कस्तूरबा से रात के अंधेरे में आदिम जनजाति की दो बच्चियां बाउंड्री फांद कर हुई फरार

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स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही एक बार फिर हुई उजागर

Reporter:- अजय राज
प्रतापपुर(चतरा): प्रखंड मुख्यालय स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की लापरवाही का एक और बड़ा मामला उजागर हुआ है। जहां गुरुवार की रात करीब आठ बजे कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली दो बैगा बिरहोर जनजाति समुदाय की बच्चियां जिनकी उम्र क्रमशः 9 एवं 11 साल की है वो स्कूल की चाहरदीवारी तथा कांटेदार बाड़ को फांद कर भाग गई। इसकी जानकारी जब ग्रामीणों को मिली तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना संबंधित थाने तथा मीडिया के लोगों को दिया। सूचना के आलोक में “एक संदेश” दैनिक अखबार प्रतिनिधि के द्वारा ब्रेकिंग खबर चलाए जाने के बाद पूरे महकमे में खलबली मच गई। वहीं खबर की औपचारिक पुष्टि के लिए जब कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के वॉर्डेन सरिता सिन्हा तथा एक अन्य वार्डेन सुषमा कुमारी को कई बार फोन लगाया गया, परंतु उन्होंने फोन नहीं उठाया।लोगों का तो ये भी कहना हैं कि जिस वक्त यह वारदात हुई उस समय दोनों वार्डेन सह शिक्षिका विद्यालय से गायब थी और खबर चलने के बाद आनन फानन में वो विद्यालय पहुंची थी। जिसकी पुष्टि स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देख कर किया जा सकता है और सच्चाई सामने लाई जा सकती है कि क्या सचमुच दोनों वार्डेन सह शिक्षिका आवासीय विद्यालय से अनुपस्थित थी। वहीं पूरे मामले की जानकारी देते हुए थाना प्रभारी आलोक रंजन चौधरी ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए रात्रि में हीं पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संदीप सुमन के नेतृत्व में प्रतापपुर थाना के साथ मिलकर एक टीम का गठन किया गया। टीम द्वारा तथा कुछ स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर पुलिस पूरी रात प्रतापपुर सहित योगियारा के भितहा गांव एवं जंगलों में ख़ाख छानती रही परंतु बच्चियों को बरामद नहीं किया जा सका।।अंततः लगभग 12 घंटे बाद शुक्रवार की सुबह लगभग आठ बजे दोनों नाबालिक बच्चियों को भितहा जंगल से सुरक्षित बरामद कर लिया गया है।। इस पूरे मामले में कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की घोर लापरवाही और पढ़ने वाली बच्चियों के सुरक्षा में गंभीर चूक के रूप में देखा जा रहा है। मालूम हो कि रात के अंधेरे में कस्तूरबा आवासीय विद्यालय से बच्चियों का इस तरह बाउंड्री तड़प कर भागने का यह सिर्फ एक अकेला मामला नहीं है बल्कि इससे पहले भी इस तरह की घटना घट चुकी है। जब लगभग डेढ़ साल पहले स्कूल में पढ़ने वाली दो सीनियर क्लास की छात्राएं रात के लगभग 11 बजे प्रतापपुर बजरंग बली मोड़ पर संदेहास्पद परिस्थिति में अपना बैग आदि लेकर बैठी पाई गई थी। तब उस वक्त के उपप्रमुख लवली देवी के पति सम्मुख यादव की सूझबूझ से उन बच्चियों को सुरक्षित प्रशासन को सुपुर्द किया गया था।।तब कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के वार्डेन सुषमा कुमारी थी। अगले सुबह जिला शिक्षा अधीक्षक दिनेश मिश्रा कस्तूरबा आवासीय विद्यालय पहुंच कर जांच पड़ताल किए थे जिस स्थान से बाउंड्री फांद कर बच्चियां भागी थी उसे दुरुस्त करने, तार की फेंसिंग को मरम्मत करने , सीसीटीवी हमेशा चालू रखने आदि के निर्देश दिए थे साथ हीं मीडिया के सामने कार्य में लापरवाही बरतने वाले वार्डेन को शो कॉज करने की बात कही गई थी परंतु मामले को रफा दफा कर दिया गया था और किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।उसी का नतीजा है कि आज लगभग डेढ़ साल बाद वही घटना फिर से दोहराई गई है। इस घटना में भी दो बच्चियां रात के अंधेरे में आवासीय विद्यालय की बाउंड्री फांद कर भागी हैं। वार्डेन भी हमेशा की तरह वही दोनों सुषमा कुमारी और सरिता सिन्हा है। जांच में आए पदाधिकारी भी वही दिनेश मिश्रा पहुंचे हैं लेकिन मीडिया को देख कर बिना रुके गाड़ी में बैठकर निकल गए। वहीं इस मामले को लेकर जब वार्डेन सरिता सिन्हा से सवाल किया गया तो उनका वही पुराना रटा रटाया बहाना था कि बच्चियां डर कर बाउंड्री फांद कर भाग गई। वहीं यह पूछे जाने पर कि बच्चियों की जिम्मेवारी आप के ऊपर है ऐसे में इतनी बड़ी लापरवाही लगातार कैसे हो रही हैं? दोनों बच्चियां पूरी रात गायब रहीं अगर उनके साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेवार कौन होगा ??इस सवाल पर उन्होंने साफ पल्ला झाड़ लिया कि इसमें हमारी कोई गलती नहीं है।वहीं दूसरी ओर थाना प्रशासन के द्वारा दोनों नाबालिक बच्चियों को कस्तूरबा आवासीय विद्यालय को सुपुर्द किए जाने के कुछ घंटे बाद हीं दोनों बच्चियों को वार्डेन के द्वारा यह कह कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया कि अपने बच्चियों को ले जाओ हमलोग इसकी जिम्मेवारी नहीं ले सकते हैं।परिजनों ने कहा कि अब शायद हीं मेरी दोनों बच्ची कस्तूरबा में पढ़ पाएंगी।वहीं पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक दिनेश मिश्रा से दूरभाष पर बात की गई तो उन्होंने इतना भर कहा कि मामले की जांच की गई है तथा वार्डेन को शो कॉज करने की कार्यवाही की जा रही है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगातार इतनी बड़ी संवेदनशील मामले में तथा पढ़ने वाली बच्चियों के सुरक्षा में घोर लापरवाही होने के बावजूद आखिर शिक्षा विभाग दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उसे लीपापोती करने के फिराक में क्यों लग जाता है। आखिर कार्य में लापरवाही बरतने वाले वार्डेन आदि पर कार्यवाही करने के बजाय सिर्फ शो कॉज का खेल क्यों खेला जा रहा है।रात के अंधेरे में कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की बाउंड्री तड़प कर बच्चियां भाग रही हैं पूरी रात गायब रह रही हैं उनके साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी हो सकती थी इसके बावजूद हर बार मामले की लीपापोती करने का उद्देश्य क्या है? क्या विभाग मासूम बच्चियों के साथ किसी अनहोनी का इंतेज़ार कर रही हैं

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