Ashutosh Jha
काठमांडू : त्रिभुवन राजमार्ग अंतर्गत बीरगंज के मुख्य बाजार मार्ग (मेन रोड) के कथित भेदभावपूर्ण विस्तार के विरोध में स्थानीय घरमालिकों और व्यापारियों ने गुरुवार को मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया। गंडक से मैत्री पुल तक आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में लोगों ने ‘डोजर आतंक’ और जबरन बेदखली बंद करने की मांग उठाई। स्थानीय घरमालिकों का कहना है कि दशकों पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर बनाए गए घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने की तैयारी से हजारों परिवार विस्थापित हो जाएंगे तथा बीरगंज की पुरानी व्यावसायिक पहचान संकट में पड़ जाएगी। प्रदर्शनकारी सड़क के दोनों ओर हाथों में हाथ डालकर खड़े हुए और वर्तमान सड़क विस्तार योजना के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने “हमें विकास और विस्तार चाहिए, लेकिन वैकल्पिक समाधान भी खोजे जाएं”, “विकास के नाम पर विनाश स्वीकार नहीं” तथा “बीरगंज की मुख्य सड़क को शहरी सड़क के रूप में संरक्षित रखा जाए” जैसे नारों वाले प्लेकार्ड प्रदर्शित किए गए।
सरावगी ने यह भी कहा कि त्रिभुवन राजमार्ग के वैकल्पिक मार्ग के रूप में बाइपास सड़क पहले ही संचालन में आ चुकी है। ऐसे में मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र की मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए इसे एक आधुनिक शहरी सड़क के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “बीरगंज की मुख्य सड़क केवल एक सड़क नहीं, बल्कि शहर की आर्थिक और ऐतिहासिक पहचान है।व्यावसायिक केंद्र को ध्वस्त कर विकास हासिल नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार से स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद और सहमति के आधार पर दीर्घकालिक समाधान निकालने की अपील की। मुख्य सड़क विस्तार की योजना को लेकर बीरगंज के व्यावसायिक क्षेत्र में असमंजस और भय का माहौल बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन पहले ही सड़क सीमा के भीतर आने वाली संरचनाओं को हटाने का नोटिस जारी कर चुका है, जबकि प्रभावित पक्षों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
