आपसी तालमेल के अभाव में खूंटी में कमजोर हुई भाजपा

Politics

Eksandeshlive Desk

खूंटी : भाजपा के लिए कभी अभेद्य किला रहा खूंटी जिला पार्टी संगठन के दृष्टिकोण से लगातार कमजोर हो रहा हे। यह कोई और नहीं, बल्कि पार्टी के पुराने ओर वरिष्ठ नेता ही कह रहे हैं। खूंटी में एक ओर जहां भाजपा की लोकसभा और विधानसभा में करारी हार हुई, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं की गुटबाजी आंतरिक कलह के कारण जिले में पार्टी लगातार कमजोर होती जा रही है। साथ ही यहां भाजपा नेताओं में आपसी तालमेल का घोर अभाव है। पुराने कार्यकर्ता कहते हैं कि कड़िया मुंडा जैसे पार्टी के भीष्म पितामह की उपेक्षा, पुराने कार्यकर्ताओं को तरजीह नहीं देना और जनप्रतिनिधियों की जनता से दूरी के कारण यह स्थिति बनी।

पार्टी की कथनी और करनी में काफी अंतर आ गया है : पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा के सांसद प्रतिनिधि रह चुके मनोज कुमार कहते हैं कि 25 जून को भाजपा कार्यालय में आपातकाल के 50 वर्ष पूरा होने पर काला दिवस मनाया गया, जिसमें दोनों पूर्व सांसदों की अनदेखी की गई। यह समझना चाहिए था कि आपातकाल में कड़िया मुंडा ने तेरह महीने तक जेल में दिन काटे। खूंटी संसदीय क्षेत्र सहित झारखंड को एक नई पहचान दिलाई। उनकी अनदेखी काफी पीड़ादायक है। भाजपा नेता ज्योतिष भगत कहते हैं कि पार्टी की आंतरिक गुटबाजी और अनुभवी लोगों को दरकिनार करना पार्टी के लिए महंगा साबित हो रहा है। भाजपा नेता तुलसी भगत कहते हैं कि पार्टी की कथनी और करनी में काफी अंतर आ गया है। भाजयुमो के पूर्व जिला अध्यक्ष अनूप साहू कहते हैं कि पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को खूंटी की पूरी कहानी मालूम है। इसके बाद भी वह आंखें बंद कर बैठा है। भाजपा नेता नारायण साहू कहते हैं कि प्रदेश नेतृत्व को चाहिए कि वह दोनों गुटों के नेताओं को एक साथ बैठाकर मामले को सुलझाए। युवा मोर्चा के जिला सचिव रहे और युवा मोर्चा के नेता नीरज पाढ़ी कहते हैं कि जिला नेतृत्व की कमजोरी और प्रदेश नेतृत्व की अनदेखी के कारण संगठन कमजोर हो रहा है। पार्टी कें पूर्व जिलाध्यक्ष काशीनाथ महतो कहते है कि प्रदेश नेतृत्व को चाहिए कि वह तुरंत हस्तक्षेप कर गुटबाजी को दूर करे और सक्षम नेतृत्व को पार्टी की बागडोर सौंपे। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही, तो भाजपा का भी वही हश्र हो सकता है, जो आज खूंटी में झारखंड पार्टी का है। उल्लेखनीय है कि पिछले लोकसभा के साथ ही विधानसभा की सभी छह सीटों पर भाजपा को कड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। 1977 के बाद ऐसा पहली बार हुआ, जब खूंटी लोकसभा क्षेत्र के किसी भी सीट पर भाजपा का प्रतिनिधित्व नहीं है।

कोई गुटबाजी नहीं है, ऊर्जावान अध्यक्ष की जरूरत : भाजपा के जिला महामंत्री निखिल कंडुलना भाजपा में गुटबाजी से साफ इंकार करते हैं और कहते है कि गुटबाजी की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि जिला अध्यक्ष के अस्वस्थ होने के कारण जिस तरह क्षेत्र में पूरे जिले में सक्रियता के साथ कार्यकर्ताओं को समेट कर चलना चाहिए और नेताओं के साथ एक दूसरे से समन्वय स्थापित करना चाहिए, नहीं हो पा रहा है। आने वाले समय में पार्टी को चाहिए कि एक मजबूत और ऊर्जावान जिला अध्यक्ष को दायित्व सौंपे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह एकजुट है। पार्टी के सभी कार्यक्रम लगातार चल रहे है। कुछ एक-दो नेता अपवाद में हैं जो अपने आप को संगठन से भी ऊंचा समझते हैं, पर वे इसकी सजा भोग चुके हैं। निखिल ने कहा कि राजनीति में हार-जीत लगी रहती है। फिर से हम लोग मजबूत होकर अगली बार खूंटी लोकसभा एवं विधानसभा के सभी सीट जीतेंगे। उन्होंने कहा कि कड़िया मुंडा को निश्चित रूप से सम्मान मिलना चाहिए।

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