शोध के माध्यम से झारखंड के इतिहास और संस्कृति को आगे बढ़ाएं: प्रो. एएन शाहदेव

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Eksandeshlive Desk

रांची: रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग में शुक्रवार को पीएचडी कोर्स वर्क के तहत आयोजित विशेष व्याख्यान में विशेषज्ञ प्रो. ए. एन. शाहदेव ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों को शोध की दिशा एवं संभावनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छोटानागपुर की समृद्ध संस्कृति, लोकनृत्य, लोकसंगीत, प्रकृति और मातृभाषाओं पर गंभीर शोध कर उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है। प्रो. शाहदेव ने कहा कि छोटानागपुर की सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, यहां की माटी और लोगों की विशेषताओं को शोध के माध्यम से व्यापक मंच तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने झारखंड के ऐतिहासिक पहलुओं को शोध कार्यों में शामिल करने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि प्रभावी शोध के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें गांवों और क्षेत्रों में जाकर प्रत्यक्ष रूप से जानकारी एकत्र करनी चाहिए। उन्होंने प्राथमिक आंकड़ों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि बुजुर्गों और स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी शोध को अधिक प्रामाणिक बनाती है।

नागवंशी इतिहास का उल्लेख करते हुए प्रो. शाहदेव ने कहा कि नागवंशियों का इतिहास 2000 वर्षों से भी अधिक पुराना है। उनके शासनकाल में सामाजिक समरसता बनी रही और किसी प्रकार का बड़ा विद्रोह दर्ज नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को अधिक से अधिक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि व्यापक अध्ययन से ज्ञान बढ़ता है और शोध कार्य में परिपक्वता आती है। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नंद तिवारी एवं पीएचडी को-ऑर्डिनेटर डॉ. मनोज कच्छप ने संयुक्त रूप से विशेषज्ञ का परिचय कराया। अंत में प्रो. शाहदेव ने सभी शोधार्थियों को शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर वैश्विक पहचान बनाने के लिए शुभकामनाएं दीं।

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