पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद विष्णुगढ़ कांड को लेकर डीजीपी के खुलासे पर किये कई सवाल

360° Ek Sandesh Live
प्रेस कल्ब में कॉन्फ्रेंस करते हुए

Ranchi : रांची प्रेस कल्ब मे पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद  ने विष्णुगढ़ कांड को लेकर कई सवाल किये जिसमे कही कि डीजीपी  द्वारा निर्देशित पुलिस अधीक्षक दिनांक 01/04/26 जो विष्णुगढ़ के कुसुम्बा कांड पर आपने जारी करवाये है उसे पढ़ कर झारखंड पुलिस की काबिलियत पर मैं हंसु या रोऊं ये समझ मे नहीं आ रहा है । पूरा प्रदेश एवम देश जब इस सनसनी खेज हत्याकांड का कारण और दोषियों का गिरफ्तारी का उदभेदन के लिए बेचैनी से इंतज़ार कर रहे थे तब 01/04/26 के मध्य रात्रि में ये विज्ञप्ति जारी हुआ, अब जरा हमारे सवालों का जवाब दीजिए ।

जो पूर्ण रूप से इस वैज्ञप्ति पर आधारित है ।
*पहला सवाल*-आपके पुलिस के प्रेस विज्ञप्ति के पारा 2 से शुरू करते है । आपके कहानी के अनुसार मृतका की माँ रेशमी देवी ही इस कांड के हत्यारिन है ,और सूचक भी । तो क्या इस कांड का FIR का लिखित आवेदन बदल दिया गया है क्या? चंदा मामा की कहानी सबको रास आ गया, बंटी भी वापस मसाज जुलूस से वापस सारा विरोध वापस और क्यों ना हो कहानी के रचयिता कहानी के पात्र, चरित्र, सब यही लोग है।

क्योंकि अब तो सूचक ही अभियुक्त बन गए है । तो FIR कोर्ट में किससे साबित करवाइयेगा । अब तो फिर शामिल ही नहीं होगा और रश्मि देवी को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अगर फिर बदल गया है तो वह भी नहीं बता रहे हैं आखिर इनको किस केस में अरेस्ट किया गयाहै।

2. आप के अनुसार कांड के लिखित आवेदन मे रेशमी देवी ने धनेश्वर पासवान का नाम लिया था एवम अन्य अज्ञातों का भी,पिछले 9 दिनों मे आपने किसी को पता ही नहीं चलने दिया की ये धनेश्वर पासवान के साथ आपने क्या किया । जबकि धनेश्वर पासवान के ऊपर एफ आई आर भी हुआ है।

तो अभी भी किसी को पता नहीं है की धनेश्वर पासवान को आपलोगों ने क्लीन चीट दे दिए है की नहीं । ये कहां गायब हो गए।

*अब आते है तीसरे पैराग्राफ पे ।*
SIT का  26 मार्च को गठन हो गया था, बड़े बड़े IPS अधिकारी भी उसमें शामिल है पर 30 मार्च के शाम से पहले,किसी भी IPS अधिकारी को घटना स्थल के इर्द गिर्द भी नहीं देखा गया । ये लोग सो रहे थे क्या?


*अब आते है para4 पर-* इसमें जो लिखा है ये कौन सा तकनीकी साक्ष्य और सूचना आप संकलन किए और कब किए?
और कब ये भीम राम,मृतिका की मां और शांति देवी भक्तिन से कब आपने पूछ ताछ किया?
और इनका द्वारा दिया गया पुलिसया बयान छोड़कर क्या है सबूत आपके पास? मैं यह नहीं कह रही हूं कि ये लोग निर्दोष है, पुलिसिया बयान पर रिमांड हो सकता है लेकिन ट्रायल नहीं हो सकता है। पुलिसिया बयान को कोर्ट में एडमीसिबल नहीं है।
आपने घटना स्थल का एविडेंस को secure नहीं किया और 9 दिनों तक खुला छोड़ दिया ? क्यों छोड़ा?
आपने कहा की रेशमी देवी का बेटा सुधीर सिंह बरसो से बीमार चल रहा था, इनकी बीमारी का काग़जात पुलिस ने जुटाया है कौन सा ऐसा बीमारी है कहां इलाज हुआ कोई सबूत है आपके पास? ऐसा तो प्रेस विज्ञप्ति में लिखा हुआ नहीं है ।
अभियुक्त रश्मि देवी का भूमि विवाद है ये आपने लिखा,ये भूमि विवाद का केस नंबर कितना है ये आपने नहीं लिखा और किसके साथ है ये भी नहीं लिखा ।
अब आते है para 5 पर बड़ा चूक गए है DGP मैडम, computer का jug है ना,लिखने से पहले पत्रा नहीं नहीं देखे थे क्या । अरे भक्तिन तो रामनवमी के पर्व के अष्टमी के दिन बलि का मुहरत चुना था, पत्रा के हिसाब से 25 ,26 के रात अष्टमी का तिथि था और 24 -25 के रात तो सप्तमी की रात थी ये तो premature बलि चढ गया भाइ ।
आ हा हा चूक गए है आप ,क्या कीजिएगा? उमर भी हो गया और रिटायर भी हो गए है,अब पद छोड़ दीजिए अब और हताश मत कीजिए ।
हत्या तो 24 -25 के रात मे हुई है । ये तो premature बलिदान हो गया । टाइम लाइन तो चूक गए आप ।
लेकिन इस कहानी लिखने से पहले पंचांग नहीं देखे थे क्या?
आप ख़ुद तो ब्राह्मण है ।


