By Mustaffa
मेसरा (रांची): कहते हैं खाकी सिर्फ कानून का डंडा नहीं चलाती,बल्कि संकट में राह भटके लोगों के लिए उम्मीद का दीया भी बन जाती है। कुछ ऐसा ही संवेदनशील और दिल को छू लेने वाला नजारा सोमवार को बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र में देखने को मिला। यहाँ पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता की बदौलत रास्ता भटका 8 वर्षीय मासूम अनुराग पासवान महज चार घंटे के भीतर अपने परिजनों के पास सकुशल पहुँच गया। घटनाक्रम के अनुसार,सोमवार सुबह करीब 10 बजे अनजानी राहों पर रोते-भटकते मासूम को देखकर एक स्थानीय युवती ने सूझबूझ दिखाई और उसे तत्काल पुलिस के सुपुर्द कर दिया। थाना परिसर में डरे-सहमे बच्चे को देखकर थाना प्रभारी अजय कुमार दास ने बिना देर किए उसे गोद में बैठाया,पुचकारा और आत्मीयता से नाम पूछा। बच्चे की तोतली जुबान से पिता ‘अनिल पासवान’ का नाम सुनते ही एएसआई संतोष कुमार सिंह,मुंशी हरेंद्र प्रसाद और गश्ती दल हरकत में आ गए। पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए खोजबीन शुरू की और महज 4 घंटे में (दोपहर 2 बजे) गेतलातू स्थित देवी दर्शन मंदिर के समीप बच्चे का घर ढूंढ निकाला। जैसे ही बेबस माता-पिता की आंखों के सामने उनका कलेजे का टुकड़ा सही-सलामत पहुँचा,पूरे माहौल में खुशी के आंसू छलक पड़े। थाना प्रभारी अजय कुमार दास ने कहा,कानून की रक्षा के साथ-साथ समाज के हर चेहरे पर मुस्कान लौटाना ही खाकी का असली धर्म है। सहमे हुए मासूम को उसके अपनों से मिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। पिता अनिल पासवान ने भावुक होकर कहा,बच्चे के गायब होते ही हमारी दुनिया उजड़ गई थी। मेसरा पुलिस ने जिस तत्परता और सहृदयता से हमारे बेटे को तलाशा है,उसका अहसान हम जिंदगी भर नहीं भूल सकते। पुलिस का यह मानवीय रूप वंदनीय है। वहीं,स्थानीय ग्रामीणों ने भी मेसरा पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील कार्यशैली की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
