Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: लगातार दो बार आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप जीत चुकी भारतीय टीम घरेलू सत्र की शुरुआत दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज से करेगी। सीरीज से पहले भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने नए टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ काम करने के अनुभव और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के साथ हुई बातचीत को लेकर अपनी बात रखी। जियोस्टार के कार्यक्रम ‘फॉलो द ब्लूज: गौतम गंभीर अनफिल्टर्ड’ में गंभीर ने श्रेयस अय्यर की नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अय्यर की सबसे बड़ी खूबी उनकी निस्वार्थ भावना है। गंभीर ने कहा, “श्रेयस के साथ मेरा पहला अनुभव तब हुआ जब मैं 2024 में केकेआर में गया था, जहां वह कप्तानी कर रहे थे। श्रेयस के बारे में मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि वह कई बार अपनी बल्लेबाजी की स्थिति छोड़ने के लिए तैयार रहते थे। वह इतने लचीले थे कि अगर कोई और खिलाड़ी उनसे ऊपर बल्लेबाजी करने जाता था तो भी उन्हें कोई समस्या नहीं थी। ऐसा बहुत कम होता है कि कोई कप्तान, जो शायद आपकी टीम का मुख्य बल्लेबाज भी हो, टीम के हित में अपनी बल्लेबाजी की स्थिति किसी और के लिए छोड़ दे, चाहे वह किसी और खिलाड़ी को प्रभाव पैदा करने का मौका देने के लिए हो या बाएं-दाएं बल्लेबाजी संयोजन के दृष्टिकोण से। तभी मुझे एहसास हुआ कि एक अच्छे नेता की सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण खूबी यह है कि आप कितने निस्वार्थ हैं।” उन्होंने आगे कहा,” श्रेयस में यह खूबी है और कप्तान के रूप में अपने आगे के सफर में वह इसे एक बड़ी ताकत के रूप में लेकर चल सकते हैं। आप मेहनती हो सकते हैं, अनुशासित हो सकते हैं, फिट हो सकते हैं, दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज हो सकते हैं। लेकिन अगर आप निस्वार्थ नहीं हैं तो बाकी सभी चीजें बेकार हो जाती हैं। श्रेयस में ये सभी खूबियां हैं और इसके ऊपर उनमें वह निस्वार्थ भावना भी है।”
वैभव को अवसर के लिए करना होगा इंतजार: वैभव सूर्यवंशी को लेकर हुई बातचीत के बारे में गंभीर ने कहा कि युवा खिलाड़ी शानदार फॉर्म में हैं, लेकिन लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण उन्हें अपने अवसर का इंतजार करना पड़ सकता है। गंभीर ने कहा, “यह मेरे लिए भी एक नया अनुभव था। हां, वह शानदार फॉर्म में थे, लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि कभी-कभी लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों की वजह से उन्हें अपने अवसर के लिए इंतजार करना होगा। और एक और बात है, सोशल मीडिया या बाहर का शोर प्लेइंग इलेवन तय नहीं करता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ड्रेसिंग रूम में कौन, या कोच और कप्तान किसे लगता है कि वह हमें मैच जिता सकता है, या सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन क्या है, और कौन इतने लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।’ उन्होंने कहा, “क्योंकि अगर वैभव आज खेलते हैं तो मेरे और उस खिलाड़ी के बीच एक मुश्किल बातचीत होगी जिसे हम बाहर रखते हैं, चाहे वह अभिषेक हों या संजू। इसलिए हम अचानक उस संयोजन को नजरअंदाज नहीं कर सकते जिसने पिछले डेढ़ या दो वर्षों में इतना प्रभाव पैदा किया है और तीन या चार असफलताओं के बाद उन्हें बाहर कर ऐसे युवा खिलाड़ी को मौका दे दें जो बेहद प्रतिभाशाली है और बहुत अच्छी फॉर्म में भी है। इसलिए कभी-कभी आपको अपने अवसर के लिए इंतजार करना होगा, क्योंकि हम उस ड्रेसिंग रूम में सुरक्षा की भावना पैदा करना चाहते हैं।” गंभीर ने टीम में निरंतरता बनाए रखने और लोकप्रिय फैसलों के बजाय सही फैसले लेने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए लोकप्रिय फैसले लेना बहुत आसान है, लेकिन शायद मेरे लिए सबसे मुश्किल काम सही फैसले लेना है। और हमने संजू और अभिषेक के साथ जारी रखने का सही फैसला लिया है। खेल के इतिहास में कोई भी टीम एक विश्व कप से दूसरे विश्व कप तक अपराजित नहीं रही है और फिर दोबारा विश्व कप नहीं जीता है। अचानक एक खराब सीरीज या यहां-वहां तीन खराब मैच उन्हें खराब खिलाड़ी नहीं बना देते और न ही हमें खराब टीम बना देते हैं। इसलिए हमारे लिए निरंतरता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण था।” भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को शाम 7 बजे से खेला जाएगा।