*अब आते है para 6 पर*- ये बताइए ना राह चलते हुए कोई किसी को ये कह कर बुलाये की चलो मेरी बेटी का हत्या करना है मुझे साथ दो । तो क्या लगता है आपको साथ देगा?
24 तारीख के शाम को सात बजे से लेके साढ़े 9 बजे के बीच अचानक रश्मि ने उसकी छोटी बेटी का बली चढ़ाने के लिए भीम राम से आग्रह करती है और भीम राम तुरंत राजी हो जाता है और रेशमी देवी के साथ चल देता है भक्ताईन के घर मृतिका का बलि चढ़ाने । कहा से लाते है ऐसा वाहियात कहानी । कोई विश्वास करेगा जी? ऐसा होता है क्या?कभी सुने है? भीम राम जैसा कोई कर सकता है ऐसा काम । आजकल खाने का नेवता देने पर कोई खाना खाने नहीं आता है अंजान के घर और बुलाने पर ये भीम राम चल गए है बली चढ़ाने और ख़ुद ही गला घोट के मारे?
*para 7 मे लिखा है* ऐसा,और फिर पत्थर से भीम राम ने मृत्तिका का सर फोड़ दिया । ये जो चंदा मामा का कहानी आप लिखे है इससे तो लगता है की आप को और आप की पूरी SIT के टीम को कांस्टेबल से भी निचले दर्जा का ज्ञान है । क्यों पद की गरिमा खराब कर रही है,उतर जाइए ना भाई । यहां तो आपकी कहानी भगतीन के घर पर ही खत्म हो गया जहां लाश मिला था वहां तक तो कहानी पहुंची ही नहीं।

अब आते है भीम राम प्रसंग पर?
कौन है ये भीम राम?आपने नहीं बताया मैं बताती हूँ ये है BJP के बूथ अध्यक्ष ये सब कोई जानते है बीजेपी के नेताओं के साथ उनका फोटो भी है, और ये भीम राम के साथ रेश्मि देवी का माजरा भी जानते है । बिना किसी स्वार्थ का यू ही नहीं साथ दिया है । एक चीज़ और पिछले 24 तारिक से लेकर इस महीने के 1 तारिक तक फोरेंसिक के किसी टीम को घटना स्थल के इर्द गिर्द नहीं देखा गया और आपके प्रेस विज्ञप्ति मे भी कहीं नहीं लिखा हुआ है की आपने फोरेंसिक evidence collect किया । यहां किसी प्रकार के तलाशी जपती सूची कभी जिक्र नहीं है।

मृतिका के vaginal swab आपने collect kiya,protect kiya aur DNA test kiya , और यू ही बोल दिए बलात्कार नहीं हुआ है आपने पॉस्को इन्वेस्टीगेशन का SOP की धज्जिया उड़ाई गई।
DNA टेस्ट किया ही नहीं होगा । कहीं तो लिखे नहीं । और बलात्कार के बिंदु पर बोले नहीं हुआ बलात्कार। स्थानीय थाना प्रभारी ने तो पहले ही कहा था कि प्राइवेट पार्ट में कुछ भी नहीं डाला गया था लेकिन यहां लिखा गया है कि प्राइवेट पार्ट में स्टिक घुसाया गया है अब किस बात को माना जाए। और वह स्टिक गया कहां?

