Eksandeshlive Desk
काठमांडू: नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों (आईएनजीओ) ने 333 करोड़ रुपये के कार्यक्रमों को मंजूरी दिलाई है। इन कार्यक्रमों को महिला, बालबालिका, लैंगिक एवं यौनिक अल्पसंख्यक तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के अंतर्गत समाज कल्याण परिषद से स्वीकृति मिली है। समाज कल्याण परिषद के मुताबिक भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों को लक्षित करते हुए अब तक 318 एनजीओ ने 321 कार्यक्रमों को मंजूरी दी गई है। इन सभी कार्यक्रमों का कुल बजट 3 अरब 33 करोड़ 62 लाख 72 हजार 958 रुपये है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा राहत और प्रतिक्रिया संबंधी कार्यों के लिए आईएनजीओ ने 149 से अधिक परियोजनाओं के तहत 128 करोड़ रुपये के कार्यक्रमों को परिषद से मंजूरी दिलाई है। इसके अतिरिक्त 13 आईएनजीओ ने भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए 487 करोड़ रुपये के कार्यक्रम प्रस्तावित किए हैं। ये प्रस्ताव फिलहाल स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं।
नेपाल में बाढ़ का असर, मुद्रास्फीति बढ़कर 6.34% पहुंची, राहत की उम्मीद कम: नेपाल में बाढ़ के कारण अक्टूबर में महंगाई और बढ़ गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 6.34 प्रतिशत पहुंच गई है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति को 5.5 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वित्त वर्ष की शुरुआत से ही महंगाई दर इस लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। सितंबर में मुद्रास्फीति 5.96 प्रतिशत थी, जो अक्टूबर में बढ़कर 6.34 प्रतिशत हो गई। वहीं, पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में मुद्रास्फीति महज 1.87 प्रतिशत थी। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि से भी नेपाल में पिछले फरवरी से महंगाई बढ़ रही है।आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में फरवरी में मुद्रास्फीति 4.47 प्रतिशत, मार्च में 5.04 प्रतिशत, अप्रैल में 5.04 प्रतिशत, मई में 5.22 प्रतिशत और जून में 5.14 प्रतिशत रही थी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल के मुताबिक, महंगाई बढ़ने में मुख्य रूप से भोटेकोशी बाढ़ की भूमिका है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अक्टूबर में अचानक महंगाई में भारी उछाल नहीं आया, बल्कि पिछले वित्त वर्ष के अंतिम महीनों से ही इसमें लगातार वृद्धि हो रही थी। इसके पीछे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह के कारण जिम्मेदार थे। पौडेल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न युद्धों, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई समस्याओं का असर पड़ा।
अक्टूबर में महंगाई दर में कमी आने की संभावना नहीं: वहीं, घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भी महंगाई पहले से ही बढ़ रही थी। राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता पौडेल के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अक्टूबर में महंगाई दर में कमी आने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि तत्काल महंगाई में सुधार की स्थिति नहीं दिख रही है। इस दौरान बड़े त्योहार भी हैं। इसके अलावा, अक्टूबर में बूढ़ीगंडकी नदी में आई बाढ़ का भी विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव महंगाई पर दिखाई दे सकता है। पौडेल ने कहा कि ऐसे में सितंबर में महंगाई दर में कमी आने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। उपभोक्ता अधिकारकर्मी माधव तिमिल्सिना ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार इसे नियंत्रित करने में सफल नहीं रही है। नवरात्र से ठीक पहले महंगाई बढ़ने से आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। तिमिल्सिना ने कहा कि बाढ़ के कारण पहले से ही संकट झेल रही जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ना दुखद है। उन्होंने सरकार से इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए महंगाई पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
बाढ़ पीड़ितों के लिए 5 लाख रुपये में बनेंगे अस्थायी घर: नेपाल सरकार ने रसुवा जिले के बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाए जाने वाले अस्थायी आवास का मॉडल तय कर लिया है। बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय ने अस्थायी आवास के लिए ‘प्रीफैब मॉड्यूलर होम’ को मंजूरी दी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कार्यकारी समिति की हुई बैठक में २६ अगस्त की बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आवास का मॉडल तय करने की जिम्मेदारी बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय को सौंपी गई थी। इसी के तहत अस्थायी आवास के विभिन्न मॉडलों पर चर्चा के बाद मंत्रालय ने ‘प्रीफैब मॉड्यूलर होम’ को मंजूरी दी है। मंत्री सुनील लम्साल के सलाहकार सुमन प्रधान ने यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, नेपाल बाढ़, भूस्खलन और भूकंप समेत विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के उच्च जोखिम वाला देश है। ऐसे में मंत्री लम्साल का जोर इस बात पर था कि अस्थायी आवास इस तरह बनाए जाएं, जिनका दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सके। प्रधान ने कहा, “भविष्य में आने वाली संभावित प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए अस्थायी आवास के रूप में प्रीफैब मॉड्यूलर होम बनाने का निर्णय लिया गया है।”
