Eksandeshlive Desk
रामगढ़: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया है । गुरुवार को अंतिम संस्कार के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब अगले 13 दिनों तक श्राद्ध कर्म की पारंपरिक रस्में निभाएंगे। अगले 13 दिनों तक वे अपने पैतृक गांव नेमरा में ही रहेंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री जब उठे तो उन्होंने पारंपरिक रस्मों की शुरुआत की। स्थानीय परंपरा और रीति रिवाज के अनुसार उन्होंने अपने पैतृक आवास पर दिवंगत मां रूपी सोरेन के निमित्त भोजन परोसने की परंपरा निभाई। इस मौके पर उन्होंने पारिवारिक परंपराओं एवं रीति-रिवाज का पालन करते हुए अपने दिवंगत माता की स्मृति से जुड़े पारंपरिक संस्कारों को भी निभाया। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने भोजन बनाकर उन्हें पत्तल पर दिया। अपने परिजनों के साथ मुख्यमंत्री उस भोजन को लेकर निकले और अपनी दिवंगत माता को अर्पित किया।
गुरु मां रुपी सोरेन की याद में पूर्व मंत्री ने परिवार संग रखा उपवास
पूर्वी सिंहभूम: गुरु मां रुपी सोरेन के निधन ने भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य और झारखंड के पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां को भीतर तक झकझोर दिया है। तीन दशक तक झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से जुड़े रहे दुलाल भुइयां के लिए रुपी सोरेन केवल एक राजनीतिक परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि मां की तरह स्नेह और दुलार देने वाली गुरु मां थीं। उनके निधन से दुखी दुलाल भुइयां और उनका पूरा परिवार गुरुवार को उपवास पर रहा। परिवार ने गुरु मां को याद करते हुए उपवास के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शुक्रवार को अपने पुराने दिनों को याद करते हुए पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब वह महज 18 वर्ष की उम्र में दुमका जाया करते थे, तब गुरु मां रुपी सोरेन उन्हें बिना भोजन कराए और रास्ते के खर्च के लिए पैसे दिए बिना कभी वापस नहीं जाने देती थीं। वह उन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार करती थीं। उनके इसी मातृत्व भरे व्यवहार ने दुलाल भुइयां के मन में उनके प्रति गहरा सम्मान और आत्मीयता पैदा की थी। दुलाल भुइयां ने झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे। उस दौर में उनके साथ शैलेंद्र महतो, आस्तिक महतो और चंपई सोरेन सहित कई लोग आंदोलन में जुटे थे। उन दिनों सभी के पास हरे रंग की जीप हुआ करती थी। उन्होंने बताया कि उनकी जीप का नंबर डीएलवी 6262 था, जिसे उन्होंने आज भी संभालकर रखा है। यह जीप उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन से जुड़ी पुरानी यादों और संघर्ष के दिनों की निशानी है। उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने गुरु दिशोम गुरु शिबू सोरेन और गुरु मां रुपी सोरेन से मिलने जाते थे, उन्हें हमेशा भरपूर स्नेह और सम्मान मिलता था। गुरु मां का वह दुलार आज भी उनकी स्मृतियों में जीवित है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिस मां ने हमेशा उन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार दिया, उनके स्नेह को वह जीवन भर नहीं भूल सकते। दुलाल भुइयां ने दुख जताया कि चाहने के बावजूद वह अपनी गुरु मां रुपी सोरेन के अंतिम दर्शन और विदाई में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने इसके लिए अपनी उपेक्षा को जिम्मेदार बताते हुए पीड़ा व्यक्त की। उनके अनुसार, यह कसक उनके मन में हमेशा बनी रहेगी। अंतिम विदाई में शामिल नहीं हो पाने के दर्द के बीच उन्होंने जमशेदपुर में अपने पूरे परिवार के साथ उपवास रखकर गुरु मां को श्रद्धांजलि दी। उनके लिए यह उपवास केवल शोक व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि उस मां के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भावनात्मक प्रयास था, जिसने जीवन के शुरुआती दिनों में उन्हें अपनापन, सम्मान और ममता दी थी।
दिवंगत रुपी सोरेन की स्मृति में रविवार को पौधरोपण करेगी महानगर कांग्रेस
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत मां रुपी सोरेन की स्मृति में महानगर कांग्रेस की ओर से रविवार को पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। ‘एक पौधा मां के नाम’ अभियान के तहत यह कार्यक्रम मोरहाबादी स्थित चिल्ड्रन पार्क में सुबह 11:30 बजे होगा। कार्यक्रम के माध्यम से स्वर्गीय रुपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। महानगर कांग्रेस की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे। पौधरोपण के माध्यम से रुपी सोरेन की स्मृति को सम्मान देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा। कांग्रेस के महानगर उपाध्यक्ष अरुण चावला ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रविवार को निर्धारित समय पर चिल्ड्रन पार्क में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें कांग्रेसजनों की उपस्थिति रहेगी।
