कावेरी जल विवाद: समिति ने की तमिलनाडु को 15 दिन तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की सिफारिश, कर्नाटक ने जताई आपत्ति

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Eksandeshlive Desk

बेंगलुरु/नई दिल्ली : कावेरी जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सिफारिश की है। इस अवधि में कुल लगभग चार टीएमसी पानी छोड़े जाने का सुझाव दिया गया है। नई दिल्ली में वर्चुअल माध्यम से आयोजित समिति की बैठक में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभिन्न राज्यों की ओर से जल उपलब्धता और मौजूदा स्थिति पर चर्चा के बाद समिति ने अपनी सिफारिश जारी की।

समिति की सिफारिश पर कर्नाटक सरकार ने आपत्ति जताई है। राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि कर्नाटक स्वयं जल संकट का सामना कर रहा है और इस वर्ष अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में राज्य के लिए पेयजल की आवश्यकता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कर्नाटक सरकार कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। उधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में आरोप लगाया कि जल संकट और सूखे जैसी परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार कर्नाटक के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने में विफल रही है।

आर. अशोक ने मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री से अधिकारियों तथा विधि विशेषज्ञों की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कावेरी जल विनियमन समिति की सिफारिश के विरुद्ध कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण में अपील दायर कर राज्य का पक्ष तथ्यों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मजबूती से रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में जलाशयों की वास्तविक स्थिति और जल उपलब्धता से जुड़े आंकड़ों को प्राधिकरण के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में राज्य के हितों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए और कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर सरकार को अत्यंत सावधानी और दूरदर्शिता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

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