रिपोर्ट – अजय राज
प्रतापपुर (चतरा): सरकारी धन से करोड़ों रुपये खर्च कर बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए बनाई गई इमारत यदि तीन साल के भीतर ही जर्जर होने लगे, तो यह केवल निर्माण की खामी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। प्रतापपुर का प्लस टू मॉडल उच्च विद्यालय इन दिनों इसी कारण चर्चा में है। लगभग 3.60 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित विद्यालय भवन की छत से प्लास्टर गिरने लगा है, जिससे छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। मंगलवार को विद्यालय के डी-ब्लॉक के ग्राउंड फ्लोर की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। संयोग अच्छा रहा कि उस समय वहां कोई छात्र, शिक्षक या कर्मचारी मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद विद्यालय परिसर में भय और चिंता का माहौल है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज रजक ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। करीब आठ-दस माह पहले भी प्रथम तल की छत से प्लास्टर टूटकर गिरा था। इसके बावजूद संबंधित संवेदक द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने बताया कि कई बार मामले की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक न तो मरम्मत हुई और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही तय की गई। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि छत से लगातार प्लास्टर गिरने की घटनाओं के कारण बच्चों और शिक्षकों में हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। यदि समय रहते भवन की तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है।
यह वही विद्यालय है जिसका निर्माण शुरू से ही विवादों में रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण के दौरान ही स्कूल प्रबंधन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष समरेंद्र पासवान, समिति के अन्य सदस्यों और अभिभावकों ने घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया था। उस समय गुणवत्ता की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी उठी थी, लेकिन यदि उन शिकायतों को गंभीरता से लिया गया होता तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। सरकारी भवनों के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि गुणवत्ता से समझौता किया जाए तो सबसे बड़ा खतरा उन बच्चों की जान पर आता है, जिनके सुरक्षित भविष्य के नाम पर ये भवन बनाए जाते हैं। प्रतापपुर मॉडल उच्च विद्यालय की यह घटना निर्माण एजेंसी, निगरानी तंत्र और संबंधित विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भवन की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच हो, दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा विद्यालय भवन को सुरक्षित बनाने के लिए तत्काल आवश्यक मरम्मत कराई जाए। इससे पहले कि कोई बड़ा हादसा हो, प्रशासन को चेत जाना चाहिए।
