देशभर से आए 200 डॉक्टरों ने आधुनिकतम चिकित्सा पद्धतियों से संबंधित अनुभवों को किया साझा
रांची: इंडियन एकेडमिक आॅफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) रांची शाखा की ओर से होटल रमदा में आयोजित पांचवे रांची पेडिकॉन रविवार को समाप्त हो गया। तीन दिवसीय कार्यशाला व कांफ्रेंस में देश व राज्य भर के 200 शिशु रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। देश व राज्य भर से कार्यशाला में पहुंचे शिशु रोग विशेषज्ञों ने शिशु चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे आधुनिकतम बदलावों पर अपने विचार रखें। इस दौरान सभी शिशु रोग विशेषज्ञों को चिकित्सा के नवीनतम पद्धतियों से अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने आधुनिकतम चिकित्सा पद्धतियों से संबंधित अनुभवों को साझा किया। वहीं डॉ. शक्ति पद दास ने देशभर से आए शिशु रोग विशेषज्ञों का स्वागत किया । इस कॉफ्रेंस में आईएपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने बच्चों के स्वास्थ्य पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे -6 के अनुसार झारखंड में 22.03 प्रतिशत बच्चे (पांच वर्ष से कम उम्र ) कुपोषित है। उन्होंने सम्मेलन में आए सभी डॉक्टरों से कहा कि बच्चों के अभिभावकों से अनुरोध करे कि वे अपने बच्चों को संतुलित आहार देकर कुपोषण मुक्त करने की दिशा में पहल करें। देशभर से आए शिशु रोग विशेषज्ञों ने झारखंड में बच्चों के स्वास्थ्य व राज्य के चाइल्ड अस्पतालों की सराहना की। उन्होंने बताया कि झारखंड में बच्चों के स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर काम किया जा रहा है जिसका परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे। अपने व्याख्यान में बताया कि बहुत सारी ऐसी बिमारियां है जिनका ईलाज संभव है परन्तु डॉक्टर व घरवाले ज्ञान के अभाव में ईलाज नही करवा पाते है। साथ ही विशेषज्ञों ने बच्चों के गुर्दे रोग के इलाज में आने वाले नवीनतम बदलावो पर व्याख्यान दिया। रांची पेडिकॉन के मुख्य आयोजक सचिव डॉ. शक्ति पद दास ने कहा कि टेक्न्नोलॉजी व बच्चों के स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने में झारखंड भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अपने आप को तैयार कर रहा है। उन्होने कहा कि पांचवे रांची पेडिकॉन से झारखंड के चिकित्सों को आने वाले दिनों में बहुत लाभ मिलेगा। इस तरह के आयोजन से बच्चों के बेहतर ईलाज में डॉक्टरों को काफी मदद मिलता है। रांची पेडिकॉन 2026 में आर्गनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. अमित मोहन, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. पार्थ कुमार चौधरी, को-आर्गनाइजिंग सेक्रेटरीज डॉ. राजेश कुमार (बालपन) डॉ. अनिताभ, डॉ. प्रेम रंजन, डॉ. परमानंद काशी,डॉ. किरण शंकर दास, आर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. शैलेश चंद्रा, डॉ. दीपक कुमार समेत कई डॉक्टरों ने अहम योगदान निभाया।
