मिस्र ने खोला प्राचीन सभ्यता को समर्पित विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय

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Eksandeshlive Desk

काहिरा : मिस्र ने शनिवार को अपनी प्राचीन सभ्यता की विरासत को समर्पित ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम (जीईएम) का भव्य उद्घाटन किया। दो दशकों से निर्माणाधीन यह विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय है, जो न केवल मिस्र की ऐतिहासिक धरोहर को एक छत के नीचे समेटेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को नई ऊर्जा देने की उम्मीद भी जगाता है। गिजा के प्रसिद्ध पिरामिड और स्फिंक्स के पास स्थित यह म्यूजियम 50,000 से अधिक प्राचीन वस्तुओं को प्रदर्शित करता है, जिनमें फराओ-कालीन जीवन की झलक देखने को मिलती है। खास बात यह है कि यहां राजा तुच तनखामुन की समाधि से मिली संपूर्ण धरोहर को पहली बार एक साथ प्रदर्शित किया गया है, जो 1922 में खोजे जाने के बाद अब तक कहीं एक स्थान पर नहीं रखी गई थी।

‘मानवता की एक सिम्फनी’ का मंच : उद्घाटन समारोह में कई विश्व नेताओं, राजपरिवारों और सरकार प्रमुखों ने हिस्सा लिया। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह संग्रहालय “प्राचीन मिस्रवासियों की प्रतिभा और आधुनिक मिस्रवासियों की रचनात्मकता का संगम” है, जो विश्व संस्कृति और कला को एक नया आयाम देगा। इस मौके पर काहिरा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और शनिवार को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया। संग्रहालय के प्रांगण में भव्य मंच पर ऑर्केस्ट्रा और कलाकारों ने ‘ग्लोबल सिम्फनी ऑफ ह्यूमैनिटी’ नामक संगीत प्रस्तुति दी। उद्घाटन से एक रात पहले सैकड़ों ड्रोन ने आसमान में राजा तुतनखामुन के मुखौटे और रथ की शानदार लाइट शो प्रस्तुति दी थी, जिसने वातावरण को और भी रहस्यमय बना दिया था।

अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा म्यूजियम : संग्रहालय के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य और उद्योगपति सर मोहम्मद मंसूर के अनुसार, जीईएम हर साल करीब 50 लाख पर्यटकों को आकर्षित करेगा। यह संख्या इसे विश्व के सबसे लोकप्रिय संग्रहालयों की श्रेणी में लाकर खड़ा करेगी। उन्होंने कहा कि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर “अत्यंत सकारात्मक प्रभाव” पड़ेगा। 2014 में सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति सीसी ने कई मेगा प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं, जिनका उद्देश्य मिस्र की जड़ हो चुकी अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकना है। ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम उन्हीं में से एक है, एक ऐसा स्मारक जो न केवल मिस्र की गौरवशाली सभ्यता का प्रतीक बनेगा, बल्कि आधुनिक मिस्र की प्रगति का भी प्रतीक चिन्ह साबित होगा।

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