ऋण चुकाने के बाद भी खाते से 41 हजार की अतिरिक्त कटौती, यस बैंक को रकम लौटाने का आदेश

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Eksandeshlive Desk

पश्चिमी सिंहभूम: व्यक्तिगत ऋण की पूरी राशि चुकाने के बाद भी बैंक खाते से अतिरिक्त रकम की कटौती करना यस बैंक को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने चाईबासा के टुंगरी निवासी उपभोक्ता बिजन कुमार पोद्दार की शिकायत पर बैंक के खिलाफ एकतरफा फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त वसूली गई 41,384 रुपये की राशि वापस करने का आदेश सोमवार को दिया है। आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने बैंक को इस रकम पर शिकायत दर्ज करने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।

मामले के अनुसार बिजन कुमार पोद्दार ने यस बैंक से 1,67,536 रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। ऋण की मासिक किस्त 3,964 रुपये निर्धारित थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि उन्होंने निर्धारित अवधि में ऋण की पूरी राशि चुका दी, लेकिन इसके बावजूद बैंक खाते से रकम की कटौती जारी रही। उनके अनुसार बैंक ने 885 रुपये प्रतिमाह की दर से 40 माह तक कुल 35,400 रुपये और अन्य समायोजन के नाम पर 5,984 रुपये अतिरिक्त काट लिए। इस तरह उनके खाते से कुल 41,384 रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई। शिकायतकर्ता ने बैंक से अतिरिक्त राशि वापस करने के साथ ऋण खाता बंद करने का अनापत्ति प्रमाणपत्र और ऋण बंद होने का प्रमाणपत्र जारी करने तथा क्रेडिट रिकॉर्ड में ऋण की सही स्थिति दर्ज कराने की मांग की थी। मामले में यस बैंक, जमशेदपुर स्थित कल्याणी एसोसिएट और बैंक के पंजीकृत एवं कॉरपोरेट कार्यालय मुंबई को आयोग की ओर से नोटिस जारी किया गया था। नोटिस की तामील होने के बावजूद बैंक की ओर से आयोग के समक्ष न तो उपस्थिति दर्ज कराई गई और न ही कोई लिखित जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद छह मार्च 2026 के आदेश से मामले की सुनवाई बैंक के विरुद्ध एकतरफा की गई।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अतिरिक्त राशि की कटौती को सही ठहराने के लिए बैंक ऋण समझौता, भुगतान का विस्तृत विवरण, शुल्क की गणना अथवा अन्य संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता था, लेकिन बैंक की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया। ऐसे में अतिरिक्त रकम की कटौती को उचित नहीं माना जा सकता। आयोग ने बैंक की इस कार्रवाई को सेवा में कमी मानते हुए उपभोक्ता को राहत देने का आदेश दिया। आयोग ने बैंक को 20 हजार रुपये मानसिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के तौर पर भी भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा बैंक को बिना किसी देरी के ऋण का अनापत्ति प्रमाणपत्र और ऋण बंद होने का प्रमाणपत्र जारी करना होगा। संबंधित क्रेडिट सूचना कंपनियों के रिकॉर्ड में भी ऋण की सही स्थिति दर्ज कराने का आदेश दिया गया है। आयोग ने बैंक को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर सभी निर्देशों का पालन करने को कहा है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किए जाने पर देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।

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