Eksandeshlive Desk
तेहरान : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हालिया कूटनीतिक घटनाक्रमों के बीच ईरान ने घोषणा की है कि उसका प्रतिनिधिमंडल जल्द ही अमेरिका के साथ वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड जाएगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों और प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना होगा। ईरानी मीडिया के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता रहा है और अब दूसरी ओर से भी समझौते के प्रावधानों को लागू किए जाने की अपेक्षा है। उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियों और संघर्षविराम उल्लंघन के आरोपों को लेकर ईरान चिंतित है। इस बीच ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हाल में किए गए बयानों ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ईरानी पक्ष का कहना है कि क्षेत्रीय समझौतों की शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी स्तर की वार्ता में पाकिस्तान और कतर भी भाग लेंगे। दोनों देश मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे। पाकिस्तान ने कहा कि वार्ता स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक क्षेत्र में आयोजित की जाएगी और उसका उद्देश्य पहले से बने समझौतों और आपसी सहमतियों को आगे बढ़ाना है। पाकिस्तान ने यह भी दोहराया कि वह मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेगा और क्षेत्रीय स्थिरता तथा संवाद को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगा।
अब तक 8 युद्ध रुकवाए, पर ईरान युद्ध बेहद चुनौतीपूर्ण थाः ट्रंप
वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया है कि उनकी सरकार ने अब तक आठ युद्ध रुकवाएं हैं, लेकिन इनमें से ईरान युद्ध सबसे चुनौतीपूर्ण था। लेबनान की संवाद समिति नेशनल न्यूज एजेंसी और विभिन्न मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन की नीति सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीति, बातचीत और राजनीतिक समाधान पर आधारित रही है। उनके अनुसार, लंबे समय से चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के प्रयासों का उद्देश्य मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करना तथा क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना था। राष्ट्रपति ने अमेरिकी रक्षा मंत्री और सेना की भी सराहना करते हुए कहा कि युद्ध और संकट की परिस्थितियों में उन्होंने शानदार काम किया। उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों के प्रदर्शन को पेशेवर और प्रभावी बताया। ट्रंप ने इसके पहले फ्रांस के एविएन में 15-17 जून तक आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में भी ऐसा ही दावा किया था। ट्रंप ने जिन 8 संघर्षों का उल्लेख किया उसमें इज़राइल-ईरान, इजराइल-हमास, सर्बिया-कोसोवो, आर्मेनिया-अज़रबैजान, रवांडा-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मिस्र-इथियोपिया तथा थाईलैंड-कंबोडिया शामिल हैं। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान युद्ध का भी जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़ा संकट अन्य सभी विवादों की तुलना में अधिक जटिल था। क्योंकि इस मामले में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के हित जुड़े होने के कारण सबको सहमति के बिंदु तक लाना एक चुनौती थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके इजराइल के साथ “बहुत अच्छे संबंध” हैं। उन्होंने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन देशों के साथ अमेरिका के संबंध बेहतरीन हैं। दूसरी ओर, ट्रंप के इन दावों के बीच इस बात को लेकर बहस जारी है कि इन संघर्षों में अमेरिकी भूमिका कितनी निर्णायक रही और क्या इन विवादों का स्थायी समाधान वास्तव में हासिल हुआ है।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद किया
तेहरान : पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों के बीच ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की घोषणा की है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, देश की संयुक्त सैन्य कमान से जुड़े अधिकारियों ने इस कदम को हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रमों और सुरक्षा चिंताओं से जोड़ा है। ईरान के सर्वोच्च संयुक्त सैन्य कमान एवं परिचालन नियंत्रण केंद्र खतम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय (केसीएचक्यू) ने कहा कि हाल में हुए शांति समझौते की कुछ प्रमुख शर्तों का पालन नहीं हुआ है। ईरानी पक्ष का आरोप है कि दक्षिणी लेबनान में सैन्य गतिविधियां और संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाएं जारी हैं, जिसके कारण क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हो सका है। ईरान ने कहा है कि यदि क्षेत्र में हिंसा जारी रहती है तो इससे शांति प्रयासों पर असर पड़ेगा। इसी संदर्भ में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर यह कदम उठाए जाने की जानकारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हुए कूटनीतिक प्रयासों के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि लेबनान और इजराइल के बीच संघर्षविराम की घोषणाओं के बावजूद सीमा क्षेत्रों में हिंसा और सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में हालिया हमलों में कई लोगों के हताहत होने की सूचना है। वहीं इजराइल ने अपनी सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
