कार्डियोलॉजी वेब कॉन्क्लेव संपन्न : डॉ जगनाणी

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एफएफपीएआई का आँचलिक सम्मेलन में बोले
रांची : स्वतन्त्रता दिवस पर एफपीए राँची के तत्वावधान में एफएफपीएआई का आँचलिक सम्मेलन सम्पर्क्तयुत किया गया । इस सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय चिकित्सकों ने व्याख्यान प्रस्तुत किए । अमेरिका के फ्लिण्ट से डॉ आशीष वलवाणी ने कार्डियक एवं ब्रॉकिल अस्थमा में अन्तर बताया एवं स्वाभाविक रूप से उपचार भी कारण के अनुसार होगा । हर साँस का फूलना दमा हो, यह आवश्यक नहीं है; क्लिनिकल परिक्षण एवं जाँच से यह अन्तर करना उचित होगा। कोयम्बटूर से डॉ पी मोहन ने ईईसीपी द्वारा रिफरैक्ट्री इश्चिमिक हार्ट डिजीज के उपचार को उपयोगी बताया। निजामाबाद से डॉ के मीनू स्पन्दन ने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली, हरे फल सब्जी, नियमित व्यायाम को महत्वपूर्ण बताया । उन्होंने बताया कि फास्ट, जङ्क , पैक्ड फूड इत्यादि से बचना चाहिए । एफपीए ओरेशन में मुजफ्फरपुर से डॉ नितान्त ने बाताया कि स्त्रियों में स्तन कैंसर के उपचार से लाभ मिलता है एवं आयु भी मिलती है। स्तन कैंसर का उपचार के साथ ही हृदयाघात से बचने के लिए स्टैटिन का चिकित्सकीय परामर्श से लेना लाभकारी होता है। अमेरिका के वर्जीनिया से डॉ प्रकाश भूषण कर्ण ने हृदय रोग से होने वाले मानसिक सन्ताप के उपचार में ओषधि के साथ काउन्सिलिंग को भी महत्वपूर्ण बताया। अहमदाबाद से हृदय रोग विशेषज्ञ एवं इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट ने ई सी जी के माध्यम से वेण्ट्रीकुलर टैकिकार्डिया के डायग्नोसिस एवं उपचार बताया । हैदराबाद से डॉ भरत पुरोहित ने अनियन्त्रित रक्तचाप के उपचार में रीनल डिनर्वेशन एवं लकवा में एल ए ऐपेण्डेज आॅक्लूडर के महत्व को बताया गया।चेन्नई से डॉ सेन्तमराई सैम्युअल ने हृदय के सुचारु रूप से कार्य करने में हार्मोन्स पर व्याख्यान प्रस्तुत किया । मुम्बई से डॉ मनोज गरेला ने हृदयाघात में ई सी जी द्वारा स्टेमी की पहचान एवं त्वरित उपचार को अनिवार्य बताया 300 मी ग्रा ऐसपिरीन, 300 मी ग्रा क्लोपिडोग्रेल, 40 मि ग्रा रोजुवास्टैटिन एवं जीभ के नीचे नाइट्रेट जीवनदायी हो सकता है एवं रुग्णालय पहुँचने का समय दे सकता है ।बैंगलुरू से डॉ अश्विन ने गभार्धान में उच्च रक्तचाप का उपचार अत्यन्त आवश्यक है एवं ओषधि के चयन भी सावधानीपूर्वक करना है; यह भ्रूण के स्वास्थ के लिए महत्वपूर्ण है । सूरत से डॉ मितेश चौहान ने हृदयाघात में सी टी कोरोनरी ऐञ्जियोग्राफी को एक लाभकारी नॉन-इनवेसिव तकनीक बताया । ओमान से डॉ सुमन ओ एस ने हार्ट फेल्योर के उपचार में नूतन ओषधि से जीवन के गुणवत्ता में होने वाले लाभ को बताया । गुरुग्राम से डॉ जयवीर सिंह खत्री ने हाईपरट्रोफिक आॅब्सट्रक्टिव कार्डियोमायोपैथी पर व्याख्यान प्रस्तुत किया एवं इसके उचित उपचार से जीवन रक्षा के महत्व को बताया । मुम्बई से डॉ मृणाल लङ्गोटे ने हृदय रोग में शल्य चिकित्सा में निश्चेतन में शारिरिक स्थिति एवं स्वास्थ्य के अनुरूप उपचार पर व्याख्यान प्रस्तुत