Eksandeshlive Desk
रांची : जेपीएससी, जेएसएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में आंदोलनरत छात्र-अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए अपने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की अंतिम सूची शुक्रवार को जारी कर दी। छात्र नेता कुणाल प्रताप सिंह की ओर से जारी सूची के अनुसार, सरकार के साथ वार्ता करने वाले प्रतिनिधिमंडल में रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल हैं। कुणाल प्रताप सिंह ने बताया कि वार्ता का उद्देश्य आंदोलन से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालना और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों की मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल की सूची मांगी गई थी। प्रतिनिधिमंडल आंदोलन की प्रमुख मांगों को पूरी गंभीरता के साथ सरकार के समक्ष रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा। छात्रों ने निष्पक्ष जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के हितों की रक्षा को अपनी प्रमुख मांग बताया है। इससे पहले सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल में केवल छात्र-अभ्यर्थियों को शामिल किए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद आंदोलनकारियों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची से पत्रकार और अधिवक्ता के नाम हटा दिए। छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार के आग्रह के अनुरूप अब वार्ता में केवल छात्र-अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा।
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन में पहुंचीं आइसा राष्ट्रीय अध्यक्ष पर फेंकी स्याही : राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र-अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने पहुंचीं आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोरा पर स्याही फेंके जाने का मामला सामने आया है। नेहा वोरा छात्र-अभ्यर्थियों के समर्थन में आंदोलन स्थल पहुंची थीं। घटना की वामपंथी दलों ने कड़ी आलोचना की है। माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि यह घटना सांप्रदायिक संगठनों की ओर से युवाओं को नफरत भरे प्रचार से प्रभावित किए जाने की कोशिश का परिणाम है। उन्होंने घटना को कायरतापूर्ण बताते हुए कहा कि देशभर में शिक्षा और छात्रों के अधिकारों को लेकर चल रहे आंदोलनों के खिलाफ कुछ लोगों की बौखलाहट इस घटना से सामने आती है। उन्होंने कहा कि छात्र-अभ्यर्थियों के लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने के बजाय उनकी मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। नेहा बोरा ने झारखंड के छात्र आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाया है। उन्होंने शुक्रवार को रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और आईसा उनके साथ खड़ी है।नेहा बोरा ने कहा कि कथित धांधली के आरोपों के चलते 14 वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द कर री-एग्जाम कराया जाए, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा भी रद्द कर दोबारा आयोजित की जाए, टीडीपीएल और एनटीए जैसी निजी एजेंसियों से परीक्षाएं कराने की व्यवस्था समाप्त कर सरकारी संस्थानों को इसकी जिम्मेदारी दी जाए। ताकि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। उल्लेेखनीय है कि आईसा की ओर से बिरसा चौक से छात्र आंदोलन के समर्थन में विधानसभा की ओर मार्च निकालने के दौरान नेहा बोरा पर एक युवक ने स्याही फेंक दी थी। वहीं प्रदर्शनकारियों ने आरोपित को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। नेहा ने बताया कि आरोपित की पहचान अमरनाथ पांडे (26) के रूप में हुई है, जो हजारीबाग का रहने वाला और विनोबा भावे विश्वविद्यालय का छात्र है। मामले की जांच जारी है।