sop का धज्जिया उड़ा दिया है ।
आपने साइंटिफिक इन्वेस्टीगेशन के जगह पे एक साहित्य रचना किया है ।
ऐसे लड़ेगी प्रॉसिक्यूशन इस केस को । आपने मोटिव का धज्जिया उड़ाया और साक्ष्य का भी धज्जी उड़ाया ।
ये है अपकी पुलिसिंग,वैसे मैं शुरू से जानती थी और आप भी जानती थी की असली कहानी क्या है और इसमें BJP के admi शामिल है । इसीलिए BJP इतना ताम झाम के साथ विरोध प्रदर्शन कर रही थी । और मैं विरोध पर इसलिए उतरी थी की आप बीजेपी के कथन अनुसार काम ना करे । पर आपने वही किया जिसकी मुझे आशंका थी । इसीलिए मैंने इस कांड का CBI जांच का माँग रखी थी । ये कहानी लिखकर BJP के प्रतिनिधिमंडल 1 तारिक को दोपहर 12 बजे आपको दिया था क्या? मध्य रात्रि मे कौन DGP जाता है अनुसंधान करने वो bhi घटना के 10 दिन बाद । विज्ञप्ति मे एक छापामारी दल भी देखे 13 police का
।  कहा छपा मारे ? तीनो अभियुक्त तो उसी गाँव का था । भीम राम तो रामनवमी के जुलूस नाच रहा था पुलिस सुरक्षा मे और रेशमी  देवी तो अपने घर पर थी,मैं भी  मिली,झारखंड के वित मंत्री भी मिले । अब मुझे पता चला प्रेस विज्ञप्ति के बाद की इस परिवार को सुरक्षा का  अभाव हो गया और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई ।
अचानक सुरक्षा का अभाव हो गया है ।

असल मे सुरक्षा के आर्ड मे इन्हें पुलिस की घेराबंदी मे डाल दिया गया है ताकि मीडिया,राजनैतिक पार्टी के लोग,आम आदमी इस परिवार के लोगो से बात ना कर सके । कहीं बात करने पर असली कहानी सामने ना आ जाये ।

अभुक्त हिरासत मे । साक्षय संकलन हो गया किसी ने धमकी इस परिवार को नहीं दिया ।तो भाई किस बात का सुरक्षा का अभव या फिर मीडिया,राजनैतिक वैयक्ति या आम आदमी इनसे पुलिस को डर लगने लगा है की कहीं ये लोग मृतिका के परिवार के बचे कूचे परिजनों से मिल के कहीं सच का खुलासा ना कर दे और कहीं कुसुम्बा का एप्सीटाइन फाइल ना खुल जाये । और Bjp का बोलती बंद ना हो जाये इसलिए सुरक्षा के नाम पर मृतिका के परिजनों को पुलिस घेराबंदी मे रखा गया । मुझे लगता है मृतका की रूह मरने का समय भी इतनी नहीं कांपी होगी जितना इस पुलिस इन्वेस्टीगेशन से कांपी होगी ।
इस पुलिस investigation से मृतका का दुबारा हत्या हुआ । ऐसे हत्यारों के साथ निभानेवाला हउवा वर्दी का पुलिस झारखंड के किसी भी नागरिक को मंजूर नहीं ।
ये भगवा वर्दी वाले पुलिस जनता को पचेगी तो ठीक है ।

इसपर भी मुख्यमंत्री महोदय ,महामहिम राज्यपाल महोदय एवम माननीय उच्च न्यायालय चुप रहे तो हम देश वासियो के लिए दुर्भाग्यपूर्ण समय होगा । सम्बिधान के तीनो स्तंभ की गरिमा इस कांड के सटीक अनुसंधान एवम अभियुक्तों के सज़ा पर टिकी हुई है । Bjp कहती थी ना की वो लाशो का राजनीति नहीं करते है तो ये क्या है,और अगर मुख्यमंत्री अगर इसमें चुप है तो JMM भी इस कांड मे शामिल है । सही बोलते हैं बीजेपी जिंदा लोगों को लाश बनाकर उसे लाश के ऊपर राजनीति करती है। अब कुसुंबा के सीता का एकमात्र सहारा संविधान का चौथा स्तंभ मीडिया ही रह गई है।