अभिषेक शर्मा बोले-वैभव बहुत समझदार खिलाड़ी हैं, उन्हें बस मौके का आनंद लेकर सर्वश्रेष्ठ देना है: आईसीसी पुरुष टी-20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत के अहम खिलाड़ियों में शामिल अभिषेक शर्मा नए घरेलू सत्र में वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के साथ एक और खिताब जीतने के इरादे से मैदान पर उतरने को तैयार हैं। जियोस्टार के कार्यक्रम ‘फॉलो द ब्लूज़: जेन-नेक्स्ट अभिषेक’ में अभिषेक ने एक टूर्नामेंट से दूसरे टूर्नामेंट तक जीत की लय बनाए रखने, युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के साथ बातचीत और अपने स्वाभाविक खेल को खेलने के लिए टीम प्रबंधन से मिले समर्थन पर विस्तार से बात की। अभिषेक ने आईसीसी पुरुष टी-20 विश्व कप की जीत के बाद अगले विश्व कप में भी उसी सफलता को दोहराने और जीत की लय बरकरार रखने को लेकर कहा, “क्रिकेट में जब मैं आया था, तो 24 साल का था, अब मैं 26 साल का हूं। एक युवा क्रिकेटर के रूप में आप खुद से कहते हैं कि अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है, यह सिर्फ शुरुआत है। मुझे लगता है कि अभी भी आसान है, लेकिन उस चीज को आदत बनाना और बार-बार उसे दोहराना, प्रक्रिया को एक जैसा बनाए रखना, एक खिलाड़ी के रूप में आसान नहीं है। अगर टीम का माहौल ऐसा हो कि हर कोई एक-दूसरे के लिए प्रदर्शन करना चाहता हो, भारत को जीत दिलाना चाहता हो, दबदबा बनाना चाहता हो, तो मुझे लगता है कि यह एक आदत बन जाती है और निश्चित रूप से इससे मदद मिलती है।” युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के साथ अपनी बातचीत और उन्हें सहज महसूस कराने को लेकर अभिषेक ने कहा, “वह बहुत समझदार खिलाड़ी हैं। वह वैसे नहीं हैं जैसे हम 15 साल की उम्र में हुआ करते थे या कोई और होता है, क्योंकि वह पहले ही दो-तीन साल से उस क्रिकेट सेटअप का हिस्सा हैं। इसलिए उन्हें पता है कि क्या, कहां और कितना अभ्यास करना है। मुझे लगता है कि धीरे-धीरे अनुभव के साथ वह इन चीजों को और सीखेंगे। टीम में हम एक-दूसरे के साथ, सभी साथी खिलाड़ी चर्चा करते हैं कि हम उन्हें कैसे अधिक सहज महसूस करा सकते हैं। क्योंकि हम सभी जानते हैं कि उन्होंने क्या हासिल किया है और वह यहां के हकदार हैं। इसलिए मुझे भी लगता है कि यह मेरा कर्तव्य है कि मैं उन्हें महसूस कराऊं कि हम सभी, उनके बड़े भाई, उनके लिए यहां हैं। उन्हें बस आनंद लेना है और जब भी मौका मिले, अपना सर्वश्रेष्ठ देना है और मैच जीतना है।”
मुझे उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना है, क्योंकि वह आपके हाथ में नहीं है: अपने खेलने के तरीके और टीम प्रबंधन से मिले समर्थन पर अभिषेक ने कहा, “जब मैंने शुरुआत की थी, तो मैंने सोचा था कि मुझे इस तरह खेलना है कि मैं अपनी टीम के लिए प्रभावशाली पारियां खेल सकूं। इसकी शुरुआत घरेलू क्रिकेट में मेरी पंजाब टीम से हुई और हमने 2024 में घरेलू टी-20 प्रतियोगिता जीती। वहीं से मुझे लगता है कि एक सोच विकसित हुई कि मुझे उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना है, क्योंकि वह आपके हाथ में नहीं है। आपके हाथ में यह है कि आप कितना प्रभाव डाल सकते हैं। मैं इसी तरह खेलना चाहता हूं, चाहे हम किसी भी विपक्षी टीम के खिलाफ खेल रहे हों। एक खिलाड़ी के रूप में मेरे अंदर कभी यह इच्छा नहीं रही कि मुझे यह हासिल करना है या वह हासिल करना है। मेरा सिर्फ एक लक्ष्य था कि मुझे ट्रॉफियां जीतनी हैं। मुझे लगता है कि इसके लिए टीम, प्रबंधन, कोच और कप्तान से बहुत समर्थन चाहिए, क्योंकि वे जानते हैं कि आप कैसे खेलते हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने मेरी काफी मदद की है, पूरी टीम ने, सिर्फ सहयोगी स्टाफ ने नहीं, बल्कि खिलाड़ियों और वरिष्ठ खिलाड़ियों ने भी। अब, जैसे मेरे नए होने पर मेरे साथ हुआ था, वैसे ही नए खिलाड़ियों को भी वह आजादी मिलनी चाहिए, उन्हें महसूस होना चाहिए कि वे यहां के हैं। इसलिए मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मैं वैभव या दूसरे युवा खिलाड़ियों से बात करता हूं।” गेंदबाजों की रणनीति को पहले से समझने और अपनी तैयारी के बारे में अभिषेक ने कहा, “ऐसा नहीं है कि मैं बस जाता हूं और हिट करता हूं। मुझे पता है कि सामने विश्वस्तरीय गेंदबाज और विश्वस्तरीय टीमें हैं और वे आसानी से रन नहीं देंगे तथा आसानी से मुझे वे शॉट खेलने नहीं देंगे जो मैं खेलना चाहता हूं। लेकिन एक खिलाड़ी के रूप में मुझे लगता है कि यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं सोचूं कि वे क्या सोच रहे हैं। हाल ही में मैं अपने वीडियो विश्लेषक से बात कर रहा था कि अगर आप दूसरी टीम में होते, मान लीजिए कि इस समय आप अफगानिस्तान टीम के साथ काम कर रहे होते, तो एक गेंदबाज के तौर पर मेरे खिलाफ आपकी क्या योजना होती? इसलिए मैंने उनसे पूछा और उनसे वीडियो लिए। मैं इसी तरह तैयारी करता हूं कि वे वहां गेंदबाजी नहीं करेंगे जहां मैं चाहता हूं। मुझे कुछ बदलाव करने होंगे। वे आपको आसान रन नहीं देने वाले हैं। इसलिए मैं इसी तरह खुद को तैयार करता हूं।”
