बीआईटी मेसरा व आईआईटी कानपुर ने पांच वर्ष के लिए किया एमओयू

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रांची: बीआईटी मेसरा और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर ने दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को दोनों संस्थानों की आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इस समझौते पर बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता छात्रों और फैकल्टी के आदान-प्रदान, शोधार्थियों के संयुक्त मार्गदर्शन, विशेष अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच और संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए एक रूपरेखा तैयार करता है। इसके तहत दोनों संस्थान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों को संयुक्त अनुसंधान प्रस्ताव भी प्रस्तुत कर सकेंगे। इस साझेदारी पर बात करते हुए, बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा, आईआईटी कानपुर के साथ हमारी साझेदारी, बीआईटी मेसरा की शैक्षणिक उत्कृष्टता, प्रभावशाली अनुसंधान और नवाचार-आधारित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस साझेदारी के माध्यम से, हमारा लक्ष्य अपने छात्रों और फैकल्टी को उन्नत अनुसंधान में शामिल होने, विशेष शैक्षणिक विशेषज्ञता का लाभ उठाने और राष्ट्रीय महत्व की चुनौतियों पर काम करने के नए अवसर उपलब्ध कराना है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में मजबूत संस्थानों, सक्षम शोधकतार्ओं और कुशल कार्यबल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। दोनों संस्थानों की शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं को एक साथ लाकर, हम संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और ऐसे कुशल स्नातकों को तैयार करने के माध्यम से इस राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देना चाहते हैं, जो देश की उभरती वैज्ञानिक और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों। यह एमओयू पांच प्रमुख क्षेत्रों को कवर करता है: स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अनुसंधान, छात्र विनिमय और इंटर्नशिप, संयुक्त मास्टर और पीएच.डी. मार्गदर्शन, शैक्षणिक कार्यक्रम तथा कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण। अनुसंधान के तहत, दोनों संस्थानों के फैकल्टी सदस्य मिलकर स्नातक स्तर के छात्रों को तीसरे वर्ष से और स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों को पहले सेमेस्टर से उनके प्रोजेक्ट्स में मार्गदर्शन देंगे। छात्रों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकती है और वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के तहत दोनों संस्थानों का दौरा कर सकेंगे। मास्टर और पीएच.डी. स्तर पर शोधार्थियों को दोनों संस्थानों के दो या अधिक फैकल्टी सदस्यों द्वारा संयुक्त मार्गदर्शन दिया जा सकेगा। फंडिंग, शैक्षणिक क्रेडिट, संस्थान में अनिवार्य उपस्थिति और बौद्धिक संपदा से जुड़े विषयों, जिनमें शोध प्रकाशन और पेटेंट शामिल हैं, के लिए आपसी सहमति से दिशानिर्देश तय किए जाएंगे।

छात्र विनिमय के प्रावधानों में दोनों संस्थानों में ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन इंटर्नशिप, अल्पकालिक पाठ्यक्रम और कार्यशालाएं शामिल हैं। दोनों संस्थान मिलकर जीआईएएन (ॠकअठ) और माइक्रो-क्रेडिट पाठ्यक्रम, सेमिनार, कार्यशालाएं, सम्मेलन और परामर्श संबंधी गतिविधियां भी आयोजित कर सकते हैं। इस समझौते के तहत अनुसंधान सुविधाओं का साझा उपयोग, फैकल्टी का आदान-प्रदान और उनके व्यावसायिक विकास के कार्यक्रमों के साथ-साथ कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अल्पकालिक प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम अन्य संस्थानों के प्रतिभागियों के लिए भी खुले हो सकते हैं।

बीआईटी मेसरा के छात्रों को इस समझौते के तहत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं में भाग लेने, आईआईटी कानपुर की विशेष प्रयोगशालाओं का दौरा करने और विनिमय कार्यक्रमों एवं इंटर्नशिप में हिस्सा लेने के अवसर मिलेंगे। ये अवसर संबंधित गतिविधियों की निर्धारित शर्तों के अधीन होंगे। पात्र मास्टर और पीएच.डी. शोधार्थी दोनों संस्थानों के फैकल्टी सदस्यों के संयुक्त मार्गदर्शन में अनुसंधान कर सकेंगे। वहीं, बीआईटी मेसरा के फैकल्टी सदस्य संयुक्त अनुसंधान और व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे।

इस समझौते को दोनों संस्थानों में नियुक्त समन्वयकों के माध्यम से लागू किया जाएगा। बीआईटी मेसरा में अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता के डीन (ऊफकए), डॉ. राजू पोद्दार समन्वयक होंगे, जबकि स्नातक अध्ययन के डीन (ऊवॠर), डॉ. गौतम सारखेल संयुक्त समन्वयक होंगे। आईआईटी कानपुर में शैक्षणिक मामलों के डीन (ऊडअअ), प्रो. अशोक दे या अनुसंधान एवं विकास के डीन (ऊडफऊ), प्रो. जयंदरन गिरीधर राव में से कोई एक समन्वयक के रूप में कार्य करेगा। एक एसोसिएट डीन या डीन द्वारा नामित व्यक्ति संयुक्त समन्वयक के रूप में कार्य करेगा।

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