सूरत से उदयपुर के बीच पहली वंदे भारत ट्रेन शुरू, केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

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Eksandeshlive Desk

सूरत: गांधी जयंती के अवसर पर दक्षिण गुजरात के यात्रियों को बड़ी रेल सुविधा मिली है। सूरत से उदयपुर के बीच शुक्रवार को पहली वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत हुई है। सूरत को उदयपुर से जोड़ने वाली इस सेमी-हाईस्पीड ट्रेन को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। नियमित समय-सारणी के अनुसार ट्रेन सेवा 4 अक्टूबर से शुरू होगी। इससे सूरत और उदयपुर के बीच यात्रा का समय घटकर करीब 7 घंटे 30 मिनट रह जाएगा। ट्रेन संख्या 26903 सूरत से सुबह 6:10 बजे रवाना होकर दोपहर 1:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 26904 उदयपुर से दोपहर 3:35 बजे रवाना होगी और रात 11 बजे सूरत पहुंचेगी। मंगलवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन इस ट्रेन की नियमित सेवा उपलब्ध रहेगी। यात्रियों के लिए ट्रेन में दो श्रेणियां रखी गई हैं। चेयर कार (सीसी) का किराया 1,515 रुपये और एक्जीक्यूटिव चेयर कार (ईसी) का किराया 2,720 रुपये निर्धारित किया गया है। ट्रेन संख्या 26903 की नियमित टिकट बुकिंग 1 अक्टूबर से आईआरसीटीसी की वेबसाइट, मोबाइल ऐप और रेलवे स्टेशनों के पीआरएस काउंटरों पर शुरू की गई।

गुजरात और राजस्थान के प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव: यात्रा के दौरान ट्रेन गुजरात और राजस्थान के नौ प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें भरूच, वडोदरा, आणंद, महिसागर, असारवा, हिम्मतनगर, शामलाजी रोड, डूंगरपुर और जावर स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों पर ठहराव से दोनों राज्यों के यात्रियों, व्यापारियों और धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है। ट्रेन में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, स्वचालित दरवाजे, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली और बेहतर सीटिंग व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नई सेवा से सूरत और राजस्थान के बीच व्यापारिक गतिविधियों के साथ पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को भी गति मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम में सीआर पाटिल ने अपने पुराने रेल सफर को याद करते हुए कहा कि एक समय रेल यात्रा कठिन और असुविधाजनक मानी जाती थी। ट्रेनों में भीड़ और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव के कारण यात्रियों को परेशानी होती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे में स्वच्छता और यात्री सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है और आज वंदे भारत जैसी ट्रेनों के कारण यात्रियों को आधुनिक यात्रा का अनुभव मिल रहा है। पाटिल ने कहा कि सूरत के लोगों की लंबे समय से उदयपुर के लिए वंदे भारत ट्रेन की मांग थी। उन्होंने बताया कि मांग को समझते हुए प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष यह विषय रखा गया, जिसके बाद इसे मंजूरी मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वलसाड से सूरत के बीच शुरू हुई मेमू ट्रेन और अन्य स्टॉपेज को लेकर भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा रेलवे अधिकारियों के सहयोग का उल्लेख किया। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री पाटिल ने नागरिकों से अपील की कि केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक ट्रेनों और सुविधाओं का विस्तार कर रही है। ऐसे में इन सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करना और ट्रेनें खाली न जाएं, यह नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने यात्रियों से नई ट्रेन सेवा का अधिकतम लाभ लेने की अपेक्षा व्यक्त की। कुल मिलाकर सूरत-उदयपुर वंदे भारत सेवा शुरू होने से दक्षिण गुजरात और राजस्थान के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी का नया विकल्प उपलब्ध हुआ है। व्यापार, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के लिए यह सेवा यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

कटरा-बनिहाल रेलखंड पर ट्रेनों की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटे हुई: जम्मू-कश्मीर में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना के तहत माता वैष्णो देवी कटरा-बनिहाल के 111 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम अनुमत गति 75 से बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटे कर दी गई है। बढ़ी हुई गति का सफल परीक्षण शुक्रवार को किया गया। इस दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 26401/26404) ने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चेनाब ब्रिज और भारत के पहले केबल-स्टेड रेलवे पुल अंजी ब्रिज को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि गति बढ़ाए जाने से यूएसबीआरएल परियोजना के इस महत्वपूर्ण खंड पर ट्रेन परिचालन अधिक सुचारु होगा और यात्रियों के यात्रा समय में कमी आएगी। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक रेल यात्रा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। कटरा-बनिहाल रेलखंड पर अधिकतम अनुमत गति बढ़ाने के लिए आवश्यक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद यह बदलाव किया गया है। बढ़ी हुई गति का परीक्षण वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से किया गया और ट्रेन ने चेनाब तथा अंजी पुलों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पार किया। चेनाब ब्रिज चिनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। वहीं, अंजी ब्रिज भारत का पहला केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज है। दोनों पुल यूएसबीआरएल परियोजना के महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग ढांचों में शामिल हैं और इस रेलखंड पर ट्रेन परिचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं। गति 75 से बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटे किए जाने से कटरा और बनिहाल के बीच रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी। इससे परिचालन में सुगमता के साथ यात्रियों को यात्रा समय में बचत का लाभ मिलेगा।

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