भारत को नेपाल 86 मेगावाट बिजली बेचेगा, पावर एक्सचेंज के जरिए होगी बिक्री

INTERNATIONAL

Eksandeshlive Desk

काठमांडू: नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने अगले बरसात के मौसम में भारत को 86 मेगावाट बिजली बेचने का फैसला किया है। देश में खपत के बाद बचने वाली अतिरिक्त बिजली को भारतीय विद्युत व्यापार कंपनी टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड के माध्यम से भारत के पावर एक्सचेंज के जरिए भारतीय बिजली बाजार में बेचा जाएगा। प्राधिकरण के संचालक समिति सदस्य अंशुकिरण शाही ने बताया कि इस संबंध में विद्युत खरीद-बिक्री समझौते के मसौदे को मंजूरी देकर समझौता करने के लिए नियामक आयोग से परामर्श लेने का निर्णय किया गया था। विद्युत नियमन आयोग ने बैठक कर इस प्रस्ताव पर सहमति देने का फैसला किया। प्राधिकरण ने बिजली बेचने का निर्णय करते हुए विद्युत खरीद-बिक्री समझौते के मसौदे को मंजूरी दी। प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक दीर्घायु कुमार श्रेष्ठ ने 1 नवंबर 2026 से 31 मई 2029 तक भारत के पावर एक्सचेंज के माध्यम से भारतीय बिजली बाजार में 85.6 मेगावाट बिजली बेचने के प्रस्ताव की सिफारिश की थी। भविष्य में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से बिजली की मात्रा बढ़ाई भी जा सकती है। प्राधिकरण के संचालक समिति ने कार्यकारी निदेशक श्रेष्ठ की सिफारिश के अनुसार प्रस्ताव को मंजूरी दी है। संचालक समिति के अध्यक्ष एवं ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्री विराज भक्त श्रेष्ठ ने बिजली बिक्री संबंधी निर्णय पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने विद्युत खरीद-बिक्री समझौते पर प्राधिकरण की ओर से हस्ताक्षर करने के लिए कार्यकारी निदेशक श्रेष्ठ को अधिकृत भी किया है।

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित 620 मेगावाट की 19 बिजली परियोजनाएं तत्काल शुरू नहीं होंगी: नेपाल में हाल में आई दो बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं से प्रभावित 620 मेगावाट क्षमता की 19 बिजली परियोजनाएं तत्काल संचालन में नहीं आ पाएंगी। भोटेकोशी में आई बाढ़ और पिछले हफ्ते भर हुई भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से कुल 1,292 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ था। इनमें 620 मेगावाट क्षमता की 19 परियोजनाओं को तत्काल फिर से शुरू करना संभव नहीं दिख रहा है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार 26 अगस्त को आई बाढ़ से प्रभावित 430.8 मेगावाट क्षमता की 12 परियोजनाएं भी तत्काल संचालन में नहीं आ पाएंगी। इनमें 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी, 78 मेगावाट की सान्जेन, 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए, 42.5 मेगावाट की लोअर सान्जेन, 24 मेगावाट की त्रिशूली और 25 मेगावाट की एनईए सोलर परियोजना शामिल हैं। इसी तरह 22.1 मेगावाट की चिलिमे, 20 मेगावाट की लांगटांग, 14.8 मेगावाट की अपर सान्जेन, 14.3 मेगावाट की अपर मैलुंग, 14.1 मेगावाट की देवीघाट और 5 मेगावाट की मैलुंग खोला जलविद्युत परियोजना भी प्रभावित हुई हैं। इनमें अधिकांश परियोजनाएं बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। बाढ़ के कारण इनके पावरहाउस, बांध और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है। विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, इन सभी परियोजनाओं का पुनर्निर्माण करना पड़ेगा। इसी तरह 16-20 सितंबर तक लगातार हुई बारिश के बाद बाढ़ और भूस्खलन से 220 केवी कालीगंडकी कॉरिडोर के कुश्मा–दाना खंड को नुकसान पहुंचा है। इसके कारण 190 मेगावाट क्षमता की सात परियोजनाओं का बिजली उत्पादन रुक गया है। बाढ़ से इस ट्रांसमिशन लाइन के तीन टावर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके चलते कुश्मा से ऊपर के क्षेत्र में स्थित बिजली परियोजनाओं की बिजली राष्ट्रीय प्रसारण लाइन में नहीं जोड़ी जा पा रही है। इन परियोजनाओं में नीलगिरि-1 (38 मेगावाट), नीलगिरि-2 (71 मेगावाट), मिस्त्री (42 मेगावाट), थापाखोला (13.6 मेगावाट), घारखोला (14.8 मेगावाट), रेलेखोला (6 मेगावाट) और घलेम्दी (5 मेगावाट) शामिल हैं। प्रसारण संरचना की मरम्मत के बाद इन परियोजनाओं से बिजली आपूर्ति फिर शुरू होने में कुछ समय लगने का अनुमान है। कुछ अन्य परियोजनाओं में संभावित नुकसान को रोकने के लिए उत्पादन अस्थायी रूप से बंद किया गया था। बाढ़ के दौरान बंद की गई 144 मेगावाट क्षमता वाली कालीगंडकी और मर्स्यांग्दी कॉरिडोर की परियोजनाओं समेत अन्य संयंत्रों में उत्पादन फिर शुरू हो चुका है। 40 मेगावाट की राहुघाट जलविद्युत परियोजना को हालांकि दोबारा संचालन में आने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। करीब एक सप्ताह पहले ही परीक्षण उत्पादन शुरू करने वाली राहुघाट परियोजना के टेलरेस गेट और डक्ट में क्षति हुई है, जबकि टर्बाइन फ्लोर में पानी भर गया है। पानी निकालकर सफाई करने और परियोजना को फिर से शुरू करने में करीब 10 दिन लगने का अनुमान है। परियोजना का स्विचयार्ड सामान्य स्थिति में है और उसे चार्ज कर दिया गया है।

Spread the love