सत्य निकेतन हादसे में अब तक सात लोगों की मौत, राहुल गांधी बोले- दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार होने के बावजूद ऐसी घटनाओं पर प्रभावी जवाबदेही दिखाई नहीं दे रही

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे को लेकर सरकार पर जवाबदेही नहीं तय करने का आरोप लगाया है। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हादसों की रोकथाम में विफल रहने के बाद सरकार केवल बयानबाजी करती है और असली दोषी जवाबदेही से बच जाते हैं। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। पिछले चार महीनों में सैदुलाजाब और हौजरानी में भी ऐसी घटनाओं में कई लोगों की जान गई लेकिन कार्रवाई दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाबदेही मांगने वालों को अपमानजनक विशेषण देकर चुप कराने का प्रयास किया जाता है। सवाल उठाने वालों को शर्मिंदा और बदनाम करने की कोशिश की जाती है। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए लेकिन मूल मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया। दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार होने के बावजूद ऐसी घटनाओं पर प्रभावी जवाबदेही दिखाई नहीं दे रही है।

सत्य निकेतन हादसे पर कांग्रेस ने केंद्र के रवैये की निंदा की: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए हादसे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के रवैये की निंदा की है। पार्टी ने हादसे में छात्रों की मौत पर दुख जताते हुए घटना की जांच, जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार ने यहां कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि घटना को करीब 24 घंटे होने को हैं, लेकिन मलबा अभी तक पूरी तरह नहीं हट पाया है। मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन केवल राहत और बचाव का काम नहीं कर रहा, बल्कि सच छिपाने का भी काम कर रहा है। एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने दावा किया कि घटना करीब 1.30 बजे हुई, लेकिन मौके पर न तो कोई पुलिसकर्मी मौजूद था, न मेडिकल टीम और न ही रेस्क्यू टीम। उनके मुताबिक, वहां केवल एक एंबुलेंस मौजूद थी। उन्होंने कहा कि हादसे की जानकारी मिलते ही एनएसयूआई के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और छात्रों की हर संभव मदद की। उस समय कई छात्र मलबे में दबे हुए थे और मदद के लिए चीख-पुकार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन निजी पीजी में छात्रों को रहने के लिए मजबूर किया जाता है, वहां सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जाता। दिल्ली विश्वविद्यालय के पास छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल क्यों नहीं हैं, पिछले 10 वर्षों में विश्वविद्यालय के लिए एक भी हॉस्टल क्यों नहीं बनाया गया और विश्वविद्यालय की जिन जमीनों को शादी समारोहों के लिए किराये पर दिया जा रहा है, वहां छात्रों के लिए हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं। एनएसयूआई ने मांग की कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अंदर छात्रों के लिए हॉस्टल बनाए जाएं, अवैध रूप से संचालित हॉस्टल और पीजी बंद किए जाएं तथा हॉस्टल और पीजी के लिए रेंट कंट्रोल एक्ट बनाया जाए। संगठन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से हादसे की जिम्मेदारी लेने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

दिल्ली के सत्य निकेतन मामले में आरोपी पीजी मालिक राजस्थान से गिरफ्तार: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी और भवन मालिक हरिराम बंसल को दिल्ली पुलिस ने सोमवार को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया। हादसे के बाद से हरिराम बंसल फरार था। रविवार को हुए इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने के मामले में पुलिस की कार्रवाई के बीच यहां रहने वाले छात्रों के साथ किए गए एग्रीमेंट की कॉपी भी सामने आई है, जिसमें हादसे और जोखिम की जिम्मेदारी से पीजी प्रशासन को अलग करने वाली शर्त दर्ज है। एग्रीमेंट में साफ लिखा है कि पीजी में रहने वाले व्यक्ति के साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा। हादसे के बाद सामने आए इस दस्तावेज ने पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और भवन की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एग्रीमेंट में हॉस्टल सीट की अवधि, दो महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का एडवांस किराया समेत कई नियम दर्ज हैं। इसमें यह शर्त भी रखी गई है कि लॉकिंग पीरियड पूरा होने से पहले हॉस्टल छोड़ने पर सिक्योरिटी और जमा फीस की वापसी का दावा नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा पीजी परिसर की दीवारों पर पोस्टर या स्टीकर लगाने और लिखने पर रोक लगाई गई थी। छात्रों को समय पर फीस जमा करने के निर्देश दिए गए थे। फर्नीचर या पीजी के किसी अन्य सामान को नुकसान पहुंचने की स्थिति में उसकी कीमत सिक्योरिटी राशि से काटने की बात भी एग्रीमेंट में शामिल थी।

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में दक्षिण जोन उपायुक्त समेत पांच अधिकारी निलंबित: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को सत्य निकेतन पीजी इमारत हादसे में कार्रवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के दक्षिण जोन के उपायुक्त समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इस हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री ने जिन अधिकारियों को निलंबित किया है उनमें दक्षिण उपायुक्त राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर सिंह, कार्यकारी अभियंता (भवन) ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता (भवन) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (भवन निर्माण) आशीष कुमार शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार सुबह फिर से हादसा स्थल का दौर करके राहत एवं बचाव की कार्य की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने यहां पत्रकारों से कहा कि लगभग अस्सी फीसद मलबा हटा दिया गया है, बस बेसमेंट का मलबा बचा है। बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और पानी जमा होने के साथ-साथ पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत के काम की वजह से इमारत गिर गई। अब तक 12 लोगों को निकाला जा चुका है, जिसमें छह लोगों की मौत और बाकी छह की हालत स्थिर है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में पांचवीं मंजिल वाले भवनों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आसपास के पीजी एवं भवनों की भी सघन जांच, नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्लीवासियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, लापरवाही पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

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