Eksandeshlive Desk
रांची : मेदांता अब्दुर्रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हाॅस्पिटल, रांची के रुमेटोलाॅजिस्ट डाॅ. अवनीश झा ने विश्व ल्यूपस (10 मई) दिवस के मौके पर इस बीमारी को लेकर आमलोगों में जागरूकता जगाने पर बल दिया है। खासकर महिलाओं में इस बीमारी को लेकर अधिक जागरूकता जगाने की जरूरत है। महिलाओं में यह बीमारी 25 से लेकर 45 वर्ष तक अधिक होती है। उन्होंने कहा कि ल्यूपस एक ऑटो इम्यून बीमारी है। इसके लक्षण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी के शरीर के चमड़े का रंग लाल हो जाए, धूप लगने पर जलन हो, शरीर के जिस-जिस अंग पर धूप लगती है वहां-वहां चमड़े का रंग लाल हो जाए तो इसे हल्के में न लें, रुमेटोलाॅजिस्ट से दिखाकर इलाज करवाएं। इसके अलावा बुखार आए, खून की कमी हो, बदन और शरीर के जोड़ों में दर्द भी इसके लक्षण माने गये हैं। इस बीमारी से किडनी, हृदय तथा मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है, इसका इलाज उपलब्ध है और यह बीमारी नियंत्रण में रहती है।
डाॅ. झा ने कहा कि इस बीमारी से बचने के लिए धूप में न निकलें और अगर निकलना पड़े तो छाता का उपयोग करें, सनस्क्रीन लगाएं। बीमारी के ठीक होने के बाद भी मरीज संक्रमण से बचने का हर संभव प्रयास करें। मास्क लगाएं, हाथ-मुंह साफ से धोएं, स्वच्छ खान-पान लें तथा संक्रमण से अपना बचाव करें। उन्होंने कहा कि खून की एक जांच एएनए के पाॅजिटिव होने से ल्यूपस बीमारी की पुष्टि होती है। महिलाओं में इस बीमारी का अनुपात 10 में 9 है यानी 10 बीमारों में 9 महिलाएं होती हैं। हाॅस्पिटल के डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने कहा कि बीमारियों के विश्व दिवस के मौके पर हम अपने हाॅस्पिटल के डाॅक्टरों के माध्यम से आम लोगों को विभिन्न बीमारियों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देते हैं ताकि वे बीमारी से बचने का प्रयास कर सकें। डाॅक्टर बीमारी से बचाव, बीमारी के लक्षण तथा इलाज के बारे में बताते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे हाॅस्पिटल का मकसद सिर्फ इलाज ही करना नहीं है बल्कि लोगों को बीमार पड़ने से बचाना भी है।
