Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की पटना में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबंध में की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आज पटना में प्रधानमंत्री के पिताजी के बारे में अभद्र टिप्पणी कर सारी मर्यादाएं तार-तार कर दी हैं। बीते 12 वर्षों में लगातार मिल रही चुनावी हार से कांग्रेस पार्टी में हताशा व निराशा इतनी बढ़ चुकी है कि अब उसके पास न कोई नीति बची है, न कोई मुद्दा, बस गाली-गलौज की राजनीति बची है। एक्स पर एक पोस्ट में शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी या उनके परिवार को पहली बार अपशब्द नहीं कहे हैं। पार्टी नेता कभी उनकी पूजनीय माताजी के बारे में अपशब्द कहते हैं, कभी उन्हें ‘मौत का सौदागर’, कभी ‘चायवाला’ कहकर उनकी गरीबी का उपहास उड़ाते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी हर रोज अभद्रता की सीमाएँ पार करती जा रही है।उन्होंने कहा कि जनाधार खो चुकी कांग्रेस अब अपने कार्यकर्ताओं में भी आधार खोती जा रही है। जब-जब इन्होंने प्रधानमंत्री मोदी या उनके परिवार पर घृणित टिप्पणियां की हैं, तब-तब जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।
धामी ने कांग्रेस को घेरा, कहा- व्यक्तिगत बयानबाजी तक सिमट रही राजनीति: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिता के संबंध में कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति जनहित के मुद्दों से भटककर व्यक्तिगत टिप्पणियों और मर्यादाहीन बयानबाजी तक सिमटती जा रही है। मुख्यमंत्री धामी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की माता के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने, उन्हें ‘मौत का सौदागर’ कहने और उनके साधारण पारिवारिक परिवेश पर ‘चायवाला’ कहकर कटाक्ष करने जैसी घटनाएं कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनावी हार के बावजूद कांग्रेस जनहित के मुद्दों पर आत्ममंथन करने के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों को अपनी राजनीति का आधार बना रही है। धामी ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध की पूरी गुंजाइश है, लेकिन किसी के माता-पिता और परिवार को निशाना बनाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
