कस्तूरबा आवासीय विद्यालय निर्माण पर स्थानीय लोगों का विरोध

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हजारीबाग: जिले के सदर प्रखंड के सखिया पंचायत अंतर्गत गुडुवा जंगल में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय का निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य का स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जोरदार विरोध किया है। उनका कहना है कि यह इलाका हाथियों के आने-जाने का पारंपरिक कॉरिडोर रहा है। हाथियों का झुंड आए दिन इस जंगल और समीप के तालाब तक पानी पीने के लिए पहुंचता है। ऐसे में जंगल क्षेत्र में बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय बनाना भविष्य में बड़ा खतरा साबित हो सकता है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई एकड़ आम गैर-मजरूआ जमीन जो गलत तरीके से कुछ लोगों के कब्जे में हैं और जहां विद्यालय का निर्माण आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने विभाग से अपील की है कि जंगल की भूमि से छेड़छाड़ न की जाए और निर्माण कार्य को आम गैर-मजरूआ भूमि पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि वन क्षेत्र और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें। सदर उप प्रमुख रविकांत सिंह ने कहा कि हम लोग विकास के पक्षधर है। हर कोई चाहता है कि विकास हो मगर नियम को ताक पर रख और सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ कर यह कार्य किया जा रहा है। आबादी और सुरक्षित जगह पर सरकारी जमीन होने के बावजूद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा बालिका आवासीय विद्यालय का निर्माण जंगल में वन भूमि पर हो रहा है। यहां रहने वाली बालिकाएं कभी सुरक्षित नहीं रह पाएगी। सरकार और विभाग सुरक्षित स्थान पर विद्यालय का निर्माण कराए। उन्होंने कहा कि इसको लेकर जिले के सभी पदाधिकारी को पत्राचार भी किया है। प्रमुख प्रतिनिधि गणेश मेहता ने भी कहा कि हर ओर मनमानी है नियम संगत कार्य नहीं हो रहा। वहीं स्थानीय ग्रामीण राजकिशोर रविदास ने भी निर्माण पर सवाल उठाया। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण भी उपस्थित थे।वन भूमि पर निर्माण को लेकर जब शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।

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