रांची। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की पहल पर देशभर में मनाए जा रहे 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बुधवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वानिकी संकाय में आयुर्वेद में प्रयुक्त औषधीय पौधों के महत्व, उनके संरक्षण तथा दैनिक जीवन में उनकी उपयोगिता पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष दिवस का विषय ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पशु चिकित्सा संकाय के डीन डॉ अलोक कुमार पांडेय ने कहा कि औषधीय पौधे हमारी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति और पारंपरिक ज्ञान का महत्वपूर्ण आधार हैं। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए औषधीय संपदा को सुरक्षित रखा जा सकता है।वानिकी संकाय के डीन डॉ कौशल कुमार ने औषधीय पौधों की विभिन्न प्रजातियों, एवं वर्तमान समय में आयुर्वेद में चिकित्सकीय उपयोग हेतु उनके मह्त्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस आयुष मंत्रालय के माध्यम से एक वार्षिक राष्ट्रीय आयोजन है, जो आयुर्वेद को एक वैज्ञानिक, प्रमाण-आधारित एवं समग्र स्वास्थ्य पद्धति के रूप में बढ़ावा देने हेतु मनाया जाता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ अमित बिजलवाण ने किया। संकाय के शिक्षक डॉ देवव्रत प्रधान, डॉ. अभय कुमार, डॉ. ताहिरा, तथा शोध छात्र अमित कुमार, बलराम ने भी औषधीय पौधों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और दैनिक जीवन तथा स्वास्थ्य सुरक्षा में उनके योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके संरक्षण को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर औषधीय पौधों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गयी जिसमें रंजीत महतो ने मह्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
