विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरता के खिलाफ खोला मोर्चा, केंद्रीय गृहमंत्री से की जवाबदेही की मांग

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली/सीवान : जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व वाले छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और बिहार बंद के दौरान सिवान में एके-47 से फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी नेताओं ने इसकी निंदा की है। विपक्ष ने छात्रों पर बर्बरता का आरोप लगाते हुए इसके लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जवाबदेह ठहराया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया और बाद में इसका वीडियो एक्स पर साझा करते हुए लिखा कि यह लोकतंत्र पर सबसे गंभीर हमलों में से एक है। देश के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि छात्रों को आवाज उठाने पर अपराधियों की तरह पीटा और घसीटा गया हो। बिहार में छात्रों पर एके-47 का इस्तेमाल हुआ है क्या और भाजपा शासित राज्यों में छात्रों को क्यों उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोग जवाबदेही से बच नहीं सकते। इस बीच नीट पेपर लीक मामले को लेकर बिहार बंद के दौरान सीवान में हुए प्रदर्शन के बीच एके-47 से हवाई फायरिंग करने वाले पुलिस जवान को निलंबित कर दिया गया है।

मकर द्वार पर विपक्ष का प्रदर्शन, 20 जुलाई की घटना पर गृहमंत्री से जवाबदेही की मांग : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पूरा सिस्टम ही जानलेवा है। खबर आ रही है कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाई गईं और सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार कर उन पर एफआईआर की जा रही है। प्रधानमंत्री का वादा कहां गया कि छात्रों पर कोई एफआईआर नहीं होगी और उन्हें रिहा किया जाएगा। दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन चली और बिहार में एके-47, हर जगह पैटर्न एक ही है। प्रधानमंत्री को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यहां पत्रकारों से कहा कि एके-47 और पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या ये छात्र आतंकवादी हैं। बिहार और बंगाल में फिर से छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई है। कई लड़कियों के माता-पिता को धमकाया जा रहा है और उनसे पूछा जा रहा है कि उन्होंने अपनी बेटियों को प्रदर्शन में क्यों भेजा। क्या भारत में लड़कियां प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले सकतीं। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने यहां पत्रकारों से कहा कि भाजपा शासन में युवाओं पर अत्याचार नहीं रुक रहा है। बिहार में अगर एके-47 की घटना हुई है तो यह बेहद निंदनीय है। लोकतंत्र में रहकर लोगों की भावना को कुचला जा रहा है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगयाा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर एके-47 से गोली चलवाई है। छात्रों से समझौते के बाद भी बिहार में हजारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर हिरासत में लिया जा रहा है और परिजनों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो राजग सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इससे पहले संसद के मकर द्वार पर सोमवार सुबह विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व वाले छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने की। इस दौरान सांसदों ने नारेबाजी भी की। विपक्ष ने कहा कि छात्रों पर हुई बर्बरता के लिए गृहमंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं और संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। इससे पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर में इंडी गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। बैठक में राहुल गांधी, खरगे, प्रमोद तिवारी, सैयद नसीर हुसैन, केसी वेणुगोपाल, गौरव गोगोई, जयराम रमेश समेत तमाम नेता मौजूद रहे। बैठक में तय किया गया कि संसद के भीतर और बाहर छात्रों के मुद्दे को लगातार उठाया जाएगा।

छात्रों पर एके-47 से हवाई फायरिंग करने वाला एसआईटी जवान निलंबित : नीट पेपर लीक मामले को लेकर बिहार बंद के दौरान सीवान में हुए प्रदर्शन के बीच एके-47 से हवाई फायरिंग करने वाले पुलिस जवान को निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने विशेष जांच दल (एसआईटी) में तैनात जवान अभिषेक पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दरअसल, 25 जुलाई को गांधी मैदान और जेपी चौक के आसपास छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक पुलिस जवान भीड़ के बीच एके-47 से हवाई फायरिंग करता दिखाई दिया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने वायरल वीडियो की जांच कराई। प्रारंभिक जांच के बाद एसआईटी में तैनात जवान अभिषेक पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि मामले की विभागीय जांच जारी है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का दावा है कि सीवान के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पूरन कुमार झा समेत करीब 40 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। एसपी के पैर में चोट लगी, जबकि कई अन्य पुलिसकर्मी और ड्यूटी पर तैनात पत्रकार भी पथराव में घायल हुए। पुलिस का दावा है कि उपद्रवियों ने पथराव के साथ पुलिस पर फायरिंग भी की थी, जिसके बाद हालात पर काबू पाने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया। घटना के सिलसिले में पुलिस अब तक 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, हजारों अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उनकी पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में छात्रों ने संसद मार्च निकाला था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस झड़प में 100 से अधिक छात्र और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद से विपक्ष लगातार छात्रों के समर्थन में खड़ा है और सरकार पर दबाव बना रहा है।

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई को लेकर चिंता जताई : सोशल मीडिया अभियान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार को छात्र आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों पर हो रही कथित कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की। सौरव दास ने एक्स पर लिखा, “हमें असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा छात्रों और दूसरे प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने, हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने की कई खबरें मिल रही हैं जिन्हें लेकर हम बहुत चिंतित हैं। सीजेपी ने अपना देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन तभी रोका था जब सरकार ने हमें भरोसा दिलाया था कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ अभी या भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।” उन्होंने कहा कि सबसे पहले, हम हर प्रदर्शनकारी को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि हमारी कानूनी टीम संबंधित राज्यों के बेहतरीन वकीलों के साथ मिलकर हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने और हर संभव कानूनी मदद पहुंचाने के लिए काम कर रही है। यह काम पहले दिन से ही हो रहा है। दूसरी बात, हम सरकार, खासकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह से अपील करते हैं कि वे हमें दिए गए भरोसे का तुरंत सम्मान करें। वे हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करें और निर्देश दें कि देश में कहीं भी किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई जबरदस्ती या बदले की कार्रवाई न हो। दर्ज की गई प्राथमिकी भी वापस ली जानी चाहिए। सौरव ने कहा कि देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन को रोकने का हमारा फैसला नेक नीयत से और पूरी तरह सरकार के इस भरोसे पर लिया गया था कि वह अपनी बात पर कायम रहेगी। उस भरोसे से पीछे हटना न केवल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के साथ विश्वासघात होगा बल्कि उन लाखों युवा भारतीयों के भरोसे को भी तोड़ना होगा जिन्होंने विरोध-प्रदर्शन के बजाय बातचीत का रास्ता चुना था। युवाओं के लिए ऐसा विश्वासघात बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा।

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