माननीय मुख्यमंत्री जी,महामहिम राज्यपाल महोदय और माननीय उच्च न्यायालय अगर ये सब के बाद भी चुप रहेंगे तब तो संविधान के तीनों स्तंभ जनता के विश्वास मे खड़े तो नहीं उतरेंगे । अब मीडिया ही एक मात्र बचा हुआ है संविधान के चौथा स्तंभ ।
और मुझे इनपर भरोसा है ,की इस अन्याय के ख़िलाफ़ मीडिया चुप नहीं बैठेगी ।
विशेषकर माननीय मुख्यमंत्री जी अगर अभी भी चुप रहेंगे तो इस मामले मे मुझे तो लगेगा की BJP के B टीम के रूप मे JmM भी शामिल है इस प्रकरण मे ।



अब आप मीडिया ये बताइए ये कैसा देश है कैसा राजनीति है और कहाँ न्याय है । वो तो जय श्री राम बोलते है हम बोलते hai राम राम । यही है हनुमान चालीसा पाठ करता हुआ भूत । क्योंकि बाकी तीन स्तंभ सीता के साथ है क्या कहते हैं आप?

वो कह रहे जय श्री राम,जय श्री राम । हम कह रहे है राम राम राम राम । छी छी ऐसा करियेगा ।

इस बच्ची का दुबारा हत्या हुआ है इस अनुसंधान के ज़रिए, इस अनुसंधान प्रतिवेदन को देख के मुझे लगता है की बच्ची का रूह इतनी काप गई होगी जितना उसकी हत्या के समाय नहीं कापा होगा ।
पूरे सिस्टम ने मिलके दुबारा इस बच्ची का गला घोटा । उसके पीछे वजह कुछ और है ना FIR साबित हो पाएगा ना कोई सबूत है जो ट्रायल में चल पाएगा सब बरी हो जाएंगे।

मीडिया के माध्यम से मैं फिर आवाज़ लगाती हूँ की इस घटना की CBI जाँच हो । और दोषी अभियुक्त के साथ-साथ दोषी पुलिस पर भी कार्रवाई हो।

तो FBI ya CIA को बुलाएं क्या सारा एजेंसी BJP का हो चुका है ।
  1. आप के अनुसार कांड के लिखित आवेदन मे रेशमी देवी ने धनेश्वर पासवान का नाम लिया था एवम अन्य अज्ञातों का भी,पिछले 9 दिनों मे आपने किसी को पता ही नहीं चलने दिया की ये धनेश्वर पासवान के साथ आपने क्या किया । जबकि धनेश्वर पासवान के ऊपर एफ आई आर भी हुआ है।

तो अभी भी किसी को पता नहीं है की धनेश्वर पासवान को आपलोगों ने क्लीन चीट दे दिए है की नहीं । ये कहां गायब हो गए।

अब आते है तीसरे पैराग्राफ पे ।
SIT का 26 मार्च को गठन हो गया था, बड़े बड़े IPS अधिकारी भी उसमें शामिल है पर 30 मार्च के शाम से पहले,किसी भी IPS अधिकारी को घटना स्थल के इर्द गिर्द भी नहीं देखा गया । ये लोग सो रहे थे क्या?

अब आते है para4 पर- इसमें जो लिखा है ये कौन सा तकनीकी साक्ष्य और सूचना आप संकलन किए और कब किए?
और कब ये भीम राम,मृतिका की मां और शांति देवी भक्तिन से कब आपने पूछ ताछ किया?
और इनका द्वारा दिया गया पुलिसया बयान छोड़कर क्या है सबूत आपके पास? मैं यह नहीं कह रही हूं कि ये लोग निर्दोष है, पुलिसिया बयान पर रिमांड हो सकता है लेकिन ट्रायल नहीं हो सकता है। पुलिसिया बयान को कोर्ट में एडमीसिबल नहीं है।
आपने घटना स्थल का एविडेंस को secure नहीं किया और 9 दिनों तक खुला छोड़ दिया ? क्यों छोड़ा?
आपने कहा की रेशमी देवी का बेटा सुधीर सिंह बरसो से बीमार चल रहा था, इनकी बीमारी का काग़जात पुलिस ने जुटाया है कौन सा ऐसा बीमारी है कहां इलाज हुआ कोई सबूत है आपके पास? ऐसा तो प्रेस विज्ञप्ति में लिखा हुआ नहीं है ।
अभियुक्त रश्मि देवी का भूमि विवाद है ये आपने लिखा,ये भूमि विवाद का केस नंबर कितना है ये आपने नहीं लिखा और किसके साथ है ये भी नहीं लिखा ।
अब आते है para 5 पर बड़ा चूक गए है DGP मैडम, computer का jug है ना,लिखने से पहले पत्रा नहीं नहीं देखे थे क्या । अरे भक्तिन तो रामनवमी के पर्व के अष्टमी के दिन बलि का मुहरत चुना था, पत्रा के हिसाब से 25 ,26 के रात अष्टमी का तिथि था और 24 -25 के रात तो सप्तमी की रात थी ये तो premature बलि चढ गया भाइ ।
आ हा हा चूक गए है आप ,क्या कीजिएगा? उमर भी हो गया और रिटायर भी हो गए है,अब पद छोड़ दीजिए अब और हताश मत कीजिए ।
हत्या तो 24 -25 के रात मे हुई है । ये तो premature बलिदान हो गया । टाइम लाइन तो चूक गए आप ।
लेकिन इस कहानी लिखने से पहले पंचांग नहीं देखे थे क्या?
आप ख़ुद तो ब्राह्मण है ।

अब आते है para 6 पर– ये बताइए ना राह चलते हुए कोई किसी को ये कह कर बुलाये की चलो मेरी बेटी का हत्या करना है मुझे साथ दो । तो क्या लगता है आपको साथ देगा?
24 तारीख के शाम को सात बजे से लेके साढ़े 9 बजे के बीच अचानक रश्मि ने उसकी छोटी बेटी का बली चढ़ाने के लिए भीम राम से आग्रह करती है और भीम राम तुरंत राजी हो जाता है और रेशमी देवी के साथ चल देता है भक्ताईन के घर मृतिका का बलि चढ़ाने । कहा से लाते है ऐसा वाहियात कहानी । कोई विश्वास करेगा जी? ऐसा होता है क्या?कभी सुने है? भीम राम जैसा कोई कर सकता है ऐसा काम । आजकल खाने का नेवता देने पर कोई खाना खाने नहीं आता है अंजान के घर और बुलाने पर ये भीम राम चल गए है बली चढ़ाने और ख़ुद ही गला घोट के मारे?
para 7 मे लिखा है ऐसा,और फिर पत्थर से भीम राम ने मृत्तिका का सर फोड़ दिया । ये जो चंदा मामा का कहानी आप लिखे है इससे तो लगता है की आप को और आप की पूरी SIT के टीम को कांस्टेबल से भी निचले दर्जा का ज्ञान है । क्यों पद की गरिमा खराब कर रही है,उतर जाइए ना भाई । यहां तो आपकी कहानी भगतीन के घर पर ही खत्म हो गया जहां लाश मिला था वहां तक तो कहानी पहुंची ही नहीं।

अब आते है भीम राम प्रसंग पर?
कौन है ये भीम राम?आपने नहीं बताया मैं बताती हूँ ये है BJP के बूथ अध्यक्ष ये सब कोई जानते है बीजेपी के नेताओं के साथ उनका फोटो भी है, और ये भीम राम के साथ रेश्मि देवी का माजरा भी जानते है । बिना किसी स्वार्थ का यू ही नहीं साथ दिया है । एक चीज़ और पिछले 24 तारिक से लेकर इस महीने के 1 तारिक तक फोरेंसिक के किसी टीम को घटना स्थल के इर्द गिर्द नहीं देखा गया और आपके प्रेस विज्ञप्ति मे भी कहीं नहीं लिखा हुआ है की आपने फोरेंसिक evidence collect किया । यहां किसी प्रकार के तलाशी जपती सूची कभी जिक्र नहीं है।

