छात्रों के मुद्दों को लेकर संसद में गतिरोध जारी, राहुल गांधी ने कहा-धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत तीन मांगों से कोई समझौता नहीं करेगी कांग्रेस
Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पिछले दिनों जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए छात्र शाहिद को शुक्रवार को सोनिया गांधी के आवास पर मीडिया के सामने लेकर आए। राहुल ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान छात्र पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उसकी एक आंख गंभीर रूप से जख्मी हो गई। सरकार छात्रों पर हुए अत्याचार की जिम्मेदारी ले, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से माफी मांगें। नीट प्रश्नपत्र लीक मुद्दे पर संसद में चर्चा को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस तीन मांगों पर अड़ी है, जिनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के दोषियों पर कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों से माफी की मांग शामिल है। हम इन मांगों से कोई समझौता नहीं करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस घटना के लिए छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें : राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा कि सरकार दावा कर रही है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन घायल युवक इसकी सच्चाई का सबूत है। उन्होंने युवक की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह तिरंगा लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहा था, तभी उस पर पैलेट गन चलाई गई। युवक की आंख बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है और अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि उसकी दृष्टि वापस आ पाएगी या नहीं। उन्होंने कहा कि हजारों युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जबकि वे केवल अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे। जिन युवाओं ने पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए वर्षों मेहनत की, उन्हें बाद में बताया गया कि प्रश्नपत्र लीक हो गया। जिनके पास लाखों रुपये थे, वे प्रश्नपत्र खरीद सके, जबकि बाकी अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के माता-पिता ने अपनी मेहनत की कमाई से उन्हें पढ़ाया और भविष्य बनाने का अवसर दिया, लेकिन सरकार ने युवाओं के भविष्य पर हमला किया है। छात्र केवल तीन मांगें कर रहे हैं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए क्योंकि वे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। प्रदर्शनकारियों पर कथित पैलेट गन चलाने और लाठीचार्ज करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस घटना के लिए छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को डराना-धमकाना बंद किया जाना चाहिए और उनकी जायज मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा था कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए हैं और दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। अधिकारियों ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन तथा दोषियों को कड़ी सजा दिलाने संबंधी मसौदा तैयार कर उन्हें सौंप दिया है। इस मसौदे पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा की जाएगी और सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप देकर जल्द संसद में प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रधानमंत्री पहले धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करें, फिर संसद में दें बयान: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वीडियो संदेश के बाद कहा कि प्रधानमंत्री को संसद के बाहर एकतरफा बयान देने के बजाय संसद में आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री सदन में आने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करें, छात्रों से माफी मांगें और छात्रों पर लाठीचार्ज तथा पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। खरगे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि जब संसद का सत्र चल रहा हो तो प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर बयान देना चाहिए, न कि देर रात वीडियो जारी कर संसद के बाहर अपनी बात रखनी चाहिए। सदन में आने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाकर आएं। कांग्रेस अध्यक्ष ने राहुल गांधी की ओर से उठाई गई मांगों को दोहराते हुए कहा कि सरकार पहले छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठी-डंडों तथा पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। इसके बाद ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली पर विस्तृत चर्चा की जा सकती है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने उनसे कहा कि चर्चा होने दी जाए। जब वह जवाब देना चाह रहे थे तो उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का रुख स्पष्ट है। पहली मांग है कि भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए। दूसरी मांग है कि जिन लोगों ने छात्रों पर हमला किया, उन पर कार्रवाई और जवाबदेही तय होनी चाहिए। तीसरी मांग है कि प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और कांग्रेस इस पर कोई समझौता नहीं करेगी।
नीट पेपर लीक मामले में शनिवार को पूरे देश में जिलास्तर पर कैंडल मार्च, सत्याग्रह करेगी कांग्रेस : कांग्रेस नीट और सीबीएसई परीक्षा में हुई अनियमितताओं तथा छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में 25 जुलाई की शाम पूरे देश में जिलास्तर पर कैंडल मार्च और सत्याग्रह आयोजित करेगी। यह कार्यक्रम महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तक जाकर समाप्त होगा और छात्रों-युवाओं के साथ एकजुटता का प्रतीक होगा। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से शुक्रवार को आधिकारिक पत्र जारी कर कहा गया कि यह सत्याग्रह छात्रों और युवाओं के समर्थन में होगा, जिनका भविष्य परीक्षा प्रणाली की विफलताओं से प्रभावित हुआ है। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की भी मांग की है। पत्र में कहा गया कि सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियां और जिला कांग्रेस कमेटियां अपने-अपने क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का नेतृत्व करें। इसमें ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों, फ्रंटल संगठनों, विभागों, प्रकोष्ठों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस ने सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों से कहा कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रभावी ढंग से आयोजित हो। साथ ही मीडिया और सोशल मीडिया पर व्यापक कवरेज मिले ताकि यह संदेश स्पष्ट रूप से जाए कि कांग्रेस छात्रों के साथ खड़ी है और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी।
