ईरान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत करता है, न कि रियायतें देने के लिए : आईआरजीसी

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Eksandeshlive Desk

तेहरान : ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नौसेना अधिकारी मोहम्मद अकबरज़ादेह ने कहा है कि ईरान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत करता है, न कि रियायतें देने के लिए। ईरान के दुश्मन देश की ताकत देखकर पीछे हटते हैं। ईरान की सरकारी मीडिया संगठन प्रेसटीवी के अनुसार दक्षिणी ईरान के बंदरगाह शहर बंदरअब्बास में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए आईआरजीसी नौसेना में राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख अकबरज़ादेह ने कहा कि हाल की घटनाओं ने सैन्य, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर राष्ट्रीय शक्ति बनाए रखने के महत्व को एक बार फिर साबित कर दिया है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी कूटनीतिक वार्ताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत करता है, न कि रियायतें देने के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि दूसरा पक्ष अपने वादों को पूरा करने में विफल रहता है तो ईरान अपने हितों से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई कथित आक्रामक कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य ने उनका निर्णायक और प्रभावी जवाब दिया है। उनके अनुसार, दुश्मनों की नीतियां केवल शक्ति के प्रदर्शन से प्रभावित होती हैं। अकबरज़ादेह ने कहा, “दुश्मन तब पीछे हटता है जब वह आपकी ताकत देखता है, न कि इसलिए कि उसे आपके प्रति सहानुभूति होती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते या कूटनीतिक प्रक्रिया में वास्तविक सुरक्षा की गारंटी केवल राष्ट्रीय शक्ति ही होती है। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि ईरान ने हमेशा बाहरी दबावों और चुनौतियों का डटकर सामना किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय एकता और शक्ति के बल पर ईरान भविष्य की चुनौतियों का भी सफलतापूर्वक सामना करेगा।

मेरिका ने इज़राइल से लेबनान में सैन्य कार्रवाई न बढ़ाने को कहा, ईरान वार्ता पर फोकस

वॉशिंगटन/तेल अवीव : इज़राइली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने इज़राइल पर दबाव डाला है कि वह लेबनान में किसी भी सैन्य बढ़ोतरी से बचे, ताकि स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ होने वाली महत्वपूर्ण वार्ताएं प्रभावित न हों। तुर्किए की समाचार संवाद समिति अनाडाेलू एजेंसी ने इजराइल के चैनल 13 की एक रिपोर्ट में एक अज्ञात इज़राइली राजनयिक के हवाले से कहा गया है कि वॉशिंगटन प्रशासन ने इज़राइल को स्पष्ट संदेश भेजा है कि ऐसी कोई भी सैन्य कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए जिससे ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया खतरे में पड़ जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने यह भी कहा है कि ऐसे हमले, जिनसे ईरान के साथ बातचीत समाप्त हो सकती है, उन्हें अमेरिका के साथ पूर्व समन्वय के बिना अंजाम नहीं दिया जाना चाहिए। इस बीच, इज़राइली सेना को अपने हवाई और जमीनी हमलों में उल्लेखनीय कमी लाने, लेबनान में अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सैनिकों को बनाए रखने तथा सैन्य कार्रवाई को केवल “तत्काल खतरे” की परिस्थितियों तक सीमित रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को निर्देश दिया है कि वह आवश्यकता पड़ने तक कब्ज़े वाले इलाकों में बनी रहे और किसी भी हमले का कड़ा जवाब दे। उधर, स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्ता में शामिल होने के लिए रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत की। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि हम परमाणु मुद्दे और लेबनान में युद्धविराम को लेकर प्रगति हासिल कर पाएंगे। ये दोनों बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या लेबनान में जारी संघर्ष कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकता है, तो जेडी वेंस ने कहा कि “सुर्खियों के बावजूद हालात में सुधार हो रहा है और लड़ाई की तीव्रता कम हुई है। हमें इस प्रक्रिया का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना होगा ताकि इज़राइल और लेबनान दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।” जेडी वेंस ने आगे कहा कि स्थायी युद्धविराम के लिए लंबे समय तक संघर्ष को रोकना आवश्यक है और अमेरिका इसी दिशा में काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित रखते हुए ईरान के साथ बातचीत को सफल बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इज़राइल अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दे रहा है।

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