आईडीबीआई बैंक कर्मचारी फोरम ने फेयरफैक्स को बहुलांश हिस्सेदारी बेचने का किया विरोध, संसदीय जांच की मांग की

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: आईडीबीआई अधिकारियों और कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स को बेचने के प्रस्ताव का विरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने और संसदीय समीक्षा के तहत इसकी पूरी जांच की मांग की है। बैंक कर्मचारी फोरम ने शनिवार को फेयरफैक्स को बहुलांश हिस्सेदारी बेचने का विरोध किया और संसदीय समीक्षा की मांग की है। फोरम ने केंद्र सरकार द्वारा बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को लगभग 53 हजार करोड़ रुपये में बेचने के फैसले का सख्त विरोध किया है।

बैंक कर्मचारी संघों का मानना है कि यह फैसला गलत समय पर लिया गया है और इसके लिए कोई ठोस तर्क नहीं दिया गया है। बाजार की अस्थिर स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने और इसके मूल्यांकन में पारदर्शिता रखने तथा इस पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा करने की भी जरूरत है। आईडीबीआई बैंक अधिकारी संघ के अध्यक्ष सुराव कुमार ने कहा, “हमारे बैंक को बेचने का कोई कारण नहीं है, खासकर किसी विदेशी कंपनी को।” बैंक में 60.72 फीसदी को बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन और अखिल भारतीय औद्योगिक विकास बैंक कर्मचारी संघ के संयुक्त मंच ने इस सौदे के खिलाफ 2 एवं 3 नवंबर 2026 को देशभर में भूख हड़ताल करने की घोषणा की है। इसके अलावा फोरम के संयोजक देवीदास तुलजापुरकर ने इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने और पूरे मामले की संसदीय समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने और संसद की निगरानी में इसकी व्यापक समीक्षा करने की मांग की है।

इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी बैंक कर्मचारियों का समर्थन किया है और सरकार पर मुनाफा कमाने वाले बैंक को बेचने पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि स्वतंत्र पेशेवर एजेंसियों द्वारा उचित मूल्यांकन किया गया है। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल के सवाल पर पलटवार भी किया थाा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को इस सौदे को मंजूरी दी थी, जिसमें सरकार की 30.48 फीसदी (लगभग 26,620 करोड़ रुपये) और एलआईसी की 30.24 फीसदी (लगभग 26,440 करोड़ रुपये) हिस्सेदारी शामिल है। भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी मिलने के बाद ये सौदा चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

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