Eksandeshlive Desk
बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से गुरुवार को इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल शहर में मौजूद नहीं थे इसलिए उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र राज्यपाल के सचिव को सौंप दिया। इस्तीफा सौंपने के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “राज्यपाल शहर में नहीं हैं, उनके रात तक लौटने की जानकारी कार्यालय से मिली। इसलिए अपना इस्तीफा पत्र उनके सचिव को सौंप दिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि राज्यपाल के लौटने के बाद मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा।” सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने आलाकमान का निर्देश मिलते ही इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही कहता आ रहा था कि आलाकमान जब भी निर्देश देगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा। उसी के अनुसार निर्देश मिलने के बाद इस्तीफा सौंप दिया।”
कर्नाटक के 7 करोड़ लोगों की सेवा करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात : अपने राजनीतिक जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैं गांव से आया हुआ व्यक्ति हूं। कभी नहीं सोचा था कि विधायक बनूंगा या मुख्यमंत्री बनूंगा। राजनीति में मेरा आना संयोग था। मेरे परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं था।” उन्होंने अपने वैचारिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं बुद्ध, बसवन्ना, डॉ. बी.आर. आंबेडकर और महात्मा गांधी के आदर्शों में विश्वास रखने वाला व्यक्ति हूं। संविधान ही हमारा धर्म है, मैं ऐसा मानता हूं।” कन्नड़ अभिनेता दिवंगत डॉ. राजकुमार का जिक्र करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, “राजकुमार अपने प्रशंसकों को भगवान कहते थे। मैं एक राजनेता हूं, मेरे लिए मतदाता ही भगवान हैं। कर्नाटक के 7 करोड़ लोगों की सेवा करने का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” इस दौरान उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे दो बार मुख्यमंत्री बनने और दो बार विपक्ष का नेता बनने का अवसर मिला। इसके लिए मैं कांग्रेस आलाकमान का आभारी हूं।” उन्होंने कहा कि साल 2006 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों ने उन्हें भरपूर प्यार और सहयोग दिया। उन्होंने कहा, “साल 2013 से 2018 तक मैं पहली बार मुख्यमंत्री रहा। इसके बाद साल 2023 से अब तक फिर मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला। मेरे साथ काम करने वाले सभी लोगों का मैं आभारी हूं।”
सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद के लिए डीके शिवकुमार के नाम का किया प्रस्ताव : इससे पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार काे अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों के साथ अपने आवास पर ब्रेकफास्ट के साथ बैठक कीथी। हालांकि यह बैठक एक घंटा देर से शुरू हुई क्याेंकि सिद्धारमैया खुद एक घंटे की देरी से अपने आवास में उस जगह पहुंचे, जहां मंत्रियों के लिए ब्रेकफास्ट की टेबल सजी थी। बैठक में शिवकुमार और सिद्धारमैया ने एक-दूसरे को गले लगाकर एकजुटता का संदेश दिया और शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया। सिद्धारमैया ने अपने सभी साथियाें का धन्यवाद दिया। इसके बाद सिद्धारमैया राजभवन पहुंचे। राज्यपाल की अनुपस्थिति में सिद्धारमैया ने उनके सचिव काे अपना इस्तीफा साैंप दिया। इसके तुरंत बाद कर्नाटक कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की फोटो शेयर करते हुए लिखा, “उस दिन, आज के दिन, हमेशा के लिए… एकता ही हमारी शक्ति है! जनसेवा ही हमारी शाश्वत प्रतिबद्धता है!” बताया गया कि सिद्धारमैया ने ब्रेकफास्ट बैठक में अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए अगले मुख्यमंत्री के लिए डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव भी कर दिया है। हालांकि, मुख्यमंत्री के नाम पर विधायक दल की मोहर लगनी अभी बाकी है। माना जा रहा है कि विधायक दल की बैठक कल यानी 29 मई की शाम 5 बजे बेंगलुरु के एक होटल में बुलाई गई है।
सिद्धारमैया का राजनीतिक जीवन : कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन राज्यपाल की मंजूरी के बाद वह प्रभावी होगा। उनके राजनीतिक सफर पर नज़र डालें तो राज्य में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शामिल सिद्धारमैया साल 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री रहे। मई 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की प्रचंड जीत के साथ मुख्यमंत्री के रूप में उनका दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ। उनका राजनीतिक जीवन 40 वर्षों से अधिक का है और वे राज्य के प्रमुख नेता हैं। 3 अगस्त 1948 को मैसूर (अब मैसूरु) जिले के सिद्धारमनाहुंडी गांव के एक किसान परिवार में पैदा हुए सिद्धारमैया अपने परिवार से पहले स्नातक थे। उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से बीएससी तथा कानून (एलएलबी) की डिग्री हासिल की है। उनका राजनीतिक जीवन 80 के दशक में शुरू हुआ। उन्होंने 1983 में भारतीय लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़कर पहली बार कर्नाटक विधानसभा में प्रवेश किया। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में वह जनता दल और जनता दल (सेक्युलर) जैसी पार्टियों से जुड़े रहे। जनता दल (सेक्युलर) के सदस्य के रूप में वह दो बार कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री पद पर भी रहे। साल 2006 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए।
