रियल-टाइम अटेंडेंस व्यवस्था पर उठे सवाल
अजय राज
प्रतापपुर(चतरा): केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप के माध्यम से रियल-टाइम अटेंडेंस व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके बावजूद प्रतापपुर प्रखंड के कई पंचायतों में “तू डाल-डाल तो मैं पात-पात” वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है। जहां मनरेगा मेठ, प्रभारी रोजगार सेवक एवं कंप्यूटर ऑपरेटर तथा प्रभारी बीपीओ गठजोड़ से मनरेगा कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है इसके बावजूद जिले के वरीय पदाधिकारी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।
सूत्रों के अनुसार, कई पंचायतों में मनरेगा मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने का खेल धड़ल्ले से जारी है। आरोप है कि कुछ मेठों द्वारा प्रति डिमांड एक हजार से दो हजार रुपये तक लेकर मजदूरों की फर्जी हाजिरी बनाई जा रही है। इससे योजना की पारदर्शिता और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जाता है कि इस पूरे खेल की जानकारी प्रखंड स्तर के अधिकारियों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों तक को है, लेकिन अब तक किसी भी कार्यस्थल की गंभीरता से जांच नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीडीओ, प्रभारी बीपीओ एवं रोजगार सेवक और कुछ मुखिया तक इस मामले से अवगत हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं होने से संदेह और गहरा गया है।
गौरतलब है कि सरकार ने मनरेगा कार्यस्थलों पर फर्जीवाड़ा रोकने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन और जिओ-टैग्ड उपस्थिति व्यवस्था लागू की है। NMMS ऐप के माध्यम से मजदूरों की उपस्थिति दिन में दो बार — सुबह और दोपहर — कार्यस्थल से फोटो लेकर दर्ज करनी होती है। इसके अलावा हाल ही में ऐप में ‘अटेंडेंस टेकर’, जियो-फेंसिंग और अटेंडेंस काउंट चेकर जैसे नए फीचर्स भी जोड़े गए हैं, ताकि केवल वास्तविक मजदूरों की ही हाजिरी दर्ज हो सके।सरकार के निर्देश के अनुसार, यदि किसी मजदूर का नाम मस्टर रोल में दर्ज है लेकिन NMMS ऐप में उसे अनुपस्थित दिखाया जाता है, तो उसे भुगतान नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद यदि फर्जी उपस्थिति बनाई जा रही है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी नियमों की अवहेलना मानी जाएगी।
ग्रामीणों ने नवनियुक्त उपायुक्त से प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत दो चार पंचायतों में कार्य स्थल पर औचक जांच किए जाने का अनुरोध किया है ताकि इस खेल का पर्दाफाश हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
मालूम हो कि यह खेल तब खेला जा रहा है जब सभी मनरेगा कर्मी अर्थात् बीपीओ, रोजगार सेवक एवं जेई पिछले कई माह से हड़ताल पर हैं और इनके स्थान पर आवास कॉर्डिनेटर मंदीप कुमार बीपीओ के प्रभार में, संबंधित पंचायत सचिव रोजगार सेवक के प्रभार में तथा मनरेगा एई, जेई का कार्य 15वीं वित्त के जेई के द्वारा देखा जा रहा है।
