Eksandeshlive Desk
विक्टोरिया (सेशेल्स) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल 50 वर्षों के नहीं बल्कि इनकी जड़ें अगस्त 1770 तक जाती हैं, जब ‘थेलेमाक’ नामक जहाज से पांच भारतीय पहली बार यहां पहुंचे थे। दुनिया भले ही सेशेल्स को हिंद महासागर स्थित छोटे-छोटे द्वीपों के समूह के रूप में देखती हो लेकिन भारत की नजर में सेशेल्स एक विशाल महासागरीय राष्ट्र है, जिसकी भूमिका हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण है। तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उनके लिए विशेष सम्मान का क्षण है। उन्होंने स्पीकर सिल्वेन लिबेआन, सरकारी कामकाज के नेता बर्नार्ड जॉर्जेस, विपक्ष के नेता, सांसदों और सेशेल्स की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वह भारत के 1.4 अरब लोगों की शुभकामनाएं लेकर आए हैं। साल 2015 में प्रधानमंत्री बनने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में उनकी पहली यात्रा सेशेल्स की ही थी और एक दशक बाद यहां लौटने पर उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि हिंद महासागर के लिए भारत के दृष्टिकोण में सेशेल्स की विशेष और केंद्रीय भूमिका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर यहां उपस्थित होकर प्रसन्न हैं। भारत और सेशेल्स का रिश्ता केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि यह साझा इतिहास, विश्वास, समुद्री सहयोग और जन-जन के संबंधों पर आधारित है। भारत और सेशेल्स का भविष्य परस्पर जुड़ा हुआ है और दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाने के लिए साथ मिलकर काम करते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने भारत के ‘म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन’ (महासागर) विजन जिक्र करते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण इस विश्वास पर आधारित है कि क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत और सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोग मानचित्र पर सेशेल्स को एक छोटे द्वीपीय देश के रूप में देखते हैं लेकिन वास्तविकता इससे कहीं बड़ी है। सेशेल्स का समुद्री क्षेत्र लगभग 14 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसलिए इसे छोटा द्वीपीय देश नहीं बल्कि एक बड़ा महासागरीय राष्ट्र कहा जाना चाहिए। ब्लू इकोनॉमी वैश्विक विमर्श का विषय बनने से बहुत पहले सेशेल्स समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और ब्लू बॉन्ड जैसे नवाचारों के माध्यम से दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, हाइड्रोग्राफी और समुद्री क्षेत्र की निगरानी के क्षेत्र में भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देशों का सहयोग सुरक्षित और स्थिर हिंद महासागर क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। एक समुद्री राष्ट्र की सुरक्षा दूसरे की सुरक्षा से जुड़ी है, एक की समृद्धि दूसरे की समृद्धि को मजबूत करती है और क्षेत्रीय स्थिरता सभी के हित में है। उन्होंने कहा कि यह वर्ष भारत-सेशेल्स संबंधों की गहराई का महत्वपूर्ण प्रतीक है। 50 वर्ष पहले जब सेशेल्स स्वतंत्र हुआ था, तब भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि मित्रता और एकजुटता के प्रतीक के रूप में पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद था। आज स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर भारतीय नौसेना के आईएनएस इक्षक और आईएनएस तरकश पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में बहुत कुछ बदला है, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना नहीं बदली है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सेशेल्स रक्षा बलों की पेशेवर क्षमता और समर्पण का सम्मान करता है। दशकों से दोनों देशों की सेनाएं, तटरक्षक बल और समुद्री एजेंसियां साथ प्रशिक्षण लेती रही हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मिलकर कार्य करती रही हैं।उन्होंने सेशेल्स की सांस्कृतिक विविधता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सेशेल्स की सबसे बड़ी शक्ति उसके लोग हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने यहां अपनी भाषाएं, परंपराएं, रीति-रिवाज और विश्वास लेकर एक साझा सेशेल्वा पहचान का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि नेशनल असेंबली का आदर्श वाक्य ‘यूनिटी इन डाइवर्सिटी’ भारत की मूल भावना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह विविधता क्रियोल संगीत की धुनों में सुनाई देती है, माउत्या नृत्य की लय में दिखाई देती है और फेस्टिवल क्रियोल के उत्सव में महसूस की जा सकती है। भारत और सेशेल्स के सांस्कृतिक संबंध रोजमर्रा के जीवन में भी दिखाई देते हैं। करी कोको, समोसा और चटनी के स्वाद से लेकर दीपावली, थाई पोंगल और नवरात्रि के गरबा तक दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यही क्रियोल भावना दोनों देशों की मित्रता को भविष्य में और मजबूत बनाने का आधार है। प्रधानमंत्री ने नेशनल असेंबली की नई संरचना को बधाई देते हुए आठवीं नेशनल असेंबली के नव निर्वाचित सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महिला स्पीकर को सदन की पहली महिला अध्यक्ष बनने पर विशेष बधाई भी दी।
इस दौरान नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता बर्नार्ड जॉर्जेस ने कहा कि देश अपनी स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती मना रहा है लेकिन राजनीतिक स्तर पर अभी भी विभाजन की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष स्वर्ण जयंती समारोहों में भाग नहीं लेगा क्योंकि उसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा को लेकर चिंताएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई दृष्टियों से ऐतिहासिक मानी जा रही है। वह 29 जून को सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी भाग ले रही है, जबकि भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे पोत आईएनएस इक्षक भी समारोह का हिस्सा हैं। यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स के विकास और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1,651 करोड़ रुपये) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। साथ ही भारत ने सेशेल्स को भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल ‘पीएस लेस्पवार’ भी भेंट किया है, जिसे समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की संसद को संबोधित कर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की। यह उनके द्वारा संबोधित की गई 20वीं विदेशी संसद है। इससे पहले वह भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, मॉरीशस, श्रीलंका, मंगोलिया, ब्रिटेन, अफगानिस्तान, अमेरिका, युगांडा, मालदीव, गुयाना, घाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, नामीबिया, इथियोपिया और इजराइल की संसदों को संबोधित कर चुके हैं। इससे पहले इस साल फरवरी में वह इजराइल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से भी सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें अब तक 34 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के प्रति आभार व्यक्त किया। सेशेल्स सरकार ने यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबले और सतत विकास को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया है। पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने उन्हें ‘एग्रीकोला मेडल’ से सम्मानित किया था, जबकि वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें अपना सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ प्रदान किया था। इन सम्मानों को भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और वैश्विक जलवायु नेतृत्व की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
