Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये के मूल्य में खासी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाने के प्रयास जारी रखेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम-2026’ में एक पैनल चर्चा के दौरान यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरबीआई डॉलर के मुकाबले रुपये की किसी खास कीमत को तय या डिफेंड करने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि उसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा कि आरबीआई के हाल के उपायों से रुपये को समर्थन मिला है। रुपये के मूल्य में सोमवार को एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि शुरुआती कारोबार में मंगलवार को रुपया मजबूत होकर 94.96 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
सीतारमण ने बताया कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, जबकि देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। वित्त मंत्री ने कहा कि रुपये में उतार-चढ़ाव की प्रमुख वजह बाहरी चुनौतियां हैं, जबकि केंद्र सरकार देश के भीतर व्यापक आर्थिक बुनियादी कारकों को मजबूत बनाए रखने के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राजकोषीय अनुशासन निवेशकों के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। हालांकि, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की घट-बढ़ चुनौती बनी हुई है, सरकार इस पर ध्यान देगी। रिजर्व बैंक ने रुपये में गिरावट थामने के लिए पिछले हफ्ते कई उपायों की घोषणा की थी। केंद्रीय बैंक ने सरकारी तेल एवं गैस विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू करने की घोषणा की, जिससे डॉलर की उनकी मांग हाजिर बाजार से हट सकेगी। इसके अलावा रुपये से जुड़ी सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम भी कड़े किए गए। आरबीआई ने बैंकों से दो लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 फीसदी का आरक्षित प्रावधान करने को भी कहा है।
