पश्चिम एशिया में तनाव के बादल छंटे! अमेरिका-ईरान का शांति समझौता, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर के बाद फिर से खुल जाएगा होर्मुज स्ट्रेट

INTERNATIONAL

तेहरान का परमाणु कार्यक्रम मुद्दा अभी भी अनसुलझा, इजराइल अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते से असहमत

Eksandeshlive Desk

वाशिंगटन : पश्चिम एशिया में तनाव के बादल छंटने के दिन आ गए। 28 फरवरी से जंग का मैदान बन चुके होर्मुज जलडमरूमध्य में अब जहाजों की आवाजाही निर्बाध हो सकेगी। लंबी ना-नुकुर के बाद अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर सहमत हो गए। वाशिंगटन और तेहरान ने शांति समझौते की पुष्टि की है। प्रमुख मध्यस्थ देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का दृढ़ता से कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है और यही नहीं, यह “अब लागू हो चुका है”। समझौते पर हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली है। शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा। उन्होंने माना कि समझौते का पूरा मसौदा अभी जारी नहीं किया गया है। सीएनएन, अल जजीरा और गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को होने वाले हस्ताक्षर समारोह के बाद के कदमों के बारे में अमेरिका और ईरान ने अलग-अलग बातें कही हैं। ईरान के उप विदेशमंत्री ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत तब शुरू होगी जब अमेरिका फ्रीज किए गए अरबों डॉलर जारी करेगा, लेकिन एक अमेरिकी अधिकारी ने इस दावे को खारिज कर दिया है। वहीं, इजराइल ने अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के लिए बनी सहमति से असहमति जताते हुए कहा कि यह समझौता इजराइल के लिए बाध्यकारी नहीं है। उनका देश लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खतरे को समाप्त करने के अपने संकल्प से कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह की गतिविधियों से पैदा खतरों को खत्म करने के संकल्प को लेकर इजराइल को कोई भी समझौता मंज़ूर नहीं है।

ट्रंप ने कहा- समझौता यह सुनिश्चित करेगा कि होर्मुज हमेशा के लिए टोल फ्री रहे : पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में होंगे। डार ने कहा कि पाकिस्तान को 19 जून को जिनेवा में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह का इंतजार है। उन्होंने दोनों पक्षों को मनाने के प्रयासों में मदद के लिए सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे देशों का शुक्रिया अदा किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि समझौता यह सुनिश्चित करेगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा के लिए टोल फ्री रहे। ट्रंप ने अमेरिका में अपने 80वें जन्मदिन पर ईरान समझौते का ऐलान किया। इसके कुछ घंटे बाद उन्होंने देश की 250वीं वर्षगांठ के जश्न में व्हाइट हाउस में यूएफसी इवेंट की मेजबानी की। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि तेहरान नहीं चाहता था कि घोषणा ईरान में आधी रात से पहले की जाए। ट्रंप का कहना है कि इस समझौते के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अमेरिका का आभारी होना चाहिए। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि समझौते के अंतिम मसौदे पर दोनों पक्षों की सहमति हो गई है। अब लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो जाएगा। ईरान की सेना ने कहा कि ईरानी लोगों ने साबित कर दिया है कि अमेरिका और इजराइल के पास हार मानने और आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई चारा नहीं था। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने ईरान के साथ समझौते के बारे में ट्रंप की घोषणा पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले ही ईरान के साथ एक समझौता किया था, जिसने 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित कर दिया था। उन्होंने एक्स पर लिखा, “डोनाल्ड ट्रंप ने बिना सोचे-समझे उस समझौते को रद कर दिया और हमें युद्ध में धकेल दिया। अब गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरान ज्यादा मजबूत हो गया है। यही ट्रंप का रिकॉर्ड है।” ट्रंप ने कहा कि अगर इस समझौते को पूरी तरह लागू किया जाता है तो यह उस संकट में एक बड़ा मोड़ साबित होगा जिसमें इजराइल, हिजबुल्लाह और क्षेत्र के अन्य पक्ष शामिल रहे हैं और जिसकी वजह से लेबनान, गाजा और समुद्री रास्तों पर लड़ाई फैल गई थी। अमेरिकी समाचार चैनल सीबीएस न्यूज का कहना है कि यह पुष्टि वाशिंगटन और तेहरान के बीच हफ्तों तक चले विरोधाभासी संकेतों के बाद आई है। दोनों पक्षों ने पहले प्रगति के संकेत तो दिए थे, लेकिन साथ ही किसी भी अंतिम समझौते की मुख्य शर्तों पर असहमति भी जताई थी। क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। यह अभी साफ नहीं है कि जमीनी स्तर पर सहयोगी समूह इस कथित कामयाबी पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे।

दुनिया भर के नेताओं ने शांति समझौते का किया स्वागत : इस बीच दुनिया भर के नेताओं ने सोमवार को इस शांति समझौते का स्वागत किया। इस समझौते की भारत कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने सराहना की। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हुआ है और कई देशों में जनहानि भी हुई है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए बनी समझ का वह स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा, “भारत को आशा है कि इस समझ के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी तथा नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।” प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शेष लंबित मुद्दों पर जारी वार्ता एक टिकाऊ और अंतिम समझौते तक पहुंचेगी, जिससे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित हो सके। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने एक्स पर लिखा,”हम संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत करते हैं।” उन्होंने कहा कि कतर भविष्य की बातचीत के “सकारात्मक और रचनात्मक भावना” के साथ होने की उम्मीद करता है। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि यह खबर, जिसकी पूरी दुनिया को लंबे समय से जरूरत थी, हमारे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का स्थायी माहौल बनाने का रास्ता साफ करेगी।” उन्होंने उकसावे वाली कार्रवाइयों से बचने की चेतावनी भी दी और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब को धन्यवाद दिया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस समझौते को “युद्ध खत्म करने, क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम” बताया हा। स्टारमर ने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप और पाकिस्तान, कतर व अन्य देशों के उन मध्यस्थों को बधाई देता हूं जिन्होंने इस कामयाबी में योगदान दिया है।” जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी इस समझौते का स्वागत किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने समझौते को तेजी से लागू करने की उम्मीद जताई है। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। सभी को बधाई। दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो।” पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा है कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार (19 जून) को स्विट्जरलैंड में होंगे। उन्होंने कूटनीतिक प्रक्रिया में योगदान के लिए कतर, सऊदी अरब और तुर्किये का धन्यवाद किया। शरीफ के अनुसार, मध्यस्थ अब औपचारिक हस्ताक्षर से पहले कई बैठकें करवाएंगे, ताकि तकनीकी बातचीत और समझौते को लागू करने की नींव रखी जा सके।

Spread the love