री और सात विमान भेजे हैं। कल दो भारतीय विमान काठमांडू पहुंचे, जिनमें 21 टन राहत सामग्री थी। नेपाल की जरूरत के अनुसार आने वाले दिनों में और अधिक प्राथमिक उपचार किट तथा अन्य आवश्यक सामग्री भेजी जाएगी। जलवायु परिवर्तन से जुड़े एक सवाल पर जायसवाल ने कहा कि भारत इसे साझा चुनौती मानता है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने की कार्यवाही साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए। उनके अनुसार ऐतिहासिक रूप से अधिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित देशों को उत्सर्जन कम करने के साथ विकासशील देशों को वित्त और प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने में नेतृत्व करना चाहिए।
