Eksandeshlive Desk
रांची: रामगढ़ जिले के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार से जुड़े मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। संजीव कुमार सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने पर्यटन विभाग के सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि मंदिर के पुनरुद्धार के लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और प्रस्तावित योजना के लिए राशि किस मद से उपलब्ध कराई जाएगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में रामगढ़ के उपायुक्त और पर्यटन विभाग के सचिव अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुनरुद्धार योजना की प्रगति और इसके लिए वित्तीय संसाधन की उपलब्धता को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए सरकार की ओर से 102 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है। सुनवाई के दौरान पर्यटन सचिव की ओर से अदालत को बताया गया कि तैयार डीपीआर की अनुमानित राशि काफी अधिक है। इसी वजह से इस मामले से संबंधित संचिका विभागीय मंत्री के पास भेजी गई है। सरकार के इस जवाब के बाद अदालत ने पर्यटन सचिव को शपथ पत्र के माध्यम से पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। शपथ पत्र में यह बताना होगा कि डीपीआर पर विभागीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है तथा इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था किस मद से की जाएगी। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्तूबर की तारीख निर्धारित की है। हालांकि अगली सुनवाई में रामगढ़ के उपायुक्त और पर्यटन सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने से छूट दी गई है। दोनों अधिकारी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। दरअसल, यह मामला संजीव कुमार सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका से संबंधित है। याचिका में रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार को लेकर पूर्व में दिए गए न्यायालय के आदेशों के अनुपालन का मुद्दा उठाया गया है। सोमवार की सुनवाई में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
