Sunil
रांची। राज्य के सुप्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. जयंत कुमार घोष ने 25 अगस्त को सदर अस्पताल, रांची में एक गंभीर मरीज का ऐतिहासिक इलाज कर बड़ी सफलता हासिल की। दरअसल मरीज की पित्त नली में 4 साल पहले पथरी होने पर एफउढ विधि से इलाज कर स्टेंट डाला गया था, जिसे 1 से 2 महीने के भीतर निकालना था। लेकिन निजी कारणों से मरीज तय समय पर स्टेंट नहीं निकलवा पाया। 4 साल बाद असहनीय पेट दर्द और जौंडिस बढ़ने पर उसने डॉ. घोष से संपर्क किया।जांच में पाया गया कि पुराना स्टेंट अब 70 से 80 पथरियों और कीचड़ से भर चुका है, जिससे स्थिति गंभीर हो गई थी। डॉ. जयंत घोष और उनकी टीम ने बिना किसी चीर-फाड़ के दूरबीन विधि (एफउढ) से इस जटिल आॅपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।इस सफल इलाज में डॉ. वसुधा, डॉ. नीरज, एंडोस्कोपी टेक्नीशियन शेषनाथ यादव, सिस्टर श्वेता, सिस्टर सरिता, ओटी टेक्नीशियन मोहित और सुरेश की अहम भूमिका रही।यह उपलब्धि ओटी इंचार्ज डॉ. अखिलेश झा, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह और सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद के सहयोग से संभव हो पाई।चिकित्सकों के अनुसार इस तरह का मामला बेहद जटिल और जोखिम भरा होता है। सदर अस्पताल जैसे सरकारी अस्पताल में इस स्तर का सफल इलाज चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
