तुरामडीह माइंस मुद्दे पर अर्जुन मुंडा के दौरे का ग्रामसभा ने किया विरोध

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जमशेदपुर। जिले के सुंदरनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत तुरामडीह स्थित नांदूप गांव में सोमवार को यूसील (यूरेनियम कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड) परियोजना से जुड़े विस्थापन व पुनर्वास के मुद्दे पर विवाद गहरा गया। विस्थापित व प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर गांव पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को ग्रामसभा के एक वर्ग के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने उनकी भूमिका पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की व प्रतीकात्मक पुतला दहन भी किया। ग्रामसभा के प्रतिनिधियों का आरोप है कि नांदूप व आसपास के गांवों की जमीन पर संचालित तुरामडीह माइंस से स्थानीय आदिवासी समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, लेकिन वर्षों बाद भी पुनर्वास, रोजगार व बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई वादे अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र को पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र बताते हुए कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों व पारंपरिक व्यवस्थाओं की अनदेखी की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सरकार व प्रबंधन के समक्ष मजबूती से उठाना है। उन्होंने कहा कि यूसील प्रबंधन के साथ हुई बातचीत में स्थानीय युवाओं को रोजगार, विस्थापित परिवारों को उचित पुनर्वास, लंबित मामलों के समाधान व पूर्व समझौतों को लागू करने की मांग रखी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की ओर से लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि माइंस परियोजना की स्थापना के समय रोजगार, पुनर्वास व अन्य सुविधाओं को लेकर कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अधिकांश मांगें आज भी लंबित हैं। हाल ही में विस्थापित समिति ने अपनी समस्याओं व मांगों को लेकर यूसील प्रबंधन को ज्ञापन भी सौंपा था, जिस पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। विस्थापितों की प्रमुख मांगों में स्थानीय लोगों को ठेका कार्यों में प्राथमिकता, पुराने मजदूरों की सेवा सुरक्षा, बर्खास्त कर्मियों या उनके आश्रितों की पुनर्नियुक्ति, लंबित बहाली प्रक्रिया पूरी करना, समुचित पुनर्वास, धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण, मार्केट कॉम्प्लेक्स में दुकान आवंटन सहित अन्य शामिल हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को व व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल इस मुद्दे पर ग्रामसभा व पूर्व मुख्यमंत्री के पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक स्तर पर जांच व सभी पक्षों के तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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