किया । देहरादून से डॉ गौरव शर्मा ने उच्च रक्तचाप में नूतन ओषधि एवं 120/80 के लक्ष्य को हृदयाघात, पक्षाघात, वृक्क एवं दृष्टिपटल रोग से बचाव के लिए अत्यन्त आवश्यक है । राँची के डॉ ए के सिंह ने वयस्कों में टीकाकरण के महत्व को बताया; विशेषकर मेटाबॉलिक सिण्ड्रोम, मधुमेह, दमा, वृक्क एवं हृदय रोग में । दिल्ली से डॉ के पी सिंह ने हृदयाघात से होने वाली उलझन: हार्ट फेल्योर, माइट्रल / फ्री वॉल रप्चर इत्यादि से बचने के लिए त्वरित उपचार को अनिवार्य बताया । वड़ोदरा से डॉ हिताँशु पाँचाल ने कोरोनरी आर्टरी डिजीज में स्ट्रेस ईकोकार्डियोग्राफी के महत्व एवं शीघ्र मूल्याङ्कन से उचित उपचार के महत्व को बाताया । सिलवासा से डॉ सागरसिंह सोलंकी ने बीटा ब्लॉकर्स को हृदयाघात, युवा में रक्तचाप के स्थान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया । राँची के सुप्रसिद्ध मधुमेह एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ वी के जगनाणी ने अध्यक्षीय भाषण में मोटापे के कारण, निवारण एवं ओषधि के चयन पर व्याख्यान करते हुए बताया कि फलाहार, शाकाहार एवं व्यायाम अनिवार्य है । वड़ोदरा से डॉ मैत्री ने डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी पर व्याख्यान प्रस्तुत किया । आयरलैंड के कॉर्क से डॉ मुस्तफा ने हृदय रोग में सायकैट्रिक अससमेंट में संवेदनशीलता एवं ओषधिय उपचार का महत्व बताया । डॉ फारूक खान से पलमोनरी आरटेरियल हाईपरटेंशन पर व्याख्यान प्रस्तुत किया । इस सम्मेलन में देशव्यापी फिजिशियनस, मधुमेह एवं हृदय रोग विशेषज्ञों ने विभिन्न व्याख्यान की अध्यक्षता की । डॉ विश्मय परमार, डॉ सचिन खण्डेलवाल, डॉ ए के सिंघल, डॉ रजनी चौधरी, डॉ सन्तोष बी, डॉ हिरेन मेहता, डॉ अमीन जाड़िया, डॉ राकेश कुमार, डॉ एजी पिल्लई, डॉ अनिर्बन भौमिक, डॉ अल्का ग्वालरे, डॉ तन्वी पटेल, डॉ प्रभु वेंकटेश, डॉ संजय शाह,डॉ सौगाता सान्याल, डॉ दीपक टोरावाला, डॉ राकेश चौधरी, डॉ देवाशीष नन्दी, डॉ एलिवल पूसा, डॉ मनीष केडिया, डॉ चित्राली सिंह, डॉ शान्ति माला तिर्की, डॉ नितान्त चौरसिया, डॉ शशिकान्त मिश्र, डॉ रवि भूषण गुप्त, डॉ अमर कुमार, डॉ मधुकर चीरला, डॉ रिकुल शाह, डॉ विशाल दार्जी, डॉ सरगम तलवार, डॉ एनेपी हेलेन डेनियल, डॉ नितिन शाह, डॉ सन्तोष गुप्त, डॉ रूपम शर्मा, डॉ मनीष जैन, डॉ सुनील सिन्हा, डॉ जया शर्मा, डॉ इन्दिरा पाण्डा, डॉ कुमार अंशुमान, डॉ अनुराधा परामेश, डॉ रत्ना सूद, डॉ संजीव अहुजा, डॉ अंशु ठाकुर, डॉ अंशुमान फुल्ल, डॉ प्रमोद बनसोड़, डॉ वी के जगनाणी, डॉ प्रेरणा चेत्री, डॉ जनक शाह, डॉ राम नरेश राय, डॉ ए के जगनाणी, डॉ अभय बोरगाँवकर, डॉ प्रगनेश शाह, डॉ प्रज्ञा राय, डॉ अविनाश वानखड़े, डॉ माधव बंसल, डॉ सुनील यादव, डॉ प्रगनेश वाच्छरजानी, डॉ स्मिता सिंह, डॉ सञ्जीव सुमन, डॉ के के तिवारी, डॉ वाय जे के रेड्डी, डॉ जिआउल हक, डॉ राजकुमार जी एन, डॉ रेणुका वर्मा, डॉ उदय शक्कर एवं डॉ देबाङ्ग बोहरा ने अपना बहुमूल्य समय दिया एवं टिपणी कर सम्मेलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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