News by Deepak Misra
लातेहार: जिला परिषद की उपाध्यक्ष अनीता देवी ने बालूमाथ के पूर्व अंचल निरीक्षक कुमार सत्यम भारद्वाज के विरुद्ध गंभीर आरोपों को देखते हुये उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।अनीता देवी ने कहा कि राजस्व , निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग , झारखंड सरकार द्वारा जारी आदेश के आलोक में तत्कालीन अंचल निरीक्षक कुमार सत्यम भारद्वाज के विरुद्ध में विभागीय कार्रवाई पूरी करते हुये उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है।उन्होंने बताया कि बालूमाथ अंचल (जिला लातेहार) में अंचल निरीक्षक के पद पर कार्यरत रहने के दौरान में उनकी कार्यप्रणाली को लेकर कई विवादित मामले सामने आये थे। आरोप है कि मौजा बालू के पंजी-2 में पूर्व जमाबंदी रैयत का नाम हटाकर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया था, जो कि सरकारी अभिलेख में छेड़छाड़ का गंभीर मामला है। इसके अतिरिक्त अन्य मौजा एवं हल्का के पंजी-2 में भी छेड़छाड़ करने के आरोप लगे थे।इन कृत्यों के कारण क्षेत्र में अनेक भूमि विवाद उत्पन्न हुए और राजस्व व्यवस्था एवं सरकार की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े हुये थे।अनीता देवी ने कहा कि पूर्व में इनकी पदस्थापना चान्हो अंचल में भी रही थी, जहां भी इनकी कार्यप्रणाली को लेकर कई विवाद सामने आए थे। जिसके कारण क्षेत्र में कई मामलों को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।
इन मामलों की शिकायतों के बाद विभाग द्वारा जांच कराई गई। और मामला सत्य पाए जाने के बाद कार्रवाई करते हुए उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया। जारी आदेश के अनुसार कुमार सत्यम भारद्वाज वर्तमान में अंचल निरीक्षक, गोविंदपुर (धनबाद) में कार्यरत थे।अनीता देवी ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद केवल अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है।ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी को सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए, क्योंकि अनिवार्य सेवानिवृत्ति की स्थिति में उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ जैसे पेंशन आदि जीवनभर मिलते रहते हैं, जबकि बर्खास्तगी की स्थिति में यह लाभ नहीं मिलते।उन्होंने झारखंड सरकार से आग्रह किया कि इस मामले में अपने आदेश पर पुनर्विचार करते हुए संबंधित अधिकारी को सेवा से बर्खास्त करने का संशोधित आदेश जारी किया जाए।साथ ही लातेहार के उपायुक्त से भी मांग की है कि सरकारी दस्तावेजों विशेषकर पंजी-2 में छेड़छाड़ जैसे गंभीर अपराध को देखते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए।अनीता देवी ने यह भी कहा कि यह भ्रष्ट पदाधिकारी जहां-जहां पदस्थापित रहा है, वहां के कार्यकाल की भी गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि भूमि से जुड़े मामलों में और कहां-कहां अनियमितताएं हुई हैं।उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का पालन और सरकार के प्रति विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
