देश में सड़क दुर्घटनाओं से जीडीपी में 3 फीसदी का नुकसान : गडकरी

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा को देश की प्राथमिकता बताते हुए गुरुवार को कहा कि देश में हर साल औसतन 4.80 से 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें लगभग 1.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इन दुर्घटनाओं से जीडीपी को 3 फीसदी का नुकसान होता है, जो किसी बीमारी या युद्ध से भी अधिक है। गडकरी ने फिक्की के 7वें रोड सेफ्टी अवॉर्ड्स एंड सिम्पोजियम 2025- ‘विजन जीरो: लाइफ फर्स्ट, ऑलवेज’ कार्यक्रम में कहा कि सालाना होने वाली सभी दुर्घटनाओं में 66.4 फीसदी मौतें 18 से 45 साल के युवाओं की होती हैं, जो देश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में 18 साल से कम उम्र के 10 हजार बच्चों की सालाना मौत होती है, जो चिंता का विषय है। हेलमेट न पहनने से करीब 30,000 और सीट बेल्ट न लगाने से 16,000 मौतें सालाना होती हैं। इन आंकड़ों को कम करने के लिए सरकार ने नई बाइक खरीदने वालों को दो हेलमेट देने की अनिवार्यता लागू की है। साथ ही, जागरूकता फैलाने के लिए अमिताभ बच्चन के साथ सालाना कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

बड़े पैमाने पर डिजिटल अभियान भी शुरू किया गया है : गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए शंकर महादेवन का एक गीत 22 भाषाओं में अनुवादित कर स्कूली बच्चों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल अभियान भी शुरू किया गया है। उन्होंने वाहन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में सुधार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग में इस बदलाव से परफेक्शन आया है, जिससे वाहन दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद है। ट्रक ड्राइवरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जो 16-18 घंटे लगातार गाड़ी चलाते हैं, उनके केबिन में एसी अनिवार्य किया गया है। गर्मी और थकान से होने वाली अस्वस्थता को कम करने के लिए फटीग और स्लीप डिटेक्शन सिस्टम पर भी काम चल रहा है। उन्होंने बसों की सुरक्षा को लेकर कहा कि पहले बस बॉडी कोड में खामियां थीं, जिसे सुधारने में समय लगा। अब विश्वस्तरीय बस बॉडी कोड को अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। नेशनल हाई-वे पर हर दुर्घटना के कारणों का विश्लेषण कर सुधार की कोशिश की जा रही है। दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए 25 हजार रुपये का इनाम और हर दुर्घटना में न्यूनतम 1.5 लाख रुपये या 7 दिन का अस्पताल खर्च बीमा में शामिल करने का फैसला लिया गया है। गडकरी ने कहा कि सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं क्रमश: उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में होती हैं। हमने सभी सुधार किए, लेकिन जो मानव व्यवहार था उसे बदलने में हम कामयाब ही नहीं हुए हैं। सालाना 30 हजार एक्सीडेंट सिर्फ इसलिए हुए कि इन एक्सीडेंट में शामिल लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं था।

ड्राइवरों की आंखों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही : महाराष्ट्र में पहले की अपनी एक सड़क दुर्घटना को याद करते हुए गडकरी ने कहा कि उनके दुर्घटना की जब जांच हुई तो पता चला कि उनके ड्राइवर को मोतियाबिंद था, जिसका पता दुर्घटना के बाद चला। इसके बाद जब वे परिवहन मंत्री बने तो ड्राइवरों की देशव्यापी जांच में पता चला कि देश के 40 फीसदी ड्राइवरों में मोतियाबिंद है, जिसमें एक मुख्यमंत्री का ड्राइवर दोनों आंखों से अंधा और एक केंद्रीय मंत्री का ड्राइवर एक आंख से अंधा था। इस समस्या से निपटने के लिए ड्राइवरों की आंखों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। ड्राइवर प्रशिक्षण पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा कि देश में 111 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 35 शुरू हो चुके हैं। अब तक 9.2 लाख ड्राइवरों को प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना प्रशिक्षित ड्राइवरों के सड़क दुर्घटनाओं को रोकना संभव नहीं है। ये कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और देश के युवाओं की जान बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

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