हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसान हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं: डॉ. शैलेश कुमार गिरि

360° Ek Sandesh Live plotical SOCIETY

बिहार की आर्थिक चुनौतियों और प्रस्तावित सेटेलाइट टाउन योजनाओं पर किसानों के हित सुरक्षित करने की मांग

पटना/नोएडा: भारतीय हलधर किसान यूनियन ने बिहार की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों, लंबित विकास कार्यों तथा राज्य में प्रस्तावित सेटेलाइट टाउन योजनाओं के संदर्भ में किसानों, भूमिधारकों और ग्रामीण परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। यूनियन ने कहा कि विकास योजनाओं के साथ-साथ प्रभावित किसानों को समयबद्ध मुआवजा, पारदर्शी प्रक्रिया और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना आवश्यक है। भारतीय हलधर किसान यूनियन के राष्ट्रीय कोर कमेटी उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता एवं बिहार-झारखंड प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार गिरि ने कहा की “हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसान हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। बिहार में जो भी योजना बने, उसमें किसान सम्मान, उचित मुआवजा और भविष्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने बिहार के किसानों, खेत मजदूरों, भूमिधारकों और ग्रामीण युवाओं से संगठित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
यूनियन के अनुसार राज्य के अनेक क्षेत्रों में किसान पहले से ही सिंचाई, लागत, फसल मूल्य, रोजगार और ग्रामीण आधारभूत संरचना जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में यदि बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण आधारित योजनाएं लाई जाती हैं, तो किसानों की आजीविका, भूमि अधिकार और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। डॉ. गिरि ने कहा कि बिहार के विकास का रास्ता किसानों को कमजोर करके नहीं, बल्कि किसानों को भागीदार बनाकर ही निकल सकता है। यदि विकास योजनाओं में किसानों का विश्वास और सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, तो राज्य की प्रगति को नई गति मिल सकती है।

भारतीय हलधर किसान यूनियन ने सरकार से मांग की है कि किसी भी प्रस्तावित सेटेलाइट टाउन योजना को लागू करने से पहले निम्न बिंदुओं पर स्पष्ट नीति घोषित की जाए:
– प्रभावित किसानों को बाजार दर से उचित एवं समयबद्ध मुआवजा
– परिवारों के लिए पुनर्वास एवं वैकल्पिक आजीविका व्यवस्था
– स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता
– ग्राम सभाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पूर्व परामर्श
– परियोजना की वित्तीय एवं प्रशासनिक पारदर्शिता



Spread the love