Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर गड्ढे की पहचान कर उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। सड़क निर्माण की गुणवत्ता से समझौता करने वाली कंपनियों, ठेकेदारों, सलाहकारों और अधिकारियों पर जुर्माना लगाने के साथ उन्हें काली सूची में डालने का भी प्रावधान है। पिछले कुछ महीनों से वह खुद सड़क परियोजनाओं की निगरानी कर रहे हैं। इस दौरान गुणवत्ता संबंधी समस्याओं में 30 फीसदी की कमी आई है। उन्हें उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में बाकी समस्याओं का भी समाधान हो जाएगा।
गडकरी मंगलवार को यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘हाईवेज ऑफ इंडियाज फ्यूचर : स्मार्ट, सेफ एंड सस्टेनेबल’ में शामिल हुए। सम्मेलन में सीआईआई की राष्ट्रीय सड़क एवं राजमार्ग समिति के अध्यक्ष एमवी सतीश, सीआईआई के सड़क सुरक्षा राष्ट्रीय कार्यबल के सह-अध्यक्ष और इंडिया आईटीएस फोरम के अध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव तथा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के संस्थागत कारोबार के प्रमुख जॉन प्रसाद कंदमपरंबिल भी शामिल हुए। कार्यक्रम में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, सड़क सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स लागत, नई तकनीक, टिकाऊ बुनियादी ढांचे और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोगों की ओर से साझा की जाने वाली शिकायतें सड़क की खामियों की पहचान करने में मदद कर रही हैं। उन्होंने लोगों से सड़क की खराब स्थिति से जुड़ी समस्याएं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने की अपील की। बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट बनाने वाली कई कंपनियों को गुणवत्ता में कमी के कारण पहले ही काली सूची में डाला जा चुका है। मंत्रालय सड़क निर्माण की गुणवत्ता से समझौते के मामले में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपना रहा है। उन्होंने कहा कि नेटवर्क सर्विलांस व्हीकल ऐसी तकनीक से लैस वाहन है, जो चलते हुए सड़क की स्थिति और उसकी सतह का आकलन करता है। यह 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सड़क की जांच कर सकता है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इसका इस्तेमाल कर रहा है। इससे सड़कों की गुणवत्ता की निगरानी, मरम्मत की योजना बनाने और आंकड़ों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पोर्टल पर उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।उन्होंने कहा कि भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा जरूरी है। जल, बिजली, परिवहन और संचार जैसे क्षेत्रों में विकास औद्योगिक वृद्धि, व्यापार और निवेश के लिए महत्वपूर्ण है। बुनियादी ढांचे पर 100 रुपये खर्च किए जाने का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 325 रुपये के बराबर होता है। इसलिए सरकार अच्छी सड़कों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि वह बिहार के मुख्यमंत्री के साथ जल्द ही एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसके तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नदी से गाद निकालने का काम बिना किसी शुल्क के करेगा और निकाली गई गाद का इस्तेमाल राजमार्ग निर्माण में किया जाएगा। इससे बिहार में बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
सम्मेलन में सीआईआई की राष्ट्रीय सड़क एवं राजमार्ग समिति के अध्यक्ष एमवी सतीश ने कहा कि सड़कें केवल व्यापार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए विचारों, नवाचार, संस्कृति और समृद्धि का भी प्रसार होता है। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क में से एक है। भविष्य में सड़क संपर्क को तेज बनाने के साथ उसे टिकाऊ, संसाधन-कुशल, पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और नई तकनीक के अनुरूप बनाना जरूरी है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के संस्थागत कारोबार के प्रमुख जॉन प्रसाद कंदमपरंबिल ने कहा कि बुनियादी ढांचे में निवेश दीर्घकालिक कारोबारी वृद्धि का प्रमुख आधार है। सड़क निर्माण केवल बिटुमेन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गिट्टी, ईंधन, बिटुमेन और उन्नत निर्माण सामग्री सहित कई क्षेत्रों की भूमिका होती है।
