राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड की पहल को मिली सराहना, पीसीपीएनडीपी क्रियान्वयन में देश में अव्वल

360° Ek Sandesh Live

BY SUNIL


रांची /नई दिल्ली। पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 के सुदृढ़ क्रियान्वयन को लेकर भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के होटल ली मेरिडियन में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एएस एंड एमडी आराधना पटनायक ने की। कार्यशाला का उद्देश्य अधिनियम के क्रियान्वयन की चुनौतियों पर मंथन, राज्यों के बीच सीख साझा करना और डिजिटल ई-गवर्नेंस को मजबूत करना था। झारखंड के लिए यह गौरव का क्षण रहा कि उसे देशभर में पीसीपीएनडीटी अधिनियम को सबसे प्रभावी रूप से लागू करने वाले उत्कृष्ट राज्यों में शामिल किया गया। राज्य की नवाचारी पहलों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का मौका भी मिला।
झारखंड की पांच उत्कृष्ट पहल जिनकी हुई सराहना -जीरो टॉलरेंस नीति : अल्ट्रासाउंड केंद्रों का गुणवत्ता-युक्त सघन निरीक्षण और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई। बेटी बचाओ अभियान : सेव द गर्ल चाइल्ड संदेश के लिए राज्यव्यापी जेईसी और बीईसी गतिविधियां। डीएसी की सक्रियता : जिला सलाहकार समिति की नियमित बैठकों से प्रभावी अनुश्रवण। फर्जी डॉक्टरों पर नजर : निर्धारित मानकों के विपरीत दो से अधिक केंद्रों पर सेवा देने वाले चिकित्सकों की पहचान और निगरानी। गरिमा झारखंड पोर्टल : राज्य के पीसीपीएनडीपी पोर्टल में तकनीकी अपग्रेड, जिससे फॉर्म-ऋ का बेहतर विश्लेषण और डेटा आधारित कार्रवाई संभव हुई। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह और एनएचएम के अभियान निदेशक सह राज्य समुचित प्राधिकारी के अध्यक्ष शशि प्रकाश झा के स्पष्ट निदेर्शों और सतत मार्गदर्शन से झारखंड अग्रणी राज्य बना है। राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड का प्रतिनिधित्व राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार लिंडा, राज्य समन्वयक रफत फरजाना, पश्चिम सिंहभूम की सिविल सर्जन डॉ. मीना कालुंडिया और चतरा के सहायक नोडल पदाधिकारी डॉ. आशीष ने किया।राज्य सरकार ने कहा है कि कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम जारी रहेगा।

Spread the love