मृतिका के vaginal swab आपने collect kiya,protect kiya aur DNA test kiya , और यू ही बोल दिए बलात्कार नहीं हुआ है आपने पॉस्को इन्वेस्टीगेशन का SOP की धज्जिया उड़ाई गई।
DNA टेस्ट किया ही नहीं होगा । कहीं तो लिखे नहीं । और बलात्कार के बिंदु पर बोले नहीं हुआ बलात्कार। स्थानीय थाना प्रभारी ने तो पहले ही कहा था कि प्राइवेट पार्ट में कुछ भी नहीं डाला गया था लेकिन यहां लिखा गया है कि प्राइवेट पार्ट में स्टिक घुसाया गया है अब किस बात को माना जाए। और वह स्टिक गया कहां?
। कहा छपा मारे ? तीनो अभियुक्त तो उसी गाँव का था । भीम राम तो रामनवमी के जुलूस नाच रहा था पुलिस सुरक्षा मे और रेशमी देवी तो अपने घर पर थी,मैं भी मिली,झारखंड के वित मंत्री भी मिले । अब मुझे पता चला प्रेस विज्ञप्ति के बाद की इस परिवार को सुरक्षा का अभाव हो गया और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई ।
अचानक सुरक्षा का अभाव हो गया है ।

असल मे सुरक्षा के आर्ड मे इन्हें पुलिस की घेराबंदी मे डाल दिया गया है ताकि मीडिया,राजनैतिक पार्टी के लोग,आम आदमी इस परिवार के लोगो से बात ना कर सके । कहीं बात करने पर असली कहानी सामने ना आ जाये ।

अभुक्त हिरासत मे । साक्षय संकलन हो गया किसी ने धमकी इस परिवार को नहीं दिया ।तो भाई किस बात का सुरक्षा का अभव या फिर मीडिया,राजनैतिक वैयक्ति या आम आदमी इनसे पुलिस को डर लगने लगा है की कहीं ये लोग मृतिका के परिवार के बचे कूचे परिजनों से मिल के कहीं सच का खुलासा ना कर दे और कहीं कुसुम्बा का एप्सीटाइन फाइल ना खुल जाये । और Bjp का बोलती बंद ना हो जाये इसलिए सुरक्षा के नाम पर मृतिका के परिजनों को पुलिस घेराबंदी मे रखा गया । मुझे लगता है मृतका की रूह मरने का समय भी इतनी नहीं कांपी होगी जितना इस पुलिस इन्वेस्टीगेशन से कांपी होगी ।
इस पुलिस investigation से मृतका का दुबारा हत्या हुआ । ऐसे हत्यारों के साथ निभानेवाला हउवा वर्दी का पुलिस झारखंड के किसी भी नागरिक को मंजूर नहीं ।
ये भगवा वर्दी वाले पुलिस जनता को पचेगी तो ठीक है ।

इसपर भी मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवम  उच्च न्यायालय चुप रहे तो हम देश वासियो के लिए दुर्भाग्यपूर्ण समय होगा । सम्बिधान के तीनो स्तंभ की गरिमा इस कांड के सटीक अनुसंधान एवम अभियुक्तों के सज़ा पर टिकी हुई है । Bjp कहती थी ना की वो लाशो का राजनीति नहीं करते है तो ये क्या है,और अगर मुख्यमंत्री अगर इसमें चुप है तो JMM भी इस कांड मे शामिल है । सही बोलते हैं बीजेपी जिंदा लोगों को लाश बनाकर उसे लाश के ऊपर राजनीति करती है। अब कुसुंबा के सीता का एकमात्र सहारा संविधान का चौथा स्तंभ मीडिया ही रह गई है।मुख्यमंत्री जी,महामहिम राज्यपाल महोदय और माननीय उच्च न्यायालय अगर ये सब के बाद भी चुप रहेंगे तब तो संविधान के तीनों स्तंभ जनता के विश्वास मे खड़े तो नहीं उतरेंगे । अब मीडिया ही एक मात्र बचा हुआ है संविधान के चौथा स्तंभ ।
और मुझे इनपर भरोसा है ,की इस अन्याय के ख़िलाफ़ मीडिया चुप नहीं बैठेगी ।
विशेषकर माननीय मुख्यमंत्री जी अगर अभी भी चुप रहेंगे तो इस मामले मे मुझे तो लगेगा की BJP के B टीम के रूप मे JmM भी शामिल है इस प्रकरण मे ।

अब आप मीडिया ये बताइए ये कैसा देश है कैसा राजनीति है और कहाँ न्याय है । वो तो जय श्री राम बोलते है हम बोलते hai राम राम । यही है हनुमान चालीसा पाठ करता हुआ भूत । क्योंकि बाकी तीन स्तंभ सीता के साथ है क्या कहते हैं आप?

वो कह रहे जय श्री राम,जय श्री राम । हम कह रहे है राम राम राम राम । छी छी ऐसा करियेगा ।

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