संवैधानिक पद पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने जनता को अधिकारों से वंचित करने का काम कियाः ममता बनर्जी

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने नागरिकों के वोटिंग और नागरिकता अधिकारों की रक्षा करने के बजाय उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का काम किया है। ममता बनर्जी ने आज दिल्ली स्थित नॉर्थ एवेन्यू में संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (ज्ञानेश कुमार) पर तंज कसते हुए उन्हें ‘वैनिश कुमार’ करार दिया। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा, “अभी ‘वैनिश कुमार’ की चर्चा हो रही है, जो अभी इंचार्ज हैं और जिनकी ज़िम्मेदारी जनता की नागरिकता और वोटिंग के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने ही लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करने का काम किया है। हम उन्हें कैसे माफ कर सकते हैं। मैं भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करती हूं। हमने आवाज़ उठाई थी कि कैसे चुनाव आयोग ने ईवीएम मशीनों, वोटों की गिनती और चुनाव प्रक्रिया को ‘सेंट्रलाइज़’ कर दिया और पूरे सिस्टम पर कब्ज़ा कर लिया। हम अदालत भी गए, लेकिन हमें न्याय नहीं मिला। हम 100 पीड़ितों के साथ चुनाव आयोग के दफ़्तर गए थे, लेकिन उन्होंने हमारे साथ बेहद बुरा बर्ताव किया।”

ममता ने मतगणना के दौरान कथित धांधली का ब्योरा देते हुए प्रशासन और सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाये और दावा किया कि उनकी पार्टी 53 हजार वोटों से आगे चल रहे थी, तभी केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने गेट बंद कर दिए ताकि अंदर न जाया जा सके। मतगणना केंद्रों पर मौजूद पार्टी के मतगणना एजेंटों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि निर्वाचन क्षेत्रों का सीसीटीवी फुटेज कहां है। उन्होंने कहा कि देश में “एक बड़ा तूफ़ान आने वाला है” और लोकतंत्र में जनता इन हथकंडों का मुँहतोड़ जवाब देगी। प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से एक राजनीतिक दल के अधीन काम कर रहा है और आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पूरी तरह चरमरा गई है। ममता ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर मौजूदा सरकार पर आरोप लगाय़ा और कहा कि स्थानीय पुलिस स्टेशन अब कानून के रक्षक नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के ब्लॉक और मंडल कमेटी कार्यालय बन चुके हैं। इसके अलावा, जिला अधिकारियों के मुख्यालयों को जिला कार्यालय और राज्य पुलिस मुख्यालय को राज्य कमेटी कार्यालय में तब्दील कर दिया गया है। आरोप है कि पूरा प्रशासनिक निष्पक्ष रहने के बजाय राजनीतिक निर्देशों पर काम कर रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत दावों के बिल्कुल उलट है। कोई सुरक्षा नहीं है। हर रात और आधी रात को मेरे आवास के सामने जो होता है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। आवास पर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है। अगले ही दिन सुरक्षा वापस ले ली गई और बाहर यह प्रचार किया जा रहा है कि मुझे ‘जेड प्लस’ सुरक्षा दी गई है। अगर वास्तव में जेड प्लस सुरक्षा दी गई है, तो प्रशासन मुझे आधिकारिक तौर पर लिखित में बताए कि सुरक्षा कहां है।

ममता ने कहा कि सरकार के इशारे पर रोजाना 200 से 300 असामाजिक तत्व घरों के सामने एकत्र होकर उपद्रव और गुंडागर्दी कर रहे हैं। इस भय के माहौल में न तो महिलाएं सुरक्षित हैं और न ही छोटे कामगार अपनी दुकानें खोल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो शहर कभी अपनी जीवंतता और चहल-पहल के लिए जाना जाता था, आज वहां रात 8 बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है। लोग खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। आगामी दुर्गा पूजा का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि राज्य का सबसे बड़ा उत्सव नजदीक है लेकिन नागरिकों में उत्साह के बजाय डर का माहौल है। प्रशासनिक कार्रवाइयों और उत्पीड़न के कारण लाखों फेरीवाले बेघर हो गए हैं। उनकी संपत्ति और आजीविका छीनी जा रही है, जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उपद्रवी अब धार्मिक स्थलों को भी नहीं बख्श रहे हैं। भाजपा से जुड़े लोग मंदिरों में जाकर ‘प्रणामी बॉक्स’ (दानपेटी) लूट रहे हैं और श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान पर यह कहकर कब्जा कर रहे हैं कि यह उनकी संपत्ति है। इसे प्रशासनिक शह पर खुली लूट और जबरन जब्ती करार दिया गया।

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