नेपाल के बाढ़ विस्थापित परिवारों को हर महीने मिलेगी 15 हजार रुपये सहायता राशि

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से विस्थापित हुए लोगों को सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जा रही है। रविवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित परिवारों को स्थायी आवास बनने तक मकान किराए और अन्य जरूरी खर्चों के प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता देने का फैसला लिया गया। संचार मंत्री विक्रम तिमिल्सिना ने बताया कि चार सदस्यों तक के परिवार को हर महीने 15 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा परिवार में प्रत्येक सदस्य के लिए 2 हजार रुपये अतिरिक्त उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। अगर कोई परिवार यह आर्थिक सहायता नहीं लेना चाहता है, तो सरकार स्थायी आवास बनने तक उसके लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था करने का विकल्प भी देगी। मंत्री तिमिल्सिना ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि इस संबंध में आवश्यक विवरण जुटाने के लिए सभी संबंधित स्थानीय तहों में फॉर्म भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़ से हुए शुरुआती नुकसान और क्षति का आकलन पूरा कर चुकी है, जबकि विस्तृत जरूरतों का मूल्यांकन अभी किया जा रहा है। इसके आधार पर जरूरी संसाधनों की व्यवस्था कर पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापना के काम को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

चिलिमे जलविद्युत परियोजना के भूमिगत पावर हाउस तक पहुंचने में अभी तीन दिन और लगेंगे: नेपाल की चिलिमे जलविद्युत परियोजना के भूमिगत पावर हाउस तक पहुंचने के लिए सुरंग के भीतर जमा मलबा और कीचड़ हटाने का काम लगातार जारी है। मौजूदा गति से काम जारी रहा, तो पावर हाउस तक पहुंचने में कम से कम तीन दिन और लग सकते हैं। बचाव अभियान में शामिल सुरंग विशेषज्ञ एवं सांसद श्रीराम न्यौपाने के अनुसार शनिवार सुबह 6 बजे से एक्स्काभेटर और व्हील लोडर की मदद से सुरंग के अंदर जमा कीचड़ और मलबा हटाने का काम लगातार किया जा रहा है। उनके मुताबिक शनिवार शाम तक करीब 60 मीटर कीचड़ और मलबा हटाया जा चुका था। उन्होंने अनुमान लगाया कि अगर काम इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने और भूमिगत पावर हाउस तक जाने के लिए अभी करीब तीन दिन और खुदाई करनी पड़ सकती है। चिलिमे जलविद्युत परियोजना की भूमिगत संरचना में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा है। सुरंग के भीतर भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा होने के कारण बचाव दल को आगे बढ़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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