रांची। राजधानी रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में कथित भ्रष्टाचार और अन्य कई अनियमितताओं को लेकर शुक्रवार को आदिवासी मूलवासी संघर्ष समिति, कांके, रांची के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति एस. दुबे से मुलाकात की। संघर्ष समिति की संयोजक मंडली के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से बंद कमरे में लंबी वार्ता की। इस दौरान समिति के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के अंदर चल रही कथित धांधलियों, नियुक्तियों में अनियमितता, छात्रों की समस्याओं और आदिवासी-मूलवासी छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ अधिकारियों द्वारा अपने पदों का दुरुपयोग किया जा रहा है। स्थानीय आदिवासी-मूलवासी युवाओं को रोजगार और शोध के अवसरों में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, जबकि बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। समिति ने कुलपति से मांग की कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। कुलपति एस. दुबे ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उठाए गए बिंदुओं की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय किसानों और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए बना है और इसमें किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रतिनिधिमंडल में संयोजक रंजीत टोप्पो के नेतृत्व में एनुअल हक अंसारी, हरिनाथ साहू, अभिषेक राज हेरेंज, सज्जाद अंसारी, राज कुमार महतो, अजीज अंसारी, दीपक दास, संजू मुंडा, राज किशोर राम सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल थे।समिति के सदस्यों ने बताया कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे और विश्वविद्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि वे आदिवासी-मूलवासी हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष जारी रखेंगे।
