Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में कहा कि आने वाले दो वर्षों में भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षेत्र की पांचों परतों में 200 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आने की उम्मीद है। जोखिम पूंजी कंपनियां गहन तकनीक स्टार्टअप्स, बड़े समाधान और अनुप्रयोगों, अत्याधुनिक मॉडल्स पर शोध और बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परतों में निवेश कर रही हैं। इस मौके पर केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितिन प्रसाद भी मौजूद रहे। वैष्णव ने यहां भारत मंडपम में एक सत्र में कहा कि भारत की एक बड़ी ताकत यह है कि देश की 51 प्रतिशत बिजली उत्पादन क्षमता स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से आती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता के कारण यह संभव हुआ है। एआई के लिए ऊर्जा परत में निवेश का यह बड़ा लाभ भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
भारत अपने मजबूत आईटी सेक्टर में तकनीकी बदलाव को संभाल रहा : वैष्णव ने एआई के संभावित खतरों को बताते हुए कहा कि वैश्विक नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बन रही है कि एआई का इस्तेमाल अच्छे कार्यों के लिए होना चाहिए और इसके हानिकारक प्रभावों को रोकना जरूरी है। इसके लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि तकनीकी और कानूनी दृष्टिकोण अपनाना होगा। भारत का कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुरक्षा संस्थान कई शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर ऐसे तकनीकी समाधान तैयार कर रहा है, जो एआई के दुष्प्रभावों को रोक सकें। एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनसन हुआंग के सम्मेलन में शामिल न होने पर वैष्णव ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से आने में असमर्थता जताई, लेकिन अपनी वरिष्ठ टीम को भेजा है। एनवीडिया भारत की कई कंपनियों के साथ मिलकर एआई ढांचा और सॉफ्टवेयर के बड़े निवेश कर रहा है। वैष्णव ने कहा कि भारत अपने मजबूत आईटी सेक्टर में तकनीकी बदलाव को रणनीतिक रूप से संभाल रहा है। सरकार, उद्योग और शिक्षा संस्थानों के सहयोग से कर्मचारियों की प्रतिभाओं को निखारना, नई प्रतिभा तैयार करना और भविष्य की पीढ़ियों को तैयार करना प्रमुख उद्देश्य है। एआई आधारित रीस्किलिंग और 100 से अधिक कॉलेजों में पाठ्यक्रम सुधारों के जरिए युवाओं को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार किया जा रहा है।
एआई भारत को वैश्विक स्तर पर ‘ज्ञान की महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करेगा : धर्मेंद्र प्रधान : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से देश की भावी पीढ़ी सशक्त बनेगी। यह तकनीक भारत को वैश्विक स्तर पर ‘ज्ञान की महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करेगा। धर्मेंद्र प्रधान ने भारत मंडपम में चल रहे ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान पत्रकारों से कहा कि भारत की नई पीढ़ी को एआई-सक्षम शिक्षा प्रदान करना अब सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी और प्राथमिकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन ने युवाओं में एक नया उत्साह पैदा किया है। इसके अलावा एआई की यह प्रगति साल 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के मार्ग को प्रशस्त करेगी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से दो विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इनमें शिक्षा में एआई और एआई के बारे में शिक्षा शामिल हैं। प्रधान ने कहा, “भारत के पारंपरिक ज्ञान से लेकर भविष्य के आधुनिक ज्ञान तक, एआई का उपयोग करके हमें न केवल छात्रों को, बल्कि शिक्षकों और स्कूल-कॉलेज प्रबंधन को भी सशक्त बनाना है। शिक्षा में एआई और एआई में शिक्षा- ये दोनों अब एक-दूसरे के पूरक हैं। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे एआई का इस्तेमाल सीखने, सिखाने और नए नवाचार करने के लिए करें ताकि भारत इस क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बन सके।”सम्मेलन के साथ-साथ शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा देने जा रहे सभी छात्रों को अपना संदेश दिया। उन्होंने छात्रों को ‘एग्जाम वॉरियर’ बताते हुए कहा कि वे तनावमुक्त होकर परीक्षा को एक ‘त्योहार’ की तरह मनाएं और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।
