रात का सन्नाटा होते ही बढ़ जाती है बेचैनी, दर्जनभर हाथियों का झुंड कई दिनों से रनिया क्षेत्र में सक्रिय, खेतों में लगी फसल को पहुंचा रहा नुकसान
Eksandeshlive Desk
खूंटी: कभी गांव की जिंदगी को सुकून और शांति का पर्याय माना जाता था। न वाहनों का शोर, न प्रदूषण और न ही शहर जैसी भागदौड़। लेकिन खूंटी जिले के जंगलों से सटे कई गांवों में अब रात का सन्नाटा सुकून नहीं, बल्कि डर लेकर आता है। खासकर तोरपा, कर्रा और रनिया प्रखंड के हाथी प्रभावित गांवों में शाम ढलते ही ग्रामीण सतर्क हो जाते हैं। उन्हें चिंता रहती है कि जंगल से निकलकर हाथियों का झुंड कब गांव की ओर पहुंच जाए और देखते ही देखते महीनों की मेहनत से तैयार फसल को बर्बाद कर दे। इन गांवों में रात का पहरा अब ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है। किसी के हाथ में टॉर्च रहती है तो कोई घर और खेत के आसपास लगातार निगरानी करता नजर आता है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता खेतों में खड़ी फसल को लेकर है। फसल बर्बाद होने का मतलब केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए परिवार की आजीविका और आने वाले महीनों की जरूरतों पर संकट खड़ा होना है।
खूंटी जिले के पिछड़े प्रखंडों में शामिल रनिया इस समय हाथियों की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। करीब दर्जनभर जंगली हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से रनिया क्षेत्र के गांवों और खेतों के आसपास घूम रहा है। हाथियों की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की दिनचर्या बदल दी है। किसान दिनभर खेतों में काम करने के बाद रात में उसी फसल की सुरक्षा के लिए पहरा देने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जब हाथियों का झुंड गांव की ओर बढ़ता दिखाई देता है तो दहशत का माहौल बन जाता है। इसके बावजूद घरों और खेतों को बचाने के लिए कई ग्रामीण एकजुट होकर हाथियों को दूर भगाने का प्रयास करते हैं। इस दौरान उन्हें हाथियों के काफी करीब जाने का जोखिम भी उठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों से सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित तरीके से गांवों से दूर रखने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है। उनका आरोप है कि संकट के समय उन्हें पर्याप्त विभागीय मदद नजर नहीं आती, जिसके कारण वे खुद ही जोखिम उठाकर हाथियों से निपटने को विवश हैं। हालांकि पिछले दो-तीन दिनों में हाथियों द्वारा किसी घर को नुकसान पहुंचाने की सूचना नहीं है, लेकिन खेतों में लगी फसलों को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। मंगलवार और बुधवार की रात जयपुर गांव में हाथियों की सक्रियता से ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बुधवार रात करीब नौ बजे हाथियों का झुंड गांव की ओर बढ़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर हाथियों को गांव से दूर केलो गांव की दिशा में खदेड़ने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद हाथियों को गांव से बाहर करने में सफलता मिली।
हालांकि हाथियों को खदेड़ने के दौरान जयपुर गांव के किसान नोएल कंडुलना और सुशील डाहंगा की फसलें हाथियों के पैरों तले रौंद दी गईं। इससे दोनों किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। ग्रामीणों के मुताबिक केलो गांव के खक्सीटोली और गड़ाहातू में भी कई किसानों की फसलों को हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। हाथियों की लगातार मौजूदगी से किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक ओर खेतों में तैयार हो रही फसल को हाथियों से बचाना है, तो दूसरी ओर रात के समय खुद की और परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों का झुंड इसी तरह गांवों और खेतों के आसपास सक्रिय रहा तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है। विधायक प्रतिनिधि सुरेश कोगाड़ी ने बताया कि वे हाथी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी लेंगे। इसके बाद फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर इसकी जानकारी विधायक सुदीप गुड़िया को दी जाएगी। ग्रामीणों ने हाथियों से सुरक्षा के साथ-साथ फसल नुकसान का उचित आकलन और मुआवजा दिलाने की मांग भी उठाई